Roman Space Telescope Launch: फ्लोरिडा से लॉन्च हुआ रोमन स्पेस टेलीस्कोप, अब खुलेगा ब्रह्मांड का बड़ा राज, जानें क्या है अमेरिकी की तैयारी?

Roman Space Telescope Launch: फ्लोरिडा से लॉन्च हुआ रोमन स्पेस टेलीस्कोप, अब खुलेगा ब्रह्मांड का बड़ा राज, जानें क्या है अमेरिकी की तैयारी?

NASA Launch Roman Space Telescope: फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से रविवार को स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट ने नासा का नया शक्तिशाली टेलीस्कोप सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया है। शुरू में मौसम की चिंता थी, लेकिन आसमान साफ रहा और रॉकेट आसानी से उड़ान भर गया।

यह करीब 4 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट है और इसका नाम ‘नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ रखा गया है। यह टेलीस्कोप अब लैग्रेंज पॉइंट 2 की ओर जा रहा है जो पृथ्वी से करीब 16 लाख किलोमीटर दूर है।

पांच साल तक है मिशन की अवधि

मिशन की अवधि पांच साल बताई गई है लेकिन ईंधन काफी है तो यह दस साल तक भी काम कर सकता है। ब्रह्मांड के दो सबसे बड़े रहस्य सुलझाने का कामरोमन टेलीस्कोप मुख्य रूप से डार्क एनर्जी और डार्क मैटर को समझने के लिए बनाया गया है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्रह्मांड का करीब 68 प्रतिशत हिस्सा डार्क एनर्जी है और 27 प्रतिशत डार्क मैटर। सिर्फ 5 प्रतिशत ही वो साधारण पदार्थ है जो हमें दिखता है जैसे तारे, ग्रह और गैस।

1998 में क्या पता चला था?

1998 में पता चला था कि ब्रह्मांड की विस्तार की गति बढ़ रही है और इसके पीछे डार्क एनर्जी का हाथ माना जाता है। रोमन से वैज्ञानिक अब तक का सबसे बड़ा 3डी नक्शा बनाएंगे जिसमें दो अरब से ज्यादा गैलेक्सी शामिल होंगी। इससे डार्क मैटर के खिंचाव और डार्क एनर्जी के धक्के दोनों को बेहतर समझा जा सकेगा।

हबल और वेब से कितना अलग है यह टेलीस्कोप?

नासा के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह हबल और जेम्स वेब टेलीस्कोप से काफी अलग है। इसमें हबल जैसी तेज नजर है लेकिन खास बात यह है कि ये आसमान को बहुत तेजी से स्कैन कर सकता है।

यह एक महीने में पूरी मिल्की वे गैलेक्सी को कवर कर लेगा जबकि हबल को यही काम करने में करीब सौ साल लग जाते। वेब को जूम लेंस माना जाता है जो बहुत गहराई तक देखता है तो रोमन वाइड एंगल लेंस की तरह काम करेगा जो बड़ा नजारा दिखाएगा।

नए ग्रहों की खोज भी होगी

इसके अलावा रोमन हजारों नए एक्सोप्लैनेट यानी सौर मंडल से बाहर के ग्रहों को खोजेगा। इससे हमें ऐसे ग्रहीय सिस्टम का अंदाजा लगेगा जो हमारे जैसे हों। वैज्ञानिकों का मानना है कि कई बार टेलीस्कोप लॉन्च के बाद वो खोजें होती हैं जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की गई होती।

यह मिशन तय समय से नौ महीने पहले लॉन्च हो गया। पहले कुछ बार फंडिंग की मुश्किलें आईं लेकिन कांग्रेस ने इसे बचा लिया। अब वैज्ञानिक दुनिया रोमन से मिलने वाले आंकड़ों का इंतजार कर रही है।

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