पूर्णिया में सामाजिक संस्था लोकमंच ने अपने संगठन का विस्तार किया है। मीटिंग में संस्था के आधिकारिक ध्वज का लोकार्पण किया गया और राहुल झा को इसका जिला संयोजक नियुक्त किया गया। संगठन विस्तार की इस बैठक में 21 सदस्यीय संचालन टीम की भी घोषणा की गई। इसके साथ ही, जिला स्तरीय विभिन्न जिम्मेदारियों का भी ऐलान किया गया, जिससे संस्था के कार्यों को और गति मिल सके। इस अवसर पर लोकमंच के संस्थापक अध्यक्ष आशीष झा बब्बू ने संगठन के ध्वज के प्रतीकात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए उनके रंग और प्रतीक के उद्देश्य को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस ध्वज में भगवा रंग है, जोा सनातन हिंदू धर्म, स्वाभिमान और ऐतिहासिक सांस्कृतिक रक्षा का प्रतीक है। जबकि नीला रंग बहुजन, वंचित और पिछड़े वर्गों के साथ एकात्मता एवं सहयोग का प्रतिनिधित्व करता है। ऐतिहासिक रूप से महापुरुषों ने सर्वसमाज को साथ लेकर चलने का संदेश दिया, उसी परंपरा के सम्मान में इसे ध्वज में स्थान दिया गया है। ध्वज में बने शंख के प्रतीक का महत्व बताते हुए इसे स्वाभिमान, सामाजिक क्रांति और पूजा-अर्चना के उपरांत शांति स्थापना का द्योतक बताया है। 21 सदस्यीय टीम और पूर्णिया जिला संयोजक की घोषणा लोकमंच के संस्थापक आशीष झा बब्बू ने संगठन के संचालन और विस्तार को लेकर रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस संगठन के संचालन हेतु कुल 21 सदस्यीय टीम गठित की गई है, जिसमें एक संयोजक और चार सह-संयोजक शामिल हैं। संगठनात्मक विस्तार के तहत राहुल झा को लोकमंच का पूर्णिया जिला संयोजक मनोनीत किया गया है। उनके नेतृत्व में जिले में अधिक से अधिक लोगों को मंच से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया। संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए कोसी सीमांचल के कटिहार, अररिया, सुपौल सहित विभिन्न जिलों में विमर्श बैठकें पूरी हो चुकी हैं और जल्द ही अन्य जिलों में भी कमेटियों का गठन किया जाएगा। लोकमंच गैर-राजनीतिक संगठन है: आशीष झा बब्बू आशीष कुमार बब्बू ने स्पष्ट किया कि लोकमंच पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन है। इसका उद्देश्य किसी दल का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर व उपेक्षित वर्गों की समस्याओं को सामने लाना और उनका समाधान निकालना है। चुनाव दर चुनाव समर्थन देने के बावजूद समाज के कई तबकों की आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक स्थिति दयनीय बनी हुई है, जिसके लिए अब संगठित होकर लोकतांत्रिक आवाज उठाना अनिवार्य हो गया है। ब्राह्मण कल्याण बोर्ड से लेकर ईडब्ल्यूएस सुधार तक की मांग संस्थापक आशीष झा ने समाज के उत्थान के लिए सरकार के समक्ष कई मांगों को रखते हुए बताया कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद ब्राह्मणों के कल्याण हेतु ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन हो। समाज की वास्तविक शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया जाए। इतना ही नहीं अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम जयंती पर सरकारी अवकाश घोषित किया जाए। जबकि ईडब्ल्यूएस जैसे आरक्षण नियमों और अवसरों में विसंगतियों को दूर कर उचित लाभ प्रदान करने की मांग की है। साथ ही साथ संस्कृत विद्यालयों एवं शिक्षकों की स्थिति में सुधार के ठोस कदम उठाए जाएं। पटना में होगा बड़ा सम्मेलन लोकमंच द्वारा शासन-प्रशासन एवं नीति-निर्धारण स्तर पर समाज की आनुपातिक भागीदारी सुनिश्चित किए जाने की मांग करते हुए आने वाले समय के संगठन के विजन को साझा किया है। संस्थापक ने बताया कि प्रमंडलीय व जिला स्तर पर जनसंपर्क अभियान पूरा करने के बाद शीघ्र ही राजधानी पटना में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित कर आगामी रणनीतियों की घोषणा की जाएगी। पूर्णिया में सामाजिक संस्था लोकमंच ने अपने संगठन का विस्तार किया है। मीटिंग में संस्था के आधिकारिक ध्वज का लोकार्पण किया गया और राहुल झा को इसका जिला संयोजक नियुक्त किया गया। संगठन विस्तार की इस बैठक में 21 सदस्यीय संचालन टीम की भी घोषणा की गई। इसके साथ ही, जिला स्तरीय विभिन्न जिम्मेदारियों का भी ऐलान किया गया, जिससे संस्था के कार्यों को और गति मिल सके। इस अवसर पर लोकमंच के संस्थापक अध्यक्ष आशीष झा बब्बू ने संगठन के ध्वज के प्रतीकात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए उनके रंग और प्रतीक के उद्देश्य को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस ध्वज में भगवा रंग है, जोा सनातन हिंदू धर्म, स्वाभिमान और ऐतिहासिक सांस्कृतिक रक्षा का प्रतीक है। जबकि नीला रंग बहुजन, वंचित और पिछड़े वर्गों के साथ एकात्मता एवं सहयोग का प्रतिनिधित्व करता है। ऐतिहासिक रूप से महापुरुषों ने सर्वसमाज को साथ लेकर चलने का संदेश दिया, उसी परंपरा के सम्मान में इसे ध्वज में स्थान दिया गया है। ध्वज में बने शंख के प्रतीक का महत्व बताते हुए इसे स्वाभिमान, सामाजिक क्रांति और पूजा-अर्चना के उपरांत शांति स्थापना का द्योतक बताया है। 21 सदस्यीय टीम और पूर्णिया जिला संयोजक की घोषणा लोकमंच के संस्थापक आशीष झा बब्बू ने संगठन के संचालन और विस्तार को लेकर रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस संगठन के संचालन हेतु कुल 21 सदस्यीय टीम गठित की गई है, जिसमें एक संयोजक और चार सह-संयोजक शामिल हैं। संगठनात्मक विस्तार के तहत राहुल झा को लोकमंच का पूर्णिया जिला संयोजक मनोनीत किया गया है। उनके नेतृत्व में जिले में अधिक से अधिक लोगों को मंच से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया। संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए कोसी सीमांचल के कटिहार, अररिया, सुपौल सहित विभिन्न जिलों में विमर्श बैठकें पूरी हो चुकी हैं और जल्द ही अन्य जिलों में भी कमेटियों का गठन किया जाएगा। लोकमंच गैर-राजनीतिक संगठन है: आशीष झा बब्बू आशीष कुमार बब्बू ने स्पष्ट किया कि लोकमंच पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन है। इसका उद्देश्य किसी दल का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर व उपेक्षित वर्गों की समस्याओं को सामने लाना और उनका समाधान निकालना है। चुनाव दर चुनाव समर्थन देने के बावजूद समाज के कई तबकों की आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक स्थिति दयनीय बनी हुई है, जिसके लिए अब संगठित होकर लोकतांत्रिक आवाज उठाना अनिवार्य हो गया है। ब्राह्मण कल्याण बोर्ड से लेकर ईडब्ल्यूएस सुधार तक की मांग संस्थापक आशीष झा ने समाज के उत्थान के लिए सरकार के समक्ष कई मांगों को रखते हुए बताया कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद ब्राह्मणों के कल्याण हेतु ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन हो। समाज की वास्तविक शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया जाए। इतना ही नहीं अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम जयंती पर सरकारी अवकाश घोषित किया जाए। जबकि ईडब्ल्यूएस जैसे आरक्षण नियमों और अवसरों में विसंगतियों को दूर कर उचित लाभ प्रदान करने की मांग की है। साथ ही साथ संस्कृत विद्यालयों एवं शिक्षकों की स्थिति में सुधार के ठोस कदम उठाए जाएं। पटना में होगा बड़ा सम्मेलन लोकमंच द्वारा शासन-प्रशासन एवं नीति-निर्धारण स्तर पर समाज की आनुपातिक भागीदारी सुनिश्चित किए जाने की मांग करते हुए आने वाले समय के संगठन के विजन को साझा किया है। संस्थापक ने बताया कि प्रमंडलीय व जिला स्तर पर जनसंपर्क अभियान पूरा करने के बाद शीघ्र ही राजधानी पटना में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित कर आगामी रणनीतियों की घोषणा की जाएगी।

