12 साल की उम्र में आठ पुस्तकें लिख कर आदर्श ने रचा दिया नया इतिहास

12 साल की उम्र में आठ पुस्तकें लिख कर आदर्श ने रचा दिया नया इतिहास

दृढ़ इच्छाशक्ति और रचनात्मक प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। इसे झंझारपुर के 12 वर्षीय बाल साहित्यकार आदर्श भारद्वाज ने साबित किया है। वर्ष 2026 में कम उम्र में ही आदर्श की आठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाओं में बालमन, कल्पना, रहस्य, रोमांच, संवेदना और संस्कृति जैसे विविध विषयों की झलक मिलती है। उनकी प्रमुख कृतियों में भय और रहस्य, दि हिडेन वर्ल्ड, इंटरनल लव और डिभिन सगा शामिल हैं। आदर्श के पिता डॉ. सुरविंद कुमार झा और माता डॉ. सुधा झा हैं। परिवार के प्रोत्साहन से उनकी रचनात्मक प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिला। आदर्श ने जून 2025 में परिवार के साथ भूटान की यात्रा भी की। झंझारपुर से सिलिगुड़ी होते हुए भूटान तक की यात्रा, पारो, थिम्फू, टाइगर नेस्ट और चेलेला पास के अनुभवों को उन्होंने साहित्यिक रूप देने का प्रयास किया है। दृढ़ इच्छाशक्ति और रचनात्मक प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। इसे झंझारपुर के 12 वर्षीय बाल साहित्यकार आदर्श भारद्वाज ने साबित किया है। वर्ष 2026 में कम उम्र में ही आदर्श की आठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाओं में बालमन, कल्पना, रहस्य, रोमांच, संवेदना और संस्कृति जैसे विविध विषयों की झलक मिलती है। उनकी प्रमुख कृतियों में भय और रहस्य, दि हिडेन वर्ल्ड, इंटरनल लव और डिभिन सगा शामिल हैं। आदर्श के पिता डॉ. सुरविंद कुमार झा और माता डॉ. सुधा झा हैं। परिवार के प्रोत्साहन से उनकी रचनात्मक प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिला। आदर्श ने जून 2025 में परिवार के साथ भूटान की यात्रा भी की। झंझारपुर से सिलिगुड़ी होते हुए भूटान तक की यात्रा, पारो, थिम्फू, टाइगर नेस्ट और चेलेला पास के अनुभवों को उन्होंने साहित्यिक रूप देने का प्रयास किया है।  

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