कोच्चि-अबुधाबी प्लेन का फ्यूल 36 हजार फीट पर कम हुआ:50 मिनट बाद मोड़ना पड़ा, कोच्चि में इमरजेंसी लैंडिंग; वजन भी ज्यादा था

कोच्चि-अबुधाबी प्लेन का फ्यूल 36 हजार फीट पर कम हुआ:50 मिनट बाद मोड़ना पड़ा, कोच्चि में इमरजेंसी लैंडिंग; वजन भी ज्यादा था

एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान IX 415 को इंजन-1 में तेल की मात्रा तेजी से घटने के बाद अबू धाबी से कोच्चि लौटना पड़ा। 36,000 फीट की ऊंचाई पर तेल का दबाव खतरे की सीमा में पहुंचने पर क्रू ने इंजन बंद कर दिया। बोइंग 737 ने कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। एक इंजन बंद होने और विमान के ओवरवेट होने के बावजूद क्रू ने लैंडिंग पूरी की। विमान में सवार यात्री कॉकपिट में बने हालात की गंभीरता से अनजान रहे। यह घटना 7 सितंबर की है। इसकी जानकारी न्यूज एजेंसी ANI और सूत्रों के हवाले से सामने आई है। एयर इंडिया एक्सप्रेस और DGCA की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं मिली है। सूत्रों के मुताबिक, उड़ान भरने के करीब 50 मिनट बाद विमान 36,000 फीट की ऊंचाई पर था। तभी पायलट और को-पायलट ने इंजन-1 में तेल की मात्रा तेजी से घटते हुए देखी। क्रू ने FORDEC आकलन किया। तेल की मात्रा लगातार कम होती रही, इसलिए उन्होंने अबू धाबी जाने वाली उड़ान रद्द कर कोच्चि लौटने का फैसला किया। कमांडर ने हाई फ्रीक्वेंसी के जरिए मुंबई रेडियो से संपर्क किया और ATC को उड़ान के कोच्चि लौटने की जानकारी दी। विमान ने तय सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत दिशा बदली। विमान के लौटने के दौरान दोनों पायलट इंजन के सभी पैरामीटर पर नजर रखते रहे। उन्होंने हर संभावित स्थिति के लिए तैयारी की। विमान के वापस मुड़ने के करीब 45 मिनट बाद इंजन-1 का तेल दबाव अस्थिर होने लगा। कॉकपिट गेज पर यह लाल निशान यानी खतरे की सीमा में पहुंच गया। इसके बाद क्रू ने नॉन-नॉर्मल चेकलिस्ट (NNC) का पालन किया और इंजन-1 बंद कर दिया। एक इंजन पर बोइंग 737 को ओवरवेट स्थिति में उतारना ज्यादा काम और जोखिम वाला ऑपरेशन माना जाता है। क्रू ने इसे सुरक्षित तरीके से पूरा किया। भारत में तकनीकी डायवर्जन पर सवाल भारतीय एयरलाइंस में तकनीकी कारणों से उड़ानों का डायवर्जन लगभग हर हफ्ते होने की बात सामने आ रही है। यह घटना एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की एयर इंडिया फुकेत-दिल्ली उड़ान पर जारी शुरुआती रिपोर्ट के कुछ दिन बाद हुई है। उस रिपोर्ट के मुताबिक, एयरबस के तकनीकी विशेषज्ञों ने जांच टीम की मौजूदगी में संबंधित विमान का तीन दिन तक निरीक्षण किया था। इसके बाद हाइड्रोलिक उपकरण और हाइड्रोलिक सैंपल आगे की जांच के लिए लिए गए थे। फुकेत-दिल्ली घटना के बाद केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा था कि DGCA फ्लाइट क्रू के साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच का सालाना प्रतिशत बढ़ाएगा। अब एयर इंडिया एक्सप्रेस की इंजन-ऑयल घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या नागरिक उड्डयन मंत्रालय DGCA के सेफ्टी ऑडिट के नियमों को भी और सख्त करेगा। भारत के सेफ्टी ऑडिट पर नजर अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) आमतौर पर इंटरनेशनल एविएशन सेफ्टी असेसमेंट (IASA) प्रोग्राम के तहत किसी देश की सुरक्षा निगरानी की समीक्षा करीब हर पांच साल में करता है। भारत का पिछला बड़ा IASA ऑडिट अक्टूबर 2021 में हुआ था। अगला ऑडिट इस साल नवंबर में होने की उम्मीद है। यह देखना अहम होगा कि नई दिल्ली इस समय का इस्तेमाल DGCA के सेफ्टी ऑडिट से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए करती है या नहीं। एयर इंडिया एक्सप्रेस और DGCA की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी प्रतीक्षित है।

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