देवीघाट (नेपाल), एक सितंबर नेपाल के रसुवा जिले में हिंदू तीर्थस्थल गोसाइंकुंड जा रहे बस यात्री बद्री प्रसाद देवकोटा ने बताया कि कैसे उन्होंने तेजी से आती कीचड़ भरी बाढ़ को देखकर चलती बस से छलांग लगा दी। बस में उनकी पत्नी और 34 अन्य तीर्थयात्री भी सवार थे। देवकोटा ने ‘द काठमांडू पोस्ट’ से कहा, ‘‘मेरी पत्नी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा, ‘कूदिए मत।’ मैंने उससे कहा, ‘हम यहीं मर जाएंगे।’’’
इसके बाद उन्होंने पत्नी की पकड़ से खुद को छुड़ाया और नुवाकोट के भैंसे में भोटेकोशी नदी की बाढ़ का पानी सड़क पर आने के दौरान चलती बस से छलांग लगा दी।
बाढ़ की लहर उन्हें सड़क किनारे बनी नाली में बहा ले गई, लेकिन उन्होंने पहाड़ी की ढलान पर उगी वनस्पतियों को पकड़ लिया। वहां से उन्होंने बस को बाढ़ के पानी में समाते देखा। समाचार पत्र ने सोमवार को बताया कि समूह के दो लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि 28 लोग अब भी लापता हैं।
लापता लोगों में देवकोटा की पत्नी भी शामिल हैं। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद बचे लोगों के सामने अपनी जिंदगी फिर से खड़ी करने की चुनौती है, जबकि हजारों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के लापता होने के बीच आपदा से बच निकले लोगों की आपबीती इस त्रासदी की आकस्मिकता और भयावहता की झलक देती है।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद देवकोटा और उनके चचेरे भाई तुलाराम, जो बस से छलांग लगाकर बचने वाले छह यात्रियों में शामिल थे, करीब 20 मीटर ऊपर पहाड़ी पर चढ़े और करीब दो घंटे तक घास के एक हिस्से पर बैठे रहे। उन्होंने लोगों को घरों की छतों पर फंसे और कुछ अन्य लोगों को कीचड़ में दबे देखा। इसके बाद वे हिलेखर्का गांव पहुंचे, जहां स्थानीय लोगों ने उन्हें चाय और बिस्कुट दिए तथा प्राथमिक उपचार में मदद की।
दोनों अगले दिन अपने परिवारों की तलाश में भैंसे इलाके में लौटे, लेकिन उन्हें किसी का कोई पता नहीं चला। इसके बाद वे अपने गृह जिले गोरखा लौट गए। बेत्रावती में संतमान लामा एक चेतावनी पर अमल करने के कारण बच गए, लेकिन उन्होंने अपनी लगभग पूरी संपत्ति खो दी।
लामा ने रविवार को ‘ऑनलाइनखबर’ को बताया कि 26 अगस्त की सुबह वह अपने बेटे और बेटी को स्कूल छोड़कर घर लौट रहे थे, तभी पास की हार्डवेयर दुकान के मालिक ने उन्हें बाढ़ आने की चेतावनी दी और ऊंचाई वाले स्थान पर जाने को कहा। बेत्रावती में बाढ़ की चेतावनियां असामान्य नहीं थीं और लामा ने शुरुआत में इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि, उन्होंने अपनी पत्नी को इसकी जानकारी दी और परिवार ऊंचे स्थान पर चला गया।
इसके कुछ ही देर बाद बाढ़ की पहली लहर आई। लामा ने बताया कि नदी उनकी पत्नी को बहा ले गई। उन्होंने किसी तरह उसे पकड़कर ऊंचाई की ओर धकेला और खुद भी झाड़ियों को पकड़कर बचने में कामयाब रहे।
वहां से उन्होंने अपनी आंखों के सामने बाढ़ को अपना घर बहाते देखा। ‘ऑनलाइनखबर’ के अनुसार, लामा ने दो पड़ोसियों ईश्वरलाल श्रेष्ठ और बुद्धिलाल डंगोल को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में मदद की, लेकिन बाद में उनका संपर्क उनसे टूट गया। लामा ने अपने बच्चों के स्कूल से संपर्क किया और उन्हें पता चला कि दोनों सुरक्षित हैं।
लेकिन उनका घर, दुकान और उनकी लगभग पूरी संपत्ति बाढ़ में बह गई। लामा ने कहा ‘‘मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है और रहने के लिए कोई जगह भी नहीं है। मेरे पास जो कुछ था, वह सब चला गया।

