BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में 12-13 सितंबर को आयोजित होने जा रहे BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर दुनिया भर में हलचल तेज हो गई है। इस बार सम्मेलन का केंद्र बिंदु पश्चिम एशिया के दो प्रमुख देशों ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच जारी मतभेदों को खत्म करना माना जा रहा है।
रूस के राष्ट्रपति भवन (क्रेमलिन) के आधिकारिक प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने साफ किया है कि मॉस्को इन दोनों मित्र देशों के रिश्तों को सामान्य करने के लिए हर संभव मदद देने को तैयार है। नई दिल्ली में जारी शेरपा बैठकों में घोषणापत्र के मसौदे पर आम सहमति बनाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
तीन बड़े मुद्दों पर होगी बात
इस बार भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहा यह शिखर सम्मेलन मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। पहले क्षेत्र के तहत राजनीति और सुरक्षा से जुड़े मसलों पर चर्चा होगी, जिसमें आतंकवाद, मादक पदार्थों की अवैध तस्करी को रोकने और हाई-टेक संचार प्रणालियों की सुरक्षा पर मिलकर काम करने पर जोर दिया जाएगा। दूसरे क्षेत्र में अर्थव्यवस्था और वित्त शामिल हैं, जहां सदस्य देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने और व्यापारिक को आसान करने की रणनीतियों पर बात होगी। तीसरे क्षेत्र के रूप में सांस्कृतिक और मानवीय संपर्कों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसके तहत ‘BRICS ब्रेन एक्सचेंज’, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाएं और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में साथ मिलकर कदम उठाना।
क्यों फंसा है ईरान और UAE का पेंच?
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को लेकर ईरान और UAE अलग-अलग पक्षों के साथ खड़े हैं। यही वजह है कि इससे पहले मई महीने में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक भी बिना किसी साझा बयान के समाप्त हो गई थी।
अब नई दिल्ली में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने का रास्ता ढूंढा जा रहा है। रूसी प्रवक्ता पेसकोव के अनुसार, इन मतभेदों से दस्तावेजों को तैयार करने में थोड़ी परेशानी जरूर आई है, लेकिन भारतीय और ब्रिक्स के अन्य राजनयिक जल्द ही ऐसा रास्ता निकाल लेंगे जो दोनों देशों को मंजूर हो।
90% कारोबार अपनी मुद्रा में, डॉलर पर रूस का बयान
वैश्विक व्यापार पर बात करते हुए क्रेमलिन ने बताया कि रूस अब ब्रिक्स देशों के साथ अपना 90 फीसदी लेन-देन अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया, रूबल, युआन आदि) में कर रहा है। पेसकोव ने स्पष्ट किया कि यह कदम डॉलर को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और डॉलर पर घटते भरोसे की वजह से उठाया गया है।
ब्रिक्स ‘पश्चिम विरोधी’ नहीं
रूस और भारत दोनों ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है कि BRICS कोई ‘पश्चिम विरोधी’ गुट है। इसे बिना किसी सख्त चार्टर वाला एक ऐसा मंच बताया गया है जो किसी तीसरे देश के खिलाफ काम करने के बजाय सदस्य देशों के आपसी सहयोग और वैश्विक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS की बढ़ती ताकत
साल 2024 और 2025 में नए देशों के जुड़ने के बाद अब ब्रिक्स में 11 देश शामिल हो चुके हैं। यह समूह आज दुनिया की कुल 49.5 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इसका योगदान लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इतना ही नहीं, दुनिया के कुल व्यापार का करीब 26 प्रतिशत हिस्सा भी ब्रिक्स देशों के पास है।
शिखर सम्मेलन में जुटेंगे बड़े नेता
भारत में होने वाले इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई बड़े नेता हिस्सा लेंगे। इसके अलावा वियतनाम, मलेशिया, थाईलैंड और बेलारूस जैसे सहयोगी देशों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे।

