सुपौल जिले किशनपुर अंचल क्षेत्र की मौजहा पंचायत के बेला गांव में कोसी नदी का कटाव अब ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। नदी के तेज बहाव की जद में आकर कई घर जमीनदोज हो चुके हैं, जबकि गांव को जोड़ने वाली पक्की सड़क का बड़ा हिस्सा भी नदी में समा गया है। मौके पर हालात ऐसे हैं कि पक्की सड़क का एक हिस्सा पुल की तरह हवा में लटका दिखाई दे रहा है। सड़क के नीचे की मिट्टी तेज बहाव में पूरी तरह बह चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में कटाव तेजी से बढ़ा है। बेला और आसपास के सुजानपुर इलाके में 25 से ज्यादा घर कटकर नदी में समा चुके हैं। कई परिवार अपना घर और सामान छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 500 मीटर लंबी सड़क भी कटाव की भेंट चढ़ चुकी है। सड़क के टूट जाने से गांव के लोगों के आवागमन में भी परेशानी बढ़ गई है। ‘20-25 घर कट गए, कोई देखने वाला नहीं’
बेला गांव निवासी महेश यादव ने बताया कि कटाव की स्थिति बेहद गंभीर है। उनके अनुसार, “यहां 20-25 घर कट चुके हैं। दो-चार दिन से कटाव और तेज हो गया है। हम लोगों को काफी क्षति हुई है, लेकिन कहीं से कोई देखभाल नहीं हो रही है।” ग्रामीणों का कहना है कि कटाव निरोधी काम शुरू तो किया गया है, लेकिन काम लगातार नहीं चल रहा। कभी मजदूर और अधिकारी दिखाई देते हैं तो कभी काम बंद रहता है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। ‘बांस के सहारे कोसी को रोकना मुश्किल’
सुजानपुर निवासी रामचंद्र साह ने बताया कि इस बार उनका घर भी कोसी में बह गया। उन्होंने कहा कि घर कटने के बाद कुछ सरकारी पदाधिकारी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन कटाव रोकने के लिए बांस का सहारा लिया जा रहा है। उनका सवाल है कि कच्चे बांस के सहारे इतनी तेज धारा को कब तक रोका जा सकेगा? रामचंद्र साह ने कहा कि कटाव को रोकने के लिए मजबूत और स्थायी व्यवस्था की जरूरत है। अगर समय रहते प्रभावी काम नहीं हुआ तो नदी का कटाव आसपास के बड़े इलाके को प्रभावित कर सकता है। 20 साल से रह रहे, अब घर और सड़क दोनों खतरे में
रघुबीर झा ने बताया कि वे करीब 20 वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं। उनके अनुसार, कुछ समय पहले तक यहां पक्की सड़क थी। वह सड़क गांव से करीब 500 मीटर पश्चिम तक जाती थी, लेकिन अब पूरा हिस्सा नदी में बह चुका है। उन्होंने बताया कि आसपास के इलाके में इस बार करीब 25 से ज्यादा घर कट चुके हैं और अभी भी कटाव जारी है। कच्चे बांस और खुले सैंडबैग से कटाव रोकने की कोशिश
मौके पर जल संसाधन विभाग की ओर से कटाव निरोधी कार्य कराया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इसका असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा है। मौके पर फाइलिंग के नाम पर कच्चे बांस का सहारा लिया गया है। तेज बहाव वाले हिस्से में सैंडबैग भी डाले गए हैं, लेकिन कई सैंडबैग खुले और खाली नजर आए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह की व्यवस्था से कोसी के तेज बहाव को रोका जा सकेगा। जमीन लगातार नदी में कटकर समा रही है। ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि केवल खानापूर्ति के बजाय मजबूत तकनीकी उपायों के साथ कटाव निरोधी काम कराया जाए, ताकि बचे हुए घरों और आबादी को बचाया जा सके। जिला प्रशासन की ओर से कटाव और बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम सावन कुमार ने भी संबंधित अधिकारियों और अंचलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिले के कई इलाकों में प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और बचाव कार्य चल रहे हैं। लेकिन बेला में ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कटाव वाले हिस्से में मजबूत और लगातार काम नहीं होगा, तब तक घर और जमीन बचाना मुश्किल है। सुपौल जिले किशनपुर अंचल क्षेत्र की मौजहा पंचायत के बेला गांव में कोसी नदी का कटाव अब ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। नदी के तेज बहाव की जद में आकर कई घर जमीनदोज हो चुके हैं, जबकि गांव को जोड़ने वाली पक्की सड़क का बड़ा हिस्सा भी नदी में समा गया है। मौके पर हालात ऐसे हैं कि पक्की सड़क का एक हिस्सा पुल की तरह हवा में लटका दिखाई दे रहा है। सड़क के नीचे की मिट्टी तेज बहाव में पूरी तरह बह चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में कटाव तेजी से बढ़ा है। बेला और आसपास के सुजानपुर इलाके में 25 से ज्यादा घर कटकर नदी में समा चुके हैं। कई परिवार अपना घर और सामान छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 500 मीटर लंबी सड़क भी कटाव की भेंट चढ़ चुकी है। सड़क के टूट जाने से गांव के लोगों के आवागमन में भी परेशानी बढ़ गई है। ‘20-25 घर कट गए, कोई देखने वाला नहीं’
बेला गांव निवासी महेश यादव ने बताया कि कटाव की स्थिति बेहद गंभीर है। उनके अनुसार, “यहां 20-25 घर कट चुके हैं। दो-चार दिन से कटाव और तेज हो गया है। हम लोगों को काफी क्षति हुई है, लेकिन कहीं से कोई देखभाल नहीं हो रही है।” ग्रामीणों का कहना है कि कटाव निरोधी काम शुरू तो किया गया है, लेकिन काम लगातार नहीं चल रहा। कभी मजदूर और अधिकारी दिखाई देते हैं तो कभी काम बंद रहता है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। ‘बांस के सहारे कोसी को रोकना मुश्किल’
सुजानपुर निवासी रामचंद्र साह ने बताया कि इस बार उनका घर भी कोसी में बह गया। उन्होंने कहा कि घर कटने के बाद कुछ सरकारी पदाधिकारी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन कटाव रोकने के लिए बांस का सहारा लिया जा रहा है। उनका सवाल है कि कच्चे बांस के सहारे इतनी तेज धारा को कब तक रोका जा सकेगा? रामचंद्र साह ने कहा कि कटाव को रोकने के लिए मजबूत और स्थायी व्यवस्था की जरूरत है। अगर समय रहते प्रभावी काम नहीं हुआ तो नदी का कटाव आसपास के बड़े इलाके को प्रभावित कर सकता है। 20 साल से रह रहे, अब घर और सड़क दोनों खतरे में
रघुबीर झा ने बताया कि वे करीब 20 वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं। उनके अनुसार, कुछ समय पहले तक यहां पक्की सड़क थी। वह सड़क गांव से करीब 500 मीटर पश्चिम तक जाती थी, लेकिन अब पूरा हिस्सा नदी में बह चुका है। उन्होंने बताया कि आसपास के इलाके में इस बार करीब 25 से ज्यादा घर कट चुके हैं और अभी भी कटाव जारी है। कच्चे बांस और खुले सैंडबैग से कटाव रोकने की कोशिश
मौके पर जल संसाधन विभाग की ओर से कटाव निरोधी कार्य कराया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इसका असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा है। मौके पर फाइलिंग के नाम पर कच्चे बांस का सहारा लिया गया है। तेज बहाव वाले हिस्से में सैंडबैग भी डाले गए हैं, लेकिन कई सैंडबैग खुले और खाली नजर आए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह की व्यवस्था से कोसी के तेज बहाव को रोका जा सकेगा। जमीन लगातार नदी में कटकर समा रही है। ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि केवल खानापूर्ति के बजाय मजबूत तकनीकी उपायों के साथ कटाव निरोधी काम कराया जाए, ताकि बचे हुए घरों और आबादी को बचाया जा सके। जिला प्रशासन की ओर से कटाव और बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम सावन कुमार ने भी संबंधित अधिकारियों और अंचलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिले के कई इलाकों में प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और बचाव कार्य चल रहे हैं। लेकिन बेला में ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कटाव वाले हिस्से में मजबूत और लगातार काम नहीं होगा, तब तक घर और जमीन बचाना मुश्किल है।

