बेंगलूरु। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान औसत से कम बारिश के कारण राज्य के अधिकांश तालुकों में सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) कराने का फैसला किया है। जल संसाधन मंत्री एन. चलुवराय स्वामी ने मंगलवार को कहा कि 27 करोड़ रुपए की लागत से क्लाउड सीडिंग कराई जाएगी और अगले 3-4 दिन में इसका काम शुरू होने की उम्मीद है। विधानसभा में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि क्लाउड सीडिंग को लेकर पहले ही चर्चा हो चुकी है और मंत्रिमंडल में भी इस पर विचार किया गया है।
संबंधित एजेंसी से बातचीत
एन. चलुवराय स्वामी ने कहा कि सिंचाई विभाग के माध्यम से यह अभियान चलाया जाएगा। सरकार ने संबंधित एजेंसी से बातचीत की है। विकास आयुक्त के नेतृत्व में निगरानी समिति और तकनीकी समिति गठित की जाएगी। मुख्य सचिव से भी इस संबंध में चर्चा की गई है और दोनों समितियों का गठन जल्द ही किए जाने की संभावना है। समितियों की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने कहा कि क्लाउड सीडिंग के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
पहले भी हुई क्लाउड सीडिंग
मौसम के आकलन के अनुसार सितंबर और अक्टूबर तक बादल छाए रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि क्लाउड सीडिंग से पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार को इसकी सफलता को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं है, लेकिन यदि 30 फीसदी सफलता भी मिलती है तो इसे उपयोगी माना जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले भी तीन बार क्लाउड सीडिंग कराई जा चुकी है, लेकिन अपेक्षित बारिश नहीं हुई थी। इस बार राज्य के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति और किसानों के दबाव को देखते हुए सरकार ने फिर से यह प्रयास करने का फैसला किया है।
सरकार जोखिम लेने को तैयार
मंत्री ने बताया कि क्लाउड सीडिंग चारों राजस्व संभागों में की जाएगी। जहां पर्याप्त बादल उपलब्ध होंगे, वहीं अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान करीब 60 दिनों तक मौसम की स्थिति के आधार पर संचालित होगा। उन्होंने माना कि क्लाउड सीडिंग की सफलता दर आमतौर पर कम रहती है, लेकिन किसानों की स्थिति को देखते हुए सरकार जोखिम लेने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि इससे बारिश कराने में थोड़ी भी सफलता मिलती है तो किसानों और आम लोगों को लाभ होगा।

