Noida पुलिस ने Gautam Buddha University के छात्र को भेजा 5 लाख का शांति बांड नोटिस, बाद में किया रद्द

Noida पुलिस ने Gautam Buddha University के छात्र को भेजा 5 लाख का शांति बांड नोटिस, बाद में किया रद्द

नोएडा, आठ सितंबर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के एक छात्र को पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने के लिए नोटिस जारी किया गया है। पुलिस का आरोप है कि छात्र ने अन्य विद्यार्थियों को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि बाद में छात्र को जारी किया गया ‘‘शांति बनाए रखने का बंधपत्र नोटिस’’ वापस ले लिया गया। ‘शांति बंधपत्र नोटिस’ कोई सजा या किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना नहीं होता है। यह एक एहतियाती कदम होता है, जिसके तहत प्रशासन किसी व्यक्ति से यह आश्वासन लेने के लिए आर्थिक बंधपत्र भरवा सकता है कि वह शांति बनाए रखेगा और ऐसी गतिविधियों से दूर रहेगा, जिनसे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

छात्र अक्षत त्रिपाठी ने हालांकि, आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उसने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण ढंग से भाग लिया था और उस समय वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहा था। यह नोटिस चार सितंबर को ग्रेटर नोएडा आयुक्तालय के तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 130 के तहत जारी किया गया था। यह कार्रवाई सहायक पुलिस आयुक्त की ओर से धारा 126 और 135 के तहत शुरू की गई कार्यवाही के बाद की गई।

नोटिस में कहा गया था कि यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों को ‘‘कॉजपा पार्टी’’ के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे और पुलिस के अनुसार ‘‘सरकार विरोधी और भ्रामक’’ सूचनाएं फैला रहे थे। नोटिस में कहा गया कि ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा हो सकता है और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया था कि क्यों न उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने का आदेश दिया जाए और इसके लिए उनसे पांच लाख रुपये का निजी मुचलका तथा इतनी ही राशि के दो स्थानीय सक्षम जमानतदार पेश करने को कहा जाए।

इस मामले में सुनवाई के लिए पांच सितंबर की तारीख तय की गई थी। इकोटेक-1 थाने के उपनिरीक्षक शिव पांडेय की ओर से तैयार और थाना प्रभारी द्वारा अग्रेषित पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज के झूंसी के मूल निवासी त्रिपाठी वर्तमान में इकोटेक-1 क्षेत्र में रह रहे हैं और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के छात्र हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि त्रिपाठी विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को एक राजनीतिक दल द्वारा प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था और भ्रामक तथा सरकार विरोधी विमर्श प्रसारित कर रहा था।

पुलिस ने दावा किया कि उसकी गतिविधियों से विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया और सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका उत्पन्न हो गई थी। हालांकि, मंगलवार को इकोटेक थाने की पुलिस ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद चार सितंबर को ही नोटिस निरस्त कर दिया गया और संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में सूचित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में त्रिपाठी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन में भाग लिया था।

उसने दावा किया कि वह उस समय विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहा था क्योंकि संस्थान लगभग तीन महीने से बंद था। त्रिपाठी ने यह भी दावा किया कि 20 जुलाई को जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे, तब दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वह घायल हो गया था। ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे ‘‘दमनकारी’’ बताया और उत्तर प्रदेश सरकार व पुलिस की आलोचना की।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘कॉजपा’ के सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘क्या गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी (मेधा रूपम) ने उच्चतम न्यायालय के एक सितंबर के ऐतिहासिक आदेश को नहीं पढ़ा है? ‘कॉजपा’ के प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए सभी प्रदर्शनकारियों को किसी भी कानूनी कार्रवाई से स्थायी छूट मिली हुई है। अक्षय त्रिपाठी को पांच लाख रुपये का जमानत बॉन्ड भरने की जरूरत नहीं है।’’
दास ने पोस्ट में कहा, ‘‘हमने केंद्र सरकार से तुरंत इस पर कार्रवाई करने और जिलाधिकारी को फैसले की प्रति भेजने के लिए कहा है।

हम किसी भी छात्र को निशाना नहीं बनने देंगे।

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