राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता सुनील आंबेकर ने रविवार को आरोप लगाया कि दुनिया भर में मार्क्सवाद और भारत में नक्सलवाद जैसे अति-वामपंथी आंदोलनों से जुड़े लोग इनके कमजोर पड़ने के बाद मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में शामिल हो गए। आंबेकर ने कहा कि उनके ‘मायावी रूप’ की पहचान की जानी चाहिए और उसे खत्म किया जाना चाहिए। आंबेकर ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में नक्सलियों के हाथों मारे गए दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं पर लिखी एक पुस्तक के विमोचन के बाद कहा, ‘‘यह दुनियाभर में देखने को मिला है।
मार्क्सवाद, माओवाद या भारत में नक्सलवाद…इनके विफल होने के बाद वे मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में शामिल होने लगे।’’
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में वे डेमोक्रेटिक पार्टी और ब्रिटेन में लेबर पार्टी में शामिल हो गए। आरएसएस नेता ने कहा कि भारत में भी देखा जा रहा है कि वे मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में शामिल हो गए हैं। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख आंबेकर ने कहा कि इस तरह का प्रयोग दुनियाभर में चल रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में वर्णित राक्षसों के ‘मायावी’ रूप के समान हैं। उन्होंने कहा कि इन तत्वों को लगातार समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘उनके मायावी रूप को समझकर उन्हें खत्म करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’’
आंबेकर ने आरोप लगाया कि भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन का मूल चरित्र, चाहे वह माकपा, भाकपा, नक्सली या आज के ‘‘शहरी नक्सली’’ हों, आमतौर पर देश की सुरक्षा, एकता और विकास के खिलाफ रहा है।

