Raghubar Das बोले संशोधित MMDR Act से Jharkhand को मिलेगा फायदा

Raghubar Das बोले संशोधित MMDR Act से Jharkhand को मिलेगा फायदा

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को कहा कि एमएमडीआर कानून राज्य और देश के हितों को पूरा करेगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता दास ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस गठबंधन इस कानून के बारे में भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहा है। दास ने यहां भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भाजपा इस कानून को लेकर झामुमो और कांग्रेस की ओर से भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की आलोचना करती है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि धनबाद, बोकारो, चतरा, हजारीबाग, साहेबगंज और दुमका समेत राज्य के कई जिलों में बड़े पैमाने पर ‘कोयला, बालू और पत्थरों की लूट’ हो रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हाल में संशोधित कानून राज्य और देश, दोनों के हितों को पूरा करेगा। यह अवैध खनन पर रोक लगाएगा तथा पारदर्शिता के साथ कानून सम्मत खनन को बढ़ावा देगा, जिससे राज्य को ज्यादा से ज्यादा फायदा होगा। खनन क्षेत्र से मिलने वाले कुल कर का 90 प्रतिशत हिस्सा राज्य को जाता है और यह व्यवस्था जारी रहेगी।’’
दास ने कहा कि रॉयल्टी के अलावा, केंद्र सरकार ने 2015 में खनन से प्रभावित इलाकों के विकास के लिए ‘डीएमएफटी’ फंड भी शुरू किया था।

उन्होंने कहा कि केंद्र ने झारखंड में 34 कोयला ‘ब्लॉक’ को मंजूरी दी है, लेकिन अभी सिर्फ चार कोयला ‘ब्लॉक’ ही चालू हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘राज्य सरकार अभी तक बाकी 30 कोयला ब्लॉक में काम शुरू नहीं कर पाई है, जो राज्य की गंभीरता की कमी को दिखाता है। इसी तरह, लौह अयस्क की 15 खदानों में से केवल छह चालू हैं और बॉक्साइट की 37 खदानों में से केवल 17 चालू हैं।

अगर ये ब्लॉक और खदानें चालू होतीं, तो राज्य को काफी राजस्व मिलता।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झामुमो-कांग्रेस गठबंधन सरकार 11,000 करोड़ रुपये के उपकर को लेकर ‘रोना-धोना’ करती है, लेकिन असल में इसने उत्पादन और राजस्व, दोनों पर असर डाला। उन्होंने कहा, ‘‘सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (अप्रैल-जुलाई) में झारखंड में कोयले का उत्पादन 4.478 करोड़ टन था, लेकिन 2025-26 में इसी दौरान यह घटकर 3.725 करोड़ टन रह गया।’’
दास ने कहा कि उपकर लगाये जाने के कारण झारखंड का कोयला और लोहा पहले ही महंगा हो गया है, जिससे उनकी मांग में कमी आई है। भाजपा नेता ने कहा, ‘‘ झारखंड में ग्रेड आठ से ग्रेड 12 तक का कोयला 2,045 रुपये से 3,212 रुपये प्रति टन की दर पर उपलब्ध है, जबकि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में यह 1,514 रुपये से 2,681 रुपये प्रति टन की दर पर मिलता है।’’
कांग्रेस की झारखंड इकाई ने मंगलवार को दावा किया कि हाल में संशोधित कानून से राज्य के खजाने को 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, जिससे कई सामाजिक कल्याण योजनाओं, खासकर महिलाओं पर केंद्रित मइयां सम्मान योजना पर असर पड़ेगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय ने प्रेसवार्ता में कहा था कि उपकर और रॉयल्टी से मिलने वाली 14,000 करोड़ रुपये की यह रकम राज्य के 2026-27 वित्तीय वर्ष के सालाना बजट में शामिल है। कांग्रेस ने संसद से पारित विधेयक के विरोध में 27 अगस्त से चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है। संसद ने पिछले दिनों खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दी थी।

इस विधेयक का मकसद खनिज अधिकारों और खनिज संपदा वाली ज़मीनों पर कर लगाने के राज्यों के अधिकारों को सीमित करना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *