सांप के डंसने से 3 साल के बच्चे की मौत:सुपौल में घर में खेल रहा था बच्चा, परिजन ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप

सांप के डंसने से 3 साल के बच्चे की मौत:सुपौल में घर में खेल रहा था बच्चा, परिजन ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप

सुपौल के प्रतापगंज थाना क्षेत्र के सुखानगर पंचायत स्थित बाबूसथान गांव के वार्ड-8 में सोमवार को सर्पदंश से तीन वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। बच्चा घर में खेल रहा था। इसी दौरान जहरीले सांप ने उसे डंस लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आनन-फानन में प्रतापगंज स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यहां प्राथमिक जांच के बाद उसे राघोपुर रेफरल अस्पताल रेफर कर दिया गया। राघोपुर अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चे ने दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान बाबूसथान वार्ड-8 निवासी ठक्को सादा के 3 साल का बेटा सागर कुमार के रूप में हुई है। बच्चे की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने इलाज में कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इलाज में लापरवाही की पुष्टि नहीं की गई है। घर में खेल रहा था बच्चा, अचानक सांप ने डंसा परिजनों के मुताबिक, सोमवार को सागर घर में ही खेल रहा था। इसी दौरान अचानक सांप ने उसे डंस लिया। बच्चे के सर्पदंश की जानकारी मिलते ही परिवार के लोग घबरा गए और उसे तत्काल प्रतापगंज स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां से उसे राघोपुर रेफरल अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके बाद एंबुलेंस से बच्चे को राघोपुर ले जाया गया। परिजनों के मुताबिक, राघोपुर पहुंचने के बाद बच्चे की हालत काफी गंभीर हो चुकी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रतापगंज के डॉक्टर बोले- सर्पदंश के स्पष्ट लक्षण नहीं दिख रहे थे प्रतापगंज अस्पताल के ड्यूटी चिकित्सक डॉ. ललित राम ने बताया कि जब बच्चे को अस्पताल लाया गया था, उस समय सर्पदंश के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। ओपीडी में चिकित्सकीय जांच के बाद बच्चे को राघोपुर रेफर किया गया। डॉ. ललित राम के अनुसार, बच्चे को बेहतर चिकित्सा सुविधा और वरिष्ठ चिकित्सकों की उपलब्धता को देखते हुए राघोपुर रेफर किया गया था। उनका कहना है कि बच्चे की स्थिति को देखते हुए उसे आगे के इलाज के लिए भेजा गया। राघोपुर पहुंचने तक हालत बेहद गंभीर थी राघोपुर रेफरल अस्पताल के डॉ. संजीव कुमार द्विवेदी ने बताया कि एंबुलेंस से बच्चे को अस्पताल पहुंचाए जाने के समय उसकी हालत अत्यंत गंभीर थी। चिकित्सक के अनुसार, बच्चे की पुतलियां डाइलेटेड थीं और उसकी स्थिति चिंताजनक थी। डॉक्टरों ने बच्चे को बचाने के लिए तत्काल सीपीआर दिया। इसके साथ ही कैनुला लगाया गया और आवश्यक चिकित्सकीय प्रयास किए गए। चिकित्सकों के मुताबिक, बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। परिजनों का आरोप- समय पर उचित इलाज मिलता तो बच जाती जान बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में इलाज को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अगर सागर को समय पर उचित इलाज और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी। परिजनों ने पूरे मामले की जांच कराने और लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में किसी तरह की लापरवाही की पुष्टि नहीं की है। चिकित्सकों ने बच्चे के अस्पताल पहुंचने के समय उसकी अत्यंत गंभीर हालत को मौत की वजह बताया है। सिविल सर्जन बोले- जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी मामले को लेकर सुपौल के सिविल सर्जन डॉ. बाबू साहब झा ने कहा कि घटना की जानकारी लेकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मी या चिकित्सक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि जिले के सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश के इलाज के लिए आवश्यक दवा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि सर्पदंश के मामलों में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है। मासूम की मौत से गांव में मातम सागर की मौत के बाद बाबूसथान गांव में मातम पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। तीन साल के मासूम की अचानक हुई मौत से ग्रामीण भी स्तब्ध हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि अस्पताल में इलाज के बाद बच्चा ठीक हो जाएगा, लेकिन कुछ ही समय में उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। सुपौल के प्रतापगंज थाना क्षेत्र के सुखानगर पंचायत स्थित बाबूसथान गांव के वार्ड-8 में सोमवार को सर्पदंश से तीन वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। बच्चा घर में खेल रहा था। इसी दौरान जहरीले सांप ने उसे डंस लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आनन-फानन में प्रतापगंज स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यहां प्राथमिक जांच के बाद उसे राघोपुर रेफरल अस्पताल रेफर कर दिया गया। राघोपुर अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चे ने दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान बाबूसथान वार्ड-8 निवासी ठक्को सादा के 3 साल का बेटा सागर कुमार के रूप में हुई है। बच्चे की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने इलाज में कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इलाज में लापरवाही की पुष्टि नहीं की गई है। घर में खेल रहा था बच्चा, अचानक सांप ने डंसा परिजनों के मुताबिक, सोमवार को सागर घर में ही खेल रहा था। इसी दौरान अचानक सांप ने उसे डंस लिया। बच्चे के सर्पदंश की जानकारी मिलते ही परिवार के लोग घबरा गए और उसे तत्काल प्रतापगंज स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां से उसे राघोपुर रेफरल अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके बाद एंबुलेंस से बच्चे को राघोपुर ले जाया गया। परिजनों के मुताबिक, राघोपुर पहुंचने के बाद बच्चे की हालत काफी गंभीर हो चुकी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रतापगंज के डॉक्टर बोले- सर्पदंश के स्पष्ट लक्षण नहीं दिख रहे थे प्रतापगंज अस्पताल के ड्यूटी चिकित्सक डॉ. ललित राम ने बताया कि जब बच्चे को अस्पताल लाया गया था, उस समय सर्पदंश के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। ओपीडी में चिकित्सकीय जांच के बाद बच्चे को राघोपुर रेफर किया गया। डॉ. ललित राम के अनुसार, बच्चे को बेहतर चिकित्सा सुविधा और वरिष्ठ चिकित्सकों की उपलब्धता को देखते हुए राघोपुर रेफर किया गया था। उनका कहना है कि बच्चे की स्थिति को देखते हुए उसे आगे के इलाज के लिए भेजा गया। राघोपुर पहुंचने तक हालत बेहद गंभीर थी राघोपुर रेफरल अस्पताल के डॉ. संजीव कुमार द्विवेदी ने बताया कि एंबुलेंस से बच्चे को अस्पताल पहुंचाए जाने के समय उसकी हालत अत्यंत गंभीर थी। चिकित्सक के अनुसार, बच्चे की पुतलियां डाइलेटेड थीं और उसकी स्थिति चिंताजनक थी। डॉक्टरों ने बच्चे को बचाने के लिए तत्काल सीपीआर दिया। इसके साथ ही कैनुला लगाया गया और आवश्यक चिकित्सकीय प्रयास किए गए। चिकित्सकों के मुताबिक, बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। परिजनों का आरोप- समय पर उचित इलाज मिलता तो बच जाती जान बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में इलाज को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अगर सागर को समय पर उचित इलाज और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी। परिजनों ने पूरे मामले की जांच कराने और लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में किसी तरह की लापरवाही की पुष्टि नहीं की है। चिकित्सकों ने बच्चे के अस्पताल पहुंचने के समय उसकी अत्यंत गंभीर हालत को मौत की वजह बताया है। सिविल सर्जन बोले- जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी मामले को लेकर सुपौल के सिविल सर्जन डॉ. बाबू साहब झा ने कहा कि घटना की जानकारी लेकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मी या चिकित्सक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि जिले के सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश के इलाज के लिए आवश्यक दवा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि सर्पदंश के मामलों में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है। मासूम की मौत से गांव में मातम सागर की मौत के बाद बाबूसथान गांव में मातम पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। तीन साल के मासूम की अचानक हुई मौत से ग्रामीण भी स्तब्ध हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि अस्पताल में इलाज के बाद बच्चा ठीक हो जाएगा, लेकिन कुछ ही समय में उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।  

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