सुप्रीम कोर्ट ने देहरादून के जिम मालिक ‘मोहम्मद’ दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। यह मामला बजरंग दल मुस्लिम के सदस्यों और एक दुकानदार के बीच कथित विवाद से जुड़ा है। कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश के अमल पर भी रोक लगा दी, जिसमें दीपक को घटना से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट या विडियो डालने से प्रतिबंधित किया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दीपक की याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा। दीपक ने हाई कोर्ट के एफआईआर रद्द करने से इनकार के फैसले को चुनौती दी है। दीपक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल एक दुकानदार की मदद करने के लिए वहां गए थे। उन्होंने दावा किया कि बजरंग दल के सदस्यों ने दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। भीड़ ने दीपक से नाम पूछा तो उन्होंने ‘मोहम्मद दीपक’ बताया। सिंघवी ने कहा कि दीपक ने भी शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
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अदालत में क्या हुआ?
पीठ: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई की।
‘नेक मददगार’ की दलील: दीपक कुमार की पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि उनका मुवक्किल केवल एक दुकानदार की सहायता के लिए आगे आया था। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ‘नेक मददगार’ के खिलाफ इस तरह की आपराधिक शिकायत कैसे दर्ज की जा सकती है।
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पक्षपात का आरोप: सिंघवी ने अदालत को अवगत कराया कि दीपक ने घटना से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जबकि उल्टे उनके खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। इसके साथ ही उन्होंने FIR के कानूनी आधार और वीडियो साक्ष्यों की सत्यता पर भी सवाल खड़े किए।
अदालत का आदेश: दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया, जिसका जवाब चार सप्ताह में मांगा गया है। तब तक के लिए विवादित FIR पर आगे की सभी कार्यवाहियों और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी।

