पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में हालत और उनके साथ हो रहे व्यवहार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती का बयान खास राजनीतिक मायने रखता है। महबूबा ने इमरान के मौजूदा हालात को पाकिस्तान की उसी राजनीतिक संस्कृति का नतीजा बताया, जिसका उनकी अपनी सरकार भी कभी हिस्सा रही थी। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आज इमरान खान जिस तरह राजनीतिक कार्रवाई और दबाव का सामना कर रहे हैं, उनके प्रधानमंत्री रहते उनके विरोधियों के साथ भी कमोबेश वैसा ही व्यवहार किया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इमरान खान से अपनी पहली मुलाकात को भी याद किया।
महबूबा के मुताबिक, वह 1994 में अपने पिता के साथ लंदन में पहली बार इमरान खान से मिली थीं। पाकिस्तान में सकारात्मक बदलाव लाने के इमरान के जुनून और उनके दृढ़ विश्वास ने उनके पिता को गहराई से प्रभावित किया था। लेकिन सत्ता में पहुंचने के बाद तस्वीर बदल गई। महबूबा ने लिखा कि इमरान खान प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार भी उसी राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन गई, जिसमें विरोधियों का पीछा उसी आक्रामकता से किया जाता है, जिस तरह आज खुद इमरान का किया जा रहा है।
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हम आपको याद दिला दें कि इमरान खान को मार्च 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में मार्च 2023 से वह जेल में हैं। अब इमरान खान की कैद को लेकर चिंता उनके परिवार की ओर से और गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आई है। उनके बेटे कासिम खान ने दावा किया है कि लंबे समय से एकांत कारावास में रखे जाने के कारण उनके 73 वर्षीय पिता की सेहत लगातार बिगड़ रही है और यदि उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिली तो वह जेल में शायद बच न पाएं।
एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कासिम और उनके भाई सुलेमान खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इमरान के निजी अस्पताल के डॉक्टरों से जांच कराने और परिवार के साथ नियमित संपर्क की अनुमति देने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की अनदेखी की है। कासिम खान के मुताबिक, हालात अब इतने गंभीर हो चुके हैं कि उन्हें अपने पिता के जेल से जीवित निकल पाने पर भी आशंका होने लगी है। उन्होंने कहा कि इमरान खान करीब तीन वर्षों से एकांत कारावास झेल रहे हैं और भले ही वह मानसिक रूप से टूटे नहीं हों, लेकिन उनका शरीर इस लंबे बंदी जीवन की कीमत चुका रहा है।
कासिम ने यह भी दावा किया कि इमरान खान को लगभग छह फुट गुणा आठ फुट की एक कोठरी में रखा गया है, जहां खिड़की या प्राकृतिक रोशनी नहीं है और उन्हें अक्सर 23 घंटे से अधिक समय तक उसी कोठरी में बंद रहना पड़ता है। इमरान के अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेंसर ने कथित जेल परिस्थितियों को “स्लो-मोशन मर्डर” तक करार दिया है। हम आपको बता दें कि इमरान की सेहत को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच पाकिस्तानी सरकार ने पिछले सप्ताह उन्हें भारी सुरक्षा के बीच रात में एक सरकारी अस्पताल ले जाकर संक्षिप्त जांच कराई थी, जिसके बाद उन्हें स्वस्थ बताया गया। लेकिन परिवार इस आकलन से संतुष्ट नहीं है और बेहतर तथा स्वतंत्र चिकित्सा जांच की मांग कर रहा है।
दूसरी ओर, महबूबा मुफ्ती का बयान और कासिम खान की चेतावनी, दोनों अलग-अलग संदर्भों से निकलते हुए भी एक बड़े सवाल पर आकर मिलते हैं। महबूबा जहां इमरान के साथ हो रहे व्यवहार को पाकिस्तान की पुरानी राजनीतिक संस्कृति का परिणाम बता रही हैं, वहीं उनका बेटा दावा कर रहा है कि इस राजनीतिक और कानूनी संघर्ष की कीमत अब इमरान खान का शरीर चुका रहा है। देखा जाये तो महबूबा मुफ्ती के बयान ने इसी विडंबना को सबसे धारदार ढंग से सामने रख दिया है। यानि जिस व्यवस्था का इस्तेमाल कभी विरोधियों के खिलाफ हुआ, आज उसी व्यवस्था के शिकंजे में उसका सबसे बड़ा चेहरा खुद फंसा हुआ है।

