जौहर विवाद के बीच कुमार विश्वास ने सुनाया मेवाड़ का इतिहास, रानी पद्मिनी से लेकर गोरा-बादल की वीरता तक का किया जिक्र

जौहर विवाद के बीच कुमार विश्वास ने सुनाया मेवाड़ का इतिहास, रानी पद्मिनी से लेकर गोरा-बादल की वीरता तक का किया जिक्र

Kumar Vishwas on Rani Padmini Amid Jauhar Controversy: राजस्थान के इतिहास, रानी पद्मिनी और जौहर को लेकर छिड़ी बहस के बीच कवि कुमार विश्वास का एक बयान चर्चा में है। उन्होंने मेवाड़ के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि किसी फिल्म, कविता या कहानी से राजस्थान के गौरवशाली अतीत की वास्तविकता नहीं बदल सकती। कुमार विश्वास ने अपने वक्तव्य में रानी पद्मिनी, रावल रतन सिंह और मेवाड़ के वीर योद्धाओं गोरा-बादल से जुड़ा एक प्रसिद्ध प्रसंग सुनाया और आने वाली पीढ़ियों तक इतिहास पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया।

पद्मिनी और मेवाड़ की कहानी का किया जिक्र

कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए मेवाड़ के उस प्रसंग को केंद्र में रखा, जिसमें रावल रतन सिंह को खिलजी द्वारा बंदी बनाए जाने और उन्हें छुड़ाने के लिए मेवाड़ी योद्धाओं की रणनीति का वर्णन मिलता है। उन्होंने बताया कि इस कथा में युद्ध के साथ-साथ बुद्धिमत्ता, स्वाभिमान और स्वामीभक्ति को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

उन्होंने पंडित नरेंद्र मिश्र की वीर रस की रचनाओं का उल्लेख करते हुए गोरा और बादल को मेवाड़ की वीर परंपरा के प्रतीक के तौर पर पेश किया। उनके मुताबिक, यह कहानी केवल एक राजा को बचाने की नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मसम्मान की रक्षा की कथा के रूप में देखी जानी चाहिए।

गोरा-बादल की वीरता को बताया मिसाल

कुमार विश्वास के अनुसार, जब रावल रतन सिंह को छुड़ाने की चुनौती सामने आई तो सेनापति गोरा और उनके भतीजे बादल ने एक साहसिक योजना तैयार की। लोकप्रचलित कथा के मुताबिक, बड़ी संख्या में पालकियों के जरिए मेवाड़ी सैनिकों को खिलजी के शिविर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी।

कथा में बताया जाता है कि पालकियों में महिलाओं के बजाय सैनिक छिपकर गए थे। उनका उद्देश्य रतन सिंह तक पहुंचना और उन्हें कैद से बाहर निकालना था। योजना के तहत राणा को मुक्त कराया गया, लेकिन इसके बाद मेवाड़ी सैनिकों और खिलजी की सेना के बीच भीषण संघर्ष हुआ।

गोरा ने युद्ध में दिया बलिदान

इस प्रसंग का सबसे भावुक हिस्सा सेनापति गोरा से जुड़ा बताया जाता है। कथा के अनुसार, राणा को सुरक्षित चित्तौड़ की ओर रवाना करने के बाद गोरा ने शाही सेना का सामना किया। संख्या में कम होने के बावजूद मेवाड़ी योद्धाओं ने जबरदस्त प्रतिरोध किया।

युद्ध के दौरान गोरा के घायल होने और अंततः वीरगति प्राप्त करने का वर्णन मिलता है। इसके बाद बादल ने भी युद्ध जारी रखा। इस तरह दोनों योद्धाओं की वीरता और बलिदान को मेवाड़ की लोककथाओं में विशेष स्थान मिला।

इतिहास को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील

कुमार विश्वास ने कहा कि इतिहास को लेकर विवाद करने से ज्यादा जरूरी है कि नई पीढ़ी अपने देश और उसकी ऐतिहासिक विरासत के बारे में जाने। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि वह अपने परिवार के साथ राजस्थान के ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करते हैं और बच्चों को वहां से जुड़ी घटनाओं के बारे में बताते हैं।

उन्होंने हल्दीघाटी, गोगुंदा, चावंड और कुंभलगढ़ जैसे स्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐतिहासिक स्थलों को केवल पर्यटन स्थल की तरह नहीं, बल्कि विरासत और स्मृति के केंद्र के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

जौहर और पद्मिनी का प्रसंग फिर चर्चा में

रानी पद्मिनी और जौहर का इतिहास लंबे समय से साहित्य, लोककथाओं, इतिहास लेखन और सिनेमा में चर्चा का विषय रहा है। इस पूरे प्रसंग को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक मत भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में कुमार विश्वास का बयान एक बार फिर मेवाड़ की वीरता, रानी पद्मिनी और गोरा-बादल की कथा को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ले आया है।

उनका जोर इस बात पर रहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को समझने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी समाज की भी है। उनके मुताबिक मेवाड़ की गाथाओं में युद्ध के साथ त्याग, सम्मान, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण जैसे भाव भी जुड़े हैं। यही वजह है कि राजस्थान के इतिहास से जुड़े ये प्रसंग आज भी लोगों के बीच गहरी भावनात्मक छाप छोड़ते हैं।

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