उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन अब पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह और भी मजबूत हो गए हैं। दक्षिण कोरिया के खुफिया विभाग से जुड़े इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी की ताजा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि फरवरी में वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की नौवीं बैठक में पार्टी के नियमों में जो बदलाव किए गए, वे किम की पकड़ को और कसा हुआ बनाते हैं।
किम को मिले नए अधिकार
पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के रूप में किम अब खुद पोलितब्यूरो और उसकी स्टैंडिंग कमेटी की बैठक बुला सकते हैं और उनकी अध्यक्षता भी कर सकते हैं। महत्वपूर्ण अफसरों को नियुक्त करने या हटाने का अधिकार भी सीधे उनके पास आ गया है।
पार्टी में सदस्य जोड़ने या निकालने और यहां तक कि किसी विभाग या संगठन को भंग करने का फैसला भी वे अकेले ले सकते हैं। पहले ये काम सामूहिक फैसले से होते थे, अब किम बिना ज्यादा परेशानी के सीधा नियंत्रण रख सकते हैं।
दादा-पिता का जिक्र हटाया
नए नियमों में किम के दादा किम इल सुंग और पिता किम जोंग इल की उपलब्धियों का जिक्र भी हटा दिया गया है। अब पूरा जोर किम जोंग उन के केंद्र में होने पर है। रिपोर्ट में इसे ‘किम जोंग उन युग 2.0’ बताया गया है, जहां सत्ता पूरी तरह एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है।
युद्ध के समय के लिए खास प्रावधान
पार्टी की केंद्रीय कमेटी की बैठक अब हर छह महीने में कम से कम एक बार जरूर होनी चाहिए। युद्ध जैसी स्थिति में पोलितब्यूरो को केंद्रीय कमेटी की अनुमति से बड़े फैसले लेने की छूट दे दी गई है। इससे पूरा कमेटी बुलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और फैसले जल्दी हो सकेंगे। सरकार और सेना पर पार्टी की नजर भी और सख्त कर दी गई है।
दक्षिण कोरिया से दूरी और सदस्यों के लिए नए नियम
उत्तर कोरिया ने साल 2024 में ही दक्षिण कोरिया के साथ एकीकरण की पुरानी नीति छोड़ दी थी और दोनों को दुश्मन देशों के रूप में देखने का रुख अपनाया था। नए नियमों में भी यही बात बरकरार रखी गई है।
पार्टी की सदस्यता की न्यूनतम उम्र 18 से बढ़ाकर 20 साल कर दी गई है। साथ ही सदस्यों पर अनुशासन तोड़ने पर सजा के प्रावधान भी बढ़ाए गए हैं।
दक्षिण कोरियाई संस्थान का कहना है कि ये बदलाव पार्टी के कामकाज को नियमित बनाने के साथ-साथ किम के इर्द-गिर्द सत्ता को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

