पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के कृषि विभाग के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) लागू करने की मांग को लेकर मोतिहारी में एक संयुक्त सम्मेलन आयोजित किया। सोमवार को हुए इस सम्मेलन में दोनों जिलों से बड़ी संख्या में कृषि विभाग के कर्मचारी, कृषि सलाहकार, समन्वयक और अन्य कर्मी शामिल हुए। इस कार्यक्रम को बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी संघ का भी समर्थन प्राप्त था, जिसमें प्रदेश स्तर के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने का आग्रह सम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग की। कर्मचारियों ने तर्क दिया कि नई पेंशन व्यवस्था उनके भविष्य को सुरक्षित नहीं करती, जबकि पुरानी पेंशन बुढ़ापे का मुख्य सहारा है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने का आग्रह किया। संघ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो पूरे बिहार में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करेगा और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को समायोजित करें सम्मेलन में कृषि विभाग में अनुबंध पर कार्यरत कृषि सलाहकार, कृषि समन्वयक और अन्य संविदाकर्मियों के समायोजन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने मांग की कि वर्षों से विभाग में सेवा दे रहे इन अनुबंधित कर्मचारियों को नियमित कर सरकारी सेवा में समायोजित किया जाए। उनका मानना था कि इससे कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा और विभागीय कार्यों में भी स्थिरता आएगी। वक्ताओं ने सरकार से कर्मचारियों की लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने और अनुबंधित कर्मियों के समायोजन सहित अन्य मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई। तो राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। सम्मेलन में मौजूद कर्मचारियों ने भी हाथ उठाकर आंदोलन के समर्थन का संकल्प लिया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के कृषि विभाग के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) लागू करने की मांग को लेकर मोतिहारी में एक संयुक्त सम्मेलन आयोजित किया। सोमवार को हुए इस सम्मेलन में दोनों जिलों से बड़ी संख्या में कृषि विभाग के कर्मचारी, कृषि सलाहकार, समन्वयक और अन्य कर्मी शामिल हुए। इस कार्यक्रम को बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी संघ का भी समर्थन प्राप्त था, जिसमें प्रदेश स्तर के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने का आग्रह सम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग की। कर्मचारियों ने तर्क दिया कि नई पेंशन व्यवस्था उनके भविष्य को सुरक्षित नहीं करती, जबकि पुरानी पेंशन बुढ़ापे का मुख्य सहारा है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने का आग्रह किया। संघ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो पूरे बिहार में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करेगा और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को समायोजित करें सम्मेलन में कृषि विभाग में अनुबंध पर कार्यरत कृषि सलाहकार, कृषि समन्वयक और अन्य संविदाकर्मियों के समायोजन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने मांग की कि वर्षों से विभाग में सेवा दे रहे इन अनुबंधित कर्मचारियों को नियमित कर सरकारी सेवा में समायोजित किया जाए। उनका मानना था कि इससे कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा और विभागीय कार्यों में भी स्थिरता आएगी। वक्ताओं ने सरकार से कर्मचारियों की लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने और अनुबंधित कर्मियों के समायोजन सहित अन्य मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई। तो राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। सम्मेलन में मौजूद कर्मचारियों ने भी हाथ उठाकर आंदोलन के समर्थन का संकल्प लिया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।

