‘अमित शाह को दिल्ली लाना पीएम मोदी की सबसे बड़ी भूल’- संजय राउत का BJP को लेकर बड़ा दावा

‘अमित शाह को दिल्ली लाना पीएम मोदी की सबसे बड़ी भूल’- संजय राउत का BJP को लेकर बड़ा दावा

Sanjay Raut on PM Modi: शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर बड़ा बयान दिया है। राउत ने दावा किया कि अमित शाह को दिल्ली की राजनीति में लाना पीएम मोदी की सबसे बड़ी भूल थी और शाह के दिल्ली आने के बाद से ही देश की राजनीति में ऐसी गतिविधियां शुरू हुईं, जिनसे भाजपा (BJP) और लोकतंत्र का ‘पतन’ शुरू हुआ।

कोल्हापुर में आयोजित ‘दिनमान साहित्य उत्सव पर्व-2’ में वरिष्ठ पत्रकारों से बात करते हुए आज संजय राउत ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा।

‘अमित शाह के दिल्ली आने से पहले सब ठीक था’

संजय राउत ने कहा कि जब 2014 में नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे, तब शुरुआती पांच सालों तक अमित शाह दिल्ली की सक्रिय राजनीति में नहीं थे। उस समय देश में सब कुछ ठीक चल रहा था। केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग नहीं हो रहा था और न ही राजनीतिक दलों को तोड़ने का खेल चल रहा था। राउत ने कहा कि अमित शाह के दिल्ली की राजनीति में आने के बाद ये सभी गतिविधियां शुरू हुईं।

राउत ने कहा, अमित शाह के दिल्ली की राजनीति में आते ही यह सब शुरू हो गया। इसके बाद अगले पांच वर्षों में देश, लोकतंत्र और भाजपा के अधोगति की शुरुआत हुई। इसी कारण शिवसेना और बीजेपी का दशकों पुराना गठबंधन भी टूट गया। अमित शाह को दिल्ली लाना पीएम मोदी के जीवन की सबसे बड़ी गलती थी।

‘मैंने मोदी को सज्जन नहीं कहा’

इस इंटरव्यू के दौरान वरिष्ठ पत्रकार विजय चोरमारे और अमेय तिरोडकर ने राउत से पूछा कि वह अक्सर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना करते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उतनी तीखी टिप्पणी नहीं करते। क्या इसका मतलब यह है कि उनकी नजर में अमित शाह खराब हैं और मोदी सज्जन हैं?

इस पर राउत ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को कभी सज्जन नहीं कहा। उन्होंने कहा कि राजनीति में मोदी भी सज्जन नहीं हैं। राउत ने दावा किया कि अमित शाह के दिल्ली की राजनीति में आने से पहले नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में राजनीतिक व्यवस्था स्थिर थी, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं।

न्यायपालिका और चुनाव आयोग को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप

संजय राउत ने केंद्र सरकार पर न्यायपालिका और चुनाव आयोग को नियंत्रित करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि आज बिना किसी नैतिकता के अदालतों और चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्थाओं को नियंत्रित करने और उन्हें ‘गुलाम’ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

राउत ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों में तोड़फोड़ और दल-बदल को सम्मानजनक माना जाने लगा है। इसके लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जांच का भय दिखाया जा रहा है। मोदी सरकार के शुरुआती पांच सालों में यह सब नहीं हो रहा था। यह सब अमित शाह के दिल्ली आने के बाद से शुरू हुआ।

‘मोदी के लिए अमित शाह काम के आदमी थे’

राउत ने अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के राजनीतिक रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की नजर में अमित शाह ‘काम के आदमी’ थे। इसी वजह से शाह को गुजरात से दिल्ली की राजनीति में लाया गया और इसके बाद राजनीतिक तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिला।

संजय राउत के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भाजपा और शिवसेना (UBT) के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। खासकर भाजपा के कद्दावर नेता अमित शाह को लेकर राउत की टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।

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