मर्चेंट री-केवाईसी की डेडलाइन बढ़ाने की मांग:पेमेंट एग्रीगेटर्स ने RBI को पत्र लिखा, 30% से ज्यादा छोटे ऑफलाइन व्यापारियों पर असर की आशंका

मर्चेंट री-केवाईसी की डेडलाइन बढ़ाने की मांग:पेमेंट एग्रीगेटर्स ने RBI को पत्र लिखा, 30% से ज्यादा छोटे ऑफलाइन व्यापारियों पर असर की आशंका

पेमेंट एग्रीगेटर्स (PAs) ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से मर्चेंट्स के रीयू-केवाईसी (Re-KYC) को पूरा करने की 15 सितंबर की समयसीमा को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों क्षेत्रों में हजारों व्यापारियों का केवाईसी काम अटका पड़ा है। समयसीमा न बढ़ने पर देश में डिजिटल भुगतान सेवाएं प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। लाखों छोटे कारोबारियों पर बंद होने का खतरा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपीआई भुगतान के लिए क्यूआर (QR) कोड इस्तेमाल करने वाले करीब 30 से 35 प्रतिशत छोटे और अनौपचारिक ऑफलाइन व्यापारी तय समय में प्रक्रिया पूरी करने में असमर्थ रह सकते हैं। इसके अलावा, लगभग 10 लाख (1 मिलियन) छोटी ऑनलाइन व्यावसायिक इकाइयों के भी सत्यापन समयसीमा से चूकने की आशंका है। पेटीएम, फोनपे और गूगल पे के सामने बड़ी चुनौती पेटीएम, फोनपे और गूगल पे जैसी ऑफलाइन मर्चेंट एक्वायरिंग कंपनियों के पास छोटे शहरों और गांवों में लाखों छोटे मर्चेंट्स हैं, जो इनके क्यूआर स्टैंडीज और साउंडबॉक्स का इस्तेमाल करते हैं। सख्त केवाईसी मानकों और भौतिक (फिजिकल) सत्यापन में इन कंपनियों को काफी दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि कई छोटे व्यापारियों के पास पूरे कागजात मौजूद नहीं हैं। नियमों के कड़े होने से बढ़ीं व्यावहारिक मुश्किलें एक पेमेंट एग्रीगेटर के संस्थापक और सीईओ ने बताया, “आरबीआई ने हमेशा क्रियान्वयन की व्यावहारिक चुनौतियों को समझा है और जहां भी रुकावट का जोखिम दिखता है, वहां उद्योग के साथ सक्रिय रूप से चर्चा की है।” पेमेंट एग्रीगेटर्स का मानना है कि छोटे मर्चेंट्स वित्तीय समावेशन के लक्ष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, इसलिए नियामक द्वारा राहत दिए जाने की पूरी संभावना है। कर्मचारियों की कमी और इन-पर्सन वेरिफिकेशन की शर्त केवाईसी की यह समस्या आरबीआई द्वारा सितंबर 2025 में जारी किए गए मास्टर डायरेक्शंस के बाद सामने आई है। नए नियमों के तहत पेमेंट एग्रीगेटर्स को तीन श्रेणियों—PA-ऑनलाइन, PA-फिजिकल और PA-क्रॉस बॉर्डर में बांटा गया था। आरबीआई के नियमों के अनुसार, इन-पर्सन केवाईसी केवल पेमेंट एग्रीगेटर के अपने कर्मचारियों द्वारा ही किया जा सकता है, किसी थर्ड-पार्टी एजेंसी से नहीं। इसके चलते कंपनियों को अतिरिक्त कर्मचारी तैनात करने पड़ रहे हैं और उनके पास क्षमता की कमी (कैपेसिटी कंस्ट्रेंट) पैदा हो गई है। डिजिटल भुगतान पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर हालांकि यह मर्चेंट्स संख्या में काफी ज्यादा हैं, लेकिन कुल भुगतान वैल्यू और वॉल्यूम में इनका योगदान बहुत कम है। इस वजह से ओवरऑल पेमेंट इकोसिस्टम पर कोई बड़ा वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा। ज्यादातर पेमेंट एग्रीगेटर्स अंतिम तिथि तक करीब 80 प्रतिशत री-केवाईसी पूरा कर लेने की स्थिति में हैं। क्या होता है केवाईसी (KYC)? केवाईसी यानी ‘नो योर कस्टमर’ (Know Your Customer) एक सत्यापन प्रक्रिया है। इसके जरिए बैंक और वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों या व्यापारियों की पहचान और पते की पुष्टि करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकना होता है।

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