Neha Pacchisia : कटनी में हत्या के आरोपी को बचाने के लिए हुई सौदेबाजी के मामले में आरोपी निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया व अन्य लोगों पर शिकंजा कसता जा रहा है। प्रकरण की जांच को आगे बढ़ाते हुए आइजी स्तर से जबलपुर में पदस्थ एएसपी अंजना तिवारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शनिवार को वे कटनी पहुंचीं और मामले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर पड़ताल की। खास बात यह है कि नेहा पच्चीसिया केस में अब राजस्व अधिकारी भी लपेटे में आ रहे हैं। आपत्ति के बावजूद जमीन के नामांतरण पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इसपर तहसीलदार अवंतिका तिवारी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जमीन के नामांतरण की पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई।
जबलपुर एएसपी अंजना तिवारी ने पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया केस की जांच शुरु कर दी है। सीएसपी कार्यालय पहुंचकर दस्तावेजों और घटनाक्रम की जानकारी ली। इसके साथ ही हत्या प्रकरण और कथित जमीन सौदे से जुड़े स्थलों का भी निरीक्षण किया। कन्हवारा स्थित उस जमीन का भी जायजा लिया गया, जिसे लेकर पूरे कांड की शुरुआत हुई।
सवालों में नामांतरण
पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया जिस जमीन के मामले में फंसी है उसके नामांतरण को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जमीन के नामांतरण के खिलाफ हत्या के आरोपी की ओर से बाकायदा आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन बगैर सुने ही नामांतरण कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
तहसीलदार अवंतिका तिवारी बोलीं- इश्तहार प्रकाशित कराया
दूसरी ओर, तहसीलदार अवंतिका तिवारी का कहना है कि नामांतरण से पहले नियमानुसार इश्तहार प्रकाशित कराया गया था। ऑनलाइन सूचना जारी की गई। कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई, जिसके बाद नामांतरण की कार्रवाई की गई।
इन बिंदुओं की चल रही जांच
जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि कथित जमीन सौदे में मारूफ अहमद के अलावा अन्य किन लोगों की भूमिका रही। पुलिस की पड़ताल का दायरा शाइन पार्टनर कंस्ट्रक्शन से जुड़े तथ्यों तक भी पहुंचा है, जिसका संबंध क्षितिजराज बारापात्रे से बताया जा रहा है।
तत्कालीन थाना प्रभारी पर भी लगे हैं आरोप
हत्या के आरोपियों ने तत्कालीन थाना प्रभारी राजेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए थे। आवेदन में थाना प्रभारी और सीएसपी की भूमिका होने की बात कही गई थी। हालांकि पुलिस अधिकारियों के अनुसार हत्या प्रकरण एससी-एसटी एक्ट से संबंधित था। ऐसे में मामला दर्ज होने के अगले दिन एसपी द्वारा जांच डायरी सीएसपी पच्चीसिया को सौंप दी गई थी।

