17 साल पुराने हत्या मामले में 5 दोषियों को उम्रकैद:नवादा कोर्ट ने सुनाई सजा, पांच हजार रुपये का लगाया अर्थदंड

17 साल पुराने हत्या मामले में 5 दोषियों को उम्रकैद:नवादा कोर्ट ने सुनाई सजा, पांच हजार रुपये का लगाया अर्थदंड

नवादा में 17 साल पुराने हत्या के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय उपेंद्र कुमार की अदालत ने पांच दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अकबरपुर थाना क्षेत्र के कुडिलपुर बंदरकोल गांव निवासी राज कुमार यादव, दुलारचंद यादव, राजेंद्र यादव, आजाद यादव और प्रगास यादव को हत्या का दोषी पाया। सभी दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया गया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 24 जनवरी 2009 को हुई थी। कुडिलपुर बंदरकोल गांव निवासी रामकृपाल यादव हजारीबाग जाने के लिए नवादा के सद्भावना चौक पहुंचे थे। वहां वह अपने चाचा चांदो यादव से मिलने गए। हजारीबाग के लिए गाड़ी नहीं मिलने पर चाचा के आग्रह पर रामकृपाल रात में नवादा नगर के नवीन नगर मोहल्ला स्थित अपनी मौसी के घर जाने लगे। दोनों बड़ी दरगाह की ओर से जा रहे थे। खुरी नदी के पास पहुंचते ही राजकुमार यादव, दुलारचंद यादव, राजेंद्र यादव, आजाद यादव और प्रगास यादव ने उन पर गोली चला दी। गोली चांदो यादव के सिर में लगी, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। रामकृपाल यादव किसी तरह वहां से भागने में सफल रहे। न्यायाधीश ने पांचों आरोपियों को हत्या का दोषी पाया इस घटना के संबंध में नगर थाना में कांड संख्या 35/09 दर्ज किया गया था। पुलिस ने अनुसंधान के बाद सभी आरोपियों को निर्दोष बताते हुए न्यायालय में अंतिम प्रपत्र दाखिल किया था। पुलिस की जांच से असंतुष्ट होकर रामकृपाल यादव ने प्रोटेस्ट परिवाद दायर किया, जिसके आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी। अदालत में गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने पांचों आरोपियों को हत्या का दोषी पाया। सोमवार को अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सभी को सश्रम आजीवन कारावास और प्रत्येक पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। इसके अतिरिक्त, धारा 147 के तहत दो वर्ष के कारावास और प्रत्येक पर तीन हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक दीपक कुमार ने पैरवी की। नवादा में 17 साल पुराने हत्या के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय उपेंद्र कुमार की अदालत ने पांच दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अकबरपुर थाना क्षेत्र के कुडिलपुर बंदरकोल गांव निवासी राज कुमार यादव, दुलारचंद यादव, राजेंद्र यादव, आजाद यादव और प्रगास यादव को हत्या का दोषी पाया। सभी दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया गया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 24 जनवरी 2009 को हुई थी। कुडिलपुर बंदरकोल गांव निवासी रामकृपाल यादव हजारीबाग जाने के लिए नवादा के सद्भावना चौक पहुंचे थे। वहां वह अपने चाचा चांदो यादव से मिलने गए। हजारीबाग के लिए गाड़ी नहीं मिलने पर चाचा के आग्रह पर रामकृपाल रात में नवादा नगर के नवीन नगर मोहल्ला स्थित अपनी मौसी के घर जाने लगे। दोनों बड़ी दरगाह की ओर से जा रहे थे। खुरी नदी के पास पहुंचते ही राजकुमार यादव, दुलारचंद यादव, राजेंद्र यादव, आजाद यादव और प्रगास यादव ने उन पर गोली चला दी। गोली चांदो यादव के सिर में लगी, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। रामकृपाल यादव किसी तरह वहां से भागने में सफल रहे। न्यायाधीश ने पांचों आरोपियों को हत्या का दोषी पाया इस घटना के संबंध में नगर थाना में कांड संख्या 35/09 दर्ज किया गया था। पुलिस ने अनुसंधान के बाद सभी आरोपियों को निर्दोष बताते हुए न्यायालय में अंतिम प्रपत्र दाखिल किया था। पुलिस की जांच से असंतुष्ट होकर रामकृपाल यादव ने प्रोटेस्ट परिवाद दायर किया, जिसके आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी। अदालत में गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने पांचों आरोपियों को हत्या का दोषी पाया। सोमवार को अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सभी को सश्रम आजीवन कारावास और प्रत्येक पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। इसके अतिरिक्त, धारा 147 के तहत दो वर्ष के कारावास और प्रत्येक पर तीन हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक दीपक कुमार ने पैरवी की।  

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