अयोध्या में स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और समय पर उपचार के कारण डिप्थीरिया के गंभीर लक्षणों से जूझ रहे नौ वर्षीय बच्चे की जान बचाई गई। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रेम चंद भारती ने बीकापुर ब्लॉक के चकसेनपुर गांव में बच्चे में डिप्थीरिया के संदिग्ध लक्षण देखे थे। डॉ. भारती ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल जिला चिकित्सालय रेफर किया। वहां जांच के दौरान बच्चे में डिप्थीरिया के स्पष्ट लक्षण पाए गए। उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी और गले में सफेद झिल्ली बन गई थी, जो डिप्थीरिया का एक गंभीर संकेत है। चिकित्सकों ने बताया कि यह स्थिति अत्यंत गंभीर थी और यदि समय पर उपचार न मिलता तो बच्चे की जान को खतरा हो सकता था। जिला चिकित्सालय से बच्चे को तुरंत मेडिकल कॉलेज अयोध्या रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की एक टीम ने बच्चे का गहन उपचार शुरू किया। समय पर मिले इलाज के परिणामस्वरूप बच्चे की हालत में तेजी से सुधार हुआ और अब वह पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज की चिकित्सीय टीम ने बच्चे की स्थिति को देखते हुए टीकाकरण के महत्व पर जोर दिया। टीम के अनुसार, यदि बच्चे को पेंटावेलेंट, डीपीटी और एमआर के निर्धारित टीके लगे होते, तो डिप्थीरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव था और उसकी हालत इतनी गंभीर नहीं होती। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रेम चंद भारती और मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने गुरुवार को दोपहर बाद जनपदवासियों से अपील की है कि वे अपने बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण अवश्य कराएं। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को समय पर सभी निर्धारित टीके लगवाने से कई गंभीर संक्रामक बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। विभाग ने अभिभावकों से टीकाकरण के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने का आग्रह किया है।

