सुप्रीम कोर्ट में अरावली की परिभाषा तय करने के लिए बनाई गई हाई पावर्ड कमेटी को 30 नवंबर तक हर हाल में रिपोर्ट देनी होगी। कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट देने की समय सीमा 6 माह बढ़ाने की अपील की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहाना की पीठ ने कहा कि अगर कमेटी 30 नवंबर तक रिपोर्ट नहीं दे सकती है, तो कमेटी बदलने पर ही विचार करेंगे। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ‘क्या कमेटी मेरे रिटायरमेंट का इंतजार कर रही है’। समिति अरावली मुद्दे पर रिपोर्ट के लिए दिन-रात काम करे। पीठ ने कहा कि समिति को राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों सहित सभी हितधारकों को सुनना चाहिए। साथ ही, अदालत को तत्काल प्रश्नों को अलग से हल करने में सक्षम बनाने के लिए मुद्देवार अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकती है। इसके बाद अदालत ने मामले को 2 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया। पिछले साल 28 दिसंबर को अरावली पहाड़ियों की परिभाषा पर अपने द्वारा मंजूर किए गए विवाद के बीच, शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया था। 100 मी. से अधिक ऊंची पहाड़ी को अरावली मानने पर विवाद था अरावली जिलों में एक भू-आकृति को अरावली पहाड़ी के रूप में योग्य मानने को लेकर विवाद हुआ था। केंद्र की सिफारिश के अनुसार, स्थानीय भूभाग से कम से कम 100 मीटर ऊपर उठती है। 500 मीटर की दूरी के भीतर स्थित ऐसी दो या अधिक पहाड़ियों को अरावली श्रेणी के हिस्से के रूप में माना जाना था।
क्या रिटायरमेंट का इंतजार है?:सीजेआई ने कहा- अरावली की रिपोर्ट 3 माह में नहीं मिली तो कमेटी बदल देंगे

