अमेरिका में 50 मिनी इंडिया, पांच साल में 75 होंगे:ट्रम्प की सख्ती के बावजूद भारतीयों का ‘अमेरिकन ड्रीम’ कायम

अमेरिका में 50 मिनी इंडिया, पांच साल में 75 होंगे:ट्रम्प की सख्ती के बावजूद भारतीयों का ‘अमेरिकन ड्रीम’ कायम

भारतीयों का ‘अमेरिकन ड्रीम’ अब भी जिंदा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वीजा, ट्रेड और ग्रीन कार्ड से जुड़ी सख्त नीतियों के बावजूद भारतीयों का अमेरिका जाना और वहां बसना जारी है। पिछले 20 साल में अमेरिका में 50 से ज्यादा ‘मिनी इंडिया’ यानी भारतीयों की बड़ी बस्तियां विकसित हुई हैं। अनुमान है कि अगले 5 साल में इनकी संख्या 75 तक पहुंच सकती है। इन इलाकों में रहने वाले भारतीय परिवारों की औसत कमाई स्थानीय अमेरिकी परिवारों से लगभग दोगुनी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, टेक, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में बढ़ते अवसरों की वजह से भारतीय परिवार अब पुराने भीड़भाड़ वाले इलाकों से निकल कर शहर से लगे नए इलाकों में में बस रहे हैं। भारतीय परिवारों की आय अमेरिकी परिवारों से ज्यादा भारतीय परिवारों की औसत सालाना आय करीब 1.54 करोड़ रुपए है, जबकि अमेरिकी परिवारों की औसत आय करीब 80 लाख रुपए है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ सकता है। कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा भारतवंशी अमेरिका में सबसे ज्यादा भारतीय मूल के लोग कैलिफोर्निया में रहते हैं। यहां उनकी संख्या करीब 9.3 लाख है। इसकी बड़ी वजह राज्य का मजबूत आईटी सेक्टर है। दूसरे नंबर पर टेक्सास है, जहां करीब 5.4 लाख भारतवंशी रहते हैं। भारतवंशी अमेरिकियों से पढ़ाई में भी आगे भारतीय मूल के लोग शिक्षा के मामले में भी आगे हैं। अमेरिका में जहां 25% लोगों के पास बैचलर्स डिग्री है, वहीं भारतवंशियों में यह आंकड़ा 54% है। मास्टर्स या पीएचडी डिग्री रखने वालों में भी भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 60% है। किसी भी प्रवासी समुदाय में यह सबसे ज्यादा है। फ्रिस्को में 19% लोग भारतीय मूल के हैं टेक्सास का फ्रिस्को शहर 25 साल पहले तक ज्यादातर खेतों वाला इलाका था। आज यहां की आबादी 2.5 लाख से ज्यादा है और करीब 19% लोग भारतीय मूल के हैं। 2008 में बना कार्य सिद्धि हनुमान मंदिर अब भारतीय समुदाय का बड़ा केंद्र बन चुका है। आसपास के प्लेनो और एलन शहरों में भी भारतीय मंदिर, रेस्तरां और दुकानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डबलिन के स्कूलों में 41% छात्र भारतीय मूल के कैलिफोर्निया के डबलिन और सैन रेमन इलाके में भारतीय आबादी करीब 18% है। डबलिन के स्कूलों में 41% छात्र भारतीय मूल के हैं। यहां भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है। नई पीढ़ी दिवाली भी मनाती है और वीकेंड पर क्रिकेट भी खेलती है। भारतीय खाने की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि कई जगह ड्राइव-थ्रू भारतीय फूड आउटलेट भी खुल गए हैं। सिलिकॉन वैली में भारतीयों का असर बढ़ेगा भास्कर एक्सपर्ट विलियम फ्रे के मुताबिक, सिलिकॉन वैली में भारतीयों की भूमिका आने वाले समय में और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि भारतीयों का यह सफर करीब 25 साल पहले शुरू हुआ था और अब इसकी रफ्तार और बढ़ रही है। आज सिलिकॉन वैली के लगभग 35% स्टार्टअप्स में कम से कम एक भारतीय मूल का सह-संस्थापक है। फ्रे का मानना है कि आईटी सेक्टर में भारतीयों की मजबूत मौजूदगी के कारण अमेरिका के दूसरे राज्यों में भी नए ‘मिनी इंडिया’ विकसित होंगे। भारतीय समुदाय अमेरिका की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहा है और किसी भी अन्य प्रवासी समुदाय की तुलना में उसकी भूमिका ज्यादा मजबूत दिखाई देती है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… आतंकी लादेन की हिट लिस्ट में भारत भी था: CIA के खुफिया दस्तावेज में खुलासा आतंकी संगठन अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन 9/11 हमले से पहले भारत को भी निशाना बनाना चाहता था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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