मेलबर्न, आठ सितंबर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) ने मंगलवार को बिग बैश लीग (बीबीएल) में निजी निवेश करने को मंजूरी दे दी है जिसके बाद इस टी20 लीग की टीम मेलबर्न रेनेगेड्स की बिक्री का रास्ता साफ हो गया है लेकिन देश के खिलाड़ियों के संघ ने कहा कि नई योजना में ‘‘महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।’’
सीए ने घोषणा की कि वह मेलबर्न रेनेगेड्स में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए निजी मालिकों से बोलियां आमंत्रित करेगा। लेकिन ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स एसोसिएशन (एसीए) के सीईओ पॉल मार्श ने कहा कि दोनों संस्थाएं अभी ‘नए समझौते के करीब नहीं पहुंचे हैं’‘, जिसमें खिलाड़ियों के साथ वेतन से जुड़ा समझौता भी शामिल है। क्रिकेट डॉट कॉम एयू की रिपोर्ट के अनुसार फ्रेंचाइजी का नया स्वामित्व 2027-28 के बिग बैश लीग और महिला बिग बैश लीग (डब्ल्यूबीबीएल) के लिए लागू रहेगा तथा बिक्री प्रक्रिया का बीबीएल और डब्ल्यूबीबीएल के आगामी सत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।मेलबर्न रेनेगेड्स टीम का संचालन अभी क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीए अन्य क्लबों को भी बिक्री के लिए रखने पर भी विचार करेगा। होबार्ट हरिकेंस, पर्थ स्कॉर्चर्स और मेलबर्न स्टार्स अन्य क्लब हैं जिनके बारे में माना जाता है कि वे निजी निवेश में रुचि रखते हैं।लेकिन सिडनी सिक्सर्स, सिडनी थंडर, ब्रिस्बेन हीट और एडिलेड स्ट्राइकर्स जैसी अन्य टीम की फिलहाल निजी निवेश में दिलचस्पी नहीं है लेकिन भविष्य में इन टीमों के लिए बिक्री का विकल्प खुला रहेगा। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अध्यक्ष माइक बेयर्ड ने कहा कि सीए अंतरराष्ट्रीय मैचों के कार्यक्रम, खिलाड़ियों की उपलब्धता, वेतन सीमा के साथ-साथ मीडिया अधिकारों पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। बेयर्ड ने आगे कहा, ‘‘क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया बिग बैश लीग में निजी निवेश के द्वार खोलकर खेल के दीर्घकालिक भविष्य को मजबूत और सुरक्षित करने, विकास को गति देने और सामुदायिक क्रिकेट और जमीनी स्तर की भागीदारी, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर तथा उच्च स्तरीय क्रिकेट में निवेश जारी रखने के लिए सुनियोजित कदम उठा रहा है।’’
एसीए के सीईओ मार्श ने कहा, ‘‘खिलाड़ियों का संगठन निजी निवेश के प्रति ‘खुले विचार’ रखता है, लेकिन नए समझौते और अनुबंध प्रणाली को लेकर चर्चा की जानी चाहिए, जिसमें संभवतः नए टीम मालिक भी शामिल होंगे।कई महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं और दोनों पक्ष फिलहाल नए समझौते से काफी दूर हैं।
मेलबर्न, आठ सितंबर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) ने मंगलवार को बिग बैश लीग (बीबीएल) में निजी निवेश करने को मंजूरी दे दी है जिसके बाद इस टी20 लीग की टीम मेलबर्न रेनेगेड्स की बिक्री का रास्ता साफ हो गया है लेकिन देश के खिलाड़ियों के संघ ने कहा कि नई योजना में ‘‘महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।’’
सीए ने घोषणा की कि वह मेलबर्न रेनेगेड्स में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए निजी मालिकों से बोलियां आमंत्रित करेगा। लेकिन ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स एसोसिएशन (एसीए) के सीईओ पॉल मार्श ने कहा कि दोनों संस्थाएं अभी ‘नए समझौते के करीब नहीं पहुंचे हैं’‘, जिसमें खिलाड़ियों के साथ वेतन से जुड़ा समझौता भी शामिल है। क्रिकेट डॉट कॉम एयू की रिपोर्ट के अनुसार फ्रेंचाइजी का नया स्वामित्व 2027-28 के बिग बैश लीग और महिला बिग बैश लीग (डब्ल्यूबीबीएल) के लिए लागू रहेगा तथा बिक्री प्रक्रिया का बीबीएल और डब्ल्यूबीबीएल के आगामी सत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मेलबर्न रेनेगेड्स टीम का संचालन अभी क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीए अन्य क्लबों को भी बिक्री के लिए रखने पर भी विचार करेगा। होबार्ट हरिकेंस, पर्थ स्कॉर्चर्स और मेलबर्न स्टार्स अन्य क्लब हैं जिनके बारे में माना जाता है कि वे निजी निवेश में रुचि रखते हैं।
लेकिन सिडनी सिक्सर्स, सिडनी थंडर, ब्रिस्बेन हीट और एडिलेड स्ट्राइकर्स जैसी अन्य टीम की फिलहाल निजी निवेश में दिलचस्पी नहीं है लेकिन भविष्य में इन टीमों के लिए बिक्री का विकल्प खुला रहेगा। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अध्यक्ष माइक बेयर्ड ने कहा कि सीए अंतरराष्ट्रीय मैचों के कार्यक्रम, खिलाड़ियों की उपलब्धता, वेतन सीमा के साथ-साथ मीडिया अधिकारों पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। बेयर्ड ने आगे कहा, ‘‘क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया बिग बैश लीग में निजी निवेश के द्वार खोलकर खेल के दीर्घकालिक भविष्य को मजबूत और सुरक्षित करने, विकास को गति देने और सामुदायिक क्रिकेट और जमीनी स्तर की भागीदारी, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर तथा उच्च स्तरीय क्रिकेट में निवेश जारी रखने के लिए सुनियोजित कदम उठा रहा है।’’
एसीए के सीईओ मार्श ने कहा, ‘‘खिलाड़ियों का संगठन निजी निवेश के प्रति ‘खुले विचार’ रखता है, लेकिन नए समझौते और अनुबंध प्रणाली को लेकर चर्चा की जानी चाहिए, जिसमें संभवतः नए टीम मालिक भी शामिल होंगे।
कई महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं और दोनों पक्ष फिलहाल नए समझौते से काफी दूर हैं।
Hindi News – News in Hindi – Latest News in Hindi | Prabhasakshi

