Iran US War Trump Sanctions: ईरान के खिलाफ अमेरिका की सख्त आर्थिक कार्रवाई के बावजूद वहां की सत्ता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। अमेरिकी प्रशासन को उम्मीद थी कि आर्थिक दबाव बढ़ने से ईरान के आम लोगों में सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ेगा। इससे सत्ता विरोधी प्रदर्शन तेज हो सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी खुफिया आकलन में फिलहाल ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि ईरानी लोग बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर अपने नेताओं को सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका ने ईरान की आर्थिक स्थिति को कमजोर करने के लिए उस पर लगातार दबाव बढ़ाया है। इसका असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है। देश में महंगाई तेजी से बढ़ी है। खाने-पीने की चीजों के दाम हर हफ्ते बढ़ रहे हैं। ईरान की मुद्रा रियाल की कीमत भी काफी गिर गई है। देश के शीर्ष अधिकारी खुद आर्थिक संकट की बात स्वीकार कर चुके हैं।
आम लोगों पर पड़ रहा सबसे ज्यादा असर
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पिछले हफ्ते अमेरिकी वित्त मंत्रालय की नई पाबंदियों की घोषणा से पहले आर्थिक संकट को लेकर चिंता जताई थी। सरकारी मीडिया के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि देश में इन समस्याओं के लिए सरकार को खेद है। उन्होंने कहा कि ईरान इस समय आर्थिक, सैन्य और सुरक्षा मोर्चे पर बड़े युद्ध का सामना कर रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों को पता है कि नई पाबंदियों का सबसे ज्यादा असर आम ईरानियों पर पड़ेगा। इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। मकसद ईरान की आर्थिक स्थिति को और खराब करना है। अमेरिका को उम्मीद है कि इससे सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ सकता है।
सत्ता बदलने के नहीं मिले संकेत
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल ऐसी कोई मजबूत खुफिया जानकारी नहीं है जिससे यह लगे कि ईरान में नए सिरे से बड़े विरोध प्रदर्शन होने वाले हैं। अमेरिकी खुफिया आकलन में युद्ध शुरू होने से पहले भी कहा गया था कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई से ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना कम है।
युद्ध शुरू होने के कई महीने बाद भी अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि ईरानी शासन ने सत्ता पर अपनी पकड़ नहीं खोई है। यानी आर्थिक और सैन्य दबाव के बावजूद ईरान की मौजूदा सरकार अभी भी नियंत्रण में है।
दशकों की पाबंदियों का भी नहीं पड़ा निर्णायक असर
ईरान पर पश्चिमी देशों की पाबंदियां कई दशकों से जारी हैं। अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से उम्मीद करता रहा है कि इन पाबंदियों से ईरान की सरकार कमजोर होगी। लेकिन ऐसा निर्णायक रूप से नहीं हुआ।
ईरान में सरकार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को भी सख्ती से दबाया गया है। इस साल की शुरुआत में ईरानी सरकार ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी। इसे इस्लामिक गणराज्य के इतिहास की सबसे कड़ी कार्रवाइयों में से एक बताया गया।
ईरान समझ रहा है ट्रंप की रणनीति
अंतरराष्ट्रीय संकट समूह के ईरान मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक हमीदरेजा अजीजी के मुताबिक, ईरान का नेतृत्व अमेरिका की रणनीति को अच्छी तरह समझता है। उनके अनुसार, ईरान आर्थिक दबाव को अकेली कार्रवाई के तौर पर नहीं देखता। उसे लगता है कि अमेरिका की व्यापक रणनीति में आगे चलकर देश के भीतर असंतोष पैदा करना भी शामिल हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस हफ्ते पूछा गया कि क्या अमेरिका गुप्त रूप से ईरान के उन लोगों को हथियार दे सकता है जो सरकार को सत्ता से हटाना चाहते हैं। ट्रंप ने सीधे जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में बताना चाहेंगे, लेकिन ऐसा करना उचित नहीं होगा।
हालांकि ट्रंप ने यह भी माना कि उन्हें पता है कि ईरान के लोग अभी सड़कों पर बड़े पैमाने पर क्यों नहीं उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह उनकी मुश्किल समझते हैं और ईरानी लोगों पर अभी गोलियां चलाई जा रही हैं। ऐसे में ईरान पर बढ़ते आर्थिक दबाव के बावजूद सत्ता परिवर्तन के संकेत नहीं मिलना ट्रंप प्रशासन की रणनीति के सामने एक बड़ी चुनौती है।

