Kerala के Thrissur में NH-66 पर दर्दनाक हादसा, 8 छात्रों की मौत

Kerala के Thrissur में NH-66 पर दर्दनाक हादसा, 8 छात्रों की मौत

त्रिशूर (केरलम), पांच सितंबर केरलम के त्रिशूर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-66 पर एक कार के सड़क किनारे “अवैध रूप से” खड़ी लॉरी से टकरा जाने से तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज के आठ छात्रों की मौत हो गई। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। इस हादसे के बाद, कोडुंगल्लूर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले केरलम के खेल मंत्री ओ जे जनीश ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

पुलिस के अनुसार, यह हादसा शुक्रवार रात 11 बजकर 40 मिनट पर काईपमंगलम के पनमबिक्कुन्नू में उस समय हुआ, जब गुरुवायुर से कोडुंगल्लूर की ओर जा रही कार महाराष्ट्र में पंजीकृत लॉरी से जा टकराई। प्राथमिकी के अनुसार, निर्माण कार्य की वजह से वाहनों के मार्ग में परिवर्तन के लिए अवरोधक लगाए गए थे। लॉरी अवरोधक वाले हिस्से के पास सड़क के दाहिनी ओर अवैध रूप से खड़ी थी।

पुलिस ने बताया कि कार की रफ्तार तेज थी और चालक अवरोधक को संभवत: देख नहीं पाया, जिससे कार लॉरी के पिछले हिस्से में जा घुसी। पुलिस ने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि छह छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य को नजदीकी अस्पताल ले जाने पर मृत घोषित कर दिया गया। ये सभी डिंडीगुल के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र थे और एनएच-66 से होते हुए कोडुंगल्लूर की ओर जा रहे थे।

पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान डिंडीगुल निवासी सूर्या, युवासंजीत, जोशुआ, मुरली व जीवा, मदुरै निवासी संतोष व प्रसन्ना तथा सेलम निवासी विश्व के रूप में हुई है। स्थानीय निवासियों, दमकलकर्मियों और पुलिस ने मिलकर बचाव अभियान चलाया और शवों को कार से बाहर निकाला। पुलिस ने बताया कि शवों को त्रिशूर मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर में रखवाया गया है।

काईपमंगलम पुलिस ने लॉरी चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। हादसे के बाद चालक लॉरी छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने छात्रों के पास मिले पहचान पत्रों के जरिए उनके परिजनों को सूचित किया।

पुलिस के मुताबिक, कुछ परिजनों को तो यह जानकारी भी नहीं थी कि उनके बच्चे केरलम गए हुए हैं। रिश्तेदारों ने पुलिस को बताया कि संतोष ने हाल में एक नयी कार खरीदी थी और सभी ने कोच्चि जाने की योजना बनाई थी। हालांकि, नयी कार का पंजीकरण पूरा न होने के कारण उन्होंने इस यात्रा के लिए एक गाड़ी किराए पर ली थी।

त्रिशूर मेडिकल कॉलेज में शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया, जहां परिजन पहुंच चुके हैं। अस्पताल प्रशासन ने शवों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की। त्रिशूर के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मोहम्मद नदीमुद्दीन ने बताया कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि हादसा लॉरी चालक की गलती के कारण हुआ।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “निश्चित रूप से यह लॉरी चालक की गलती के कारण हुआ। इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और ठेकेदार की भूमिका की भी जांच की जाएगी तथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
नदीमुद्दीन ने बताया कि लॉरी चालक फरार है, लेकिन वाहन मालिक की पहचान कर ली गई है और आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हालांकि क्षेत्र में राजमार्ग पुलिस की गश्ती इकाई तैनात थी, लेकिन लॉरी चालक अक्सर अपने वाहनों को खड़ा करके वहां से चले जाते हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा, “निश्चित रूप से यहां वाहनों को खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। हम यह भी जांच करेंगे कि क्या राजमार्ग प्राधिकरणों और ठेकेदारों ने उचित साइनबोर्ड लगाए थे या नहीं।

हालांकि प्राथमिक आकलन के अनुसार, यह लॉरी चालक की ही गलती थी।”
केरलम के खेल मंत्री जनीश ने आरोप लगाया कि एनएच-66 पर जारी निर्माण कार्य के संबंध में जब भी जनप्रतिनिधि बैठकें बुलाते हैं या चिंता व्यक्त करते हैं, तो एनएचएआई का रवैया असहयोगात्मक रहता है। उन्होंने कहा, ‘‘घटना के दृश्य देखकर ऐसा लगता है कि कार खड़ी गाड़ी के पिछले हिस्से से टकराई। राजमार्ग पर जहां वाहन खड़ा था, वह पार्किंग के लिए कोई निर्धारित क्षेत्र नहीं था।

यह एक बड़ी समस्या है।’’
मंत्री ने राजमार्ग पर अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जिन स्थानों पर निर्माण कार्य किया जा रहा है वहां साइनबोर्ड लगाने और गति-नियंत्रण के उपायों में गंभीर कमियां हैं। जनीश ने कहा, ‘‘मैं और जनप्रतिनिधि इस राजमार्ग मार्ग पर स्थित दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के संबंध में लगातार बैठकें कर रहे हैं और उचित कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।’’
उन्होंने बताया कि वे इस मुद्दे पर बुलाई गई लगभग तीन बैठकों में शामिल हुए थे, जिनमें जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के अलावा उन क्षेत्रों के विधायक भी मौजूद थे जहां से राजमार्ग गुजरता है। मंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर साइनबोर्ड और उचित चेतावनी नहीं हैं, उनकी पहचान करने तथा सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि एनएचएआई अक्सर स्थानीय अधिकारियों के साथ पर्याप्त समन्वय किए बिना या जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई चिंताओं का समाधान किए बिना निर्माण कार्य करता है। जनीश ने कहा, ‘‘प्राधिकरण अक्सर इस तरह से काम करता है जैसे उसे मानव जीवन की कोई परवाह ही न हो।’’
इन आरोपों पर एनएचएआई की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि कोडुंगल्लूर के पुलिस उपाधीक्षक को मामले की जांच सौंपी गई है।

मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाएगी तथा जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ तत्काल व सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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