त्योहारी मौसम शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारतीय चीनी प्रसंस्करण इकाइयां करीब 3.5 लाख टन ऐसी चीनी घरेलू बाजार में बेचेंगी, जिसे पहले विदेश भेजने के लिए रखा गया था। अधिकारियों की मंजूरी के बाद इस भंडार को घरेलू खरीदारों के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है। माना जा रहा है कि अगले एक सप्ताह के भीतर इसकी आपूर्ति शुरू हो सकती है।
मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, कारोबार से जुड़ी संवेदनशील जानकारी होने के कारण उन्होंने पहचान जाहिर नहीं की है। उनके अनुसार, घरेलू बाजार में आने वाली 3.5 लाख टन चीनी देश की करीब पांच दिन की कुल मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त होगी। इससे बाजार में तत्काल आपूर्ति बढ़ेगी और हाल में तेजी से बढ़ी कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन इस साल उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। प्रमुख गन्ना उत्पादक इलाकों में बारिश का असमान वितरण और फसलों में बीमारी के कारण पैदावार प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, अगस्त के आखिर से शुरू होने वाला त्योहारी मौसम चीनी की मांग बढ़ाने वाला होता है। इस दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की खपत बढ़ जाती है।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक साथ दो महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। इसके तहत करीब 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी गई है। इसके अलावा निर्यात के लिए निर्धारित कुछ परिष्कृत चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की भी अनुमति दी गई है। सरकार का मकसद बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और उपभोक्ताओं को कीमतों में तेज उछाल से राहत देना है।
राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवारे के मुताबिक, पिछले सप्ताह भारतीय चीनी मिलों से निकलने वाली चीनी की औसत कीमत करीब 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर लगभग 54 से 55 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है। उनका कहना है कि सरकार के समय पर किए गए हस्तक्षेप से कीमतों में आगे भी नरमी आने की उम्मीद है और त्योहारी मौसम में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
बता दें कि भारत में चीनी की खपत आम तौर पर अगस्त के अंत से जनवरी तक सबसे अधिक रहती है। दीपावली, दशहरा, क्रिसमस और नए साल समेत कई त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ने से चीनी की जरूरत भी बढ़ जाती है। ऐसे में उत्पादन में कमी और बढ़ती मांग ने घरेलू बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता पैदा कर दी थी।
सरकार के शुल्क-मुक्त आयात के फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ा है। भारत के आयात की संभावना बढ़ने से वैश्विक चीनी कीमतों पर शुरुआती दबाव देखा गया था। हालांकि, हाल के दिनों में कीमतों में कुछ नरमी आई है क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि घरेलू बाजार में निर्यात के लिए रखी चीनी जारी होने के बाद भारत को अनुमान से कम मात्रा में आयात करना पड़ सकता है।
पांच कारोबारियों, विश्लेषकों और चीनी मिल संचालकों के अनुमान के अनुसार, अक्टूबर के अंत तक भारत में करीब 3 लाख से 6 लाख टन शुल्क-मुक्त चीनी का आयात हो सकता है। यह सरकार की मंजूर 10 लाख टन की सीमा से कम है। घरेलू कीमतों में आई गिरावट के कारण मिलों और शोधन इकाइयों के लिए अधिक मात्रा में चीनी मंगाने का प्रोत्साहन भी कम हुआ है।
गौरतलब है कि भारतीय चीनी शोधन इकाइयों को अग्रिम अनुमति व्यवस्था के तहत बिना शुल्क कच्ची चीनी आयात करने की सुविधा है। शर्त यह है कि प्रसंस्करण के बाद तैयार चीनी को दोबारा विदेश भेजा जाए। ऐसे में निर्यात के लिए निर्धारित चीनी का कुछ हिस्सा घरेलू बाजार में लाने का मौजूदा फैसला तत्काल आपूर्ति बढ़ाने का रास्ता खोलता है। हालांकि, जानकारों के मुताबिक बाद के महीनों में ब्राजील से चीनी की आवक भी जरूरी हो सकती है। फिलहाल सरकार के कदम से त्योहारी मौसम से पहले घरेलू बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ कम होने की उम्मीद है।

