SIP During Market Fall: शेयर बाजार में गिरावट आते ही कई निवेशकों के मन में सबसे पहला सवाल आता है,क्या SIP बंद कर देनी चाहिए। निवेश की सलाह तो बहुत आसान लगती है, हर महीने तय रकम लगाइए और लंबे समय तक निवेश बनाए रखिए। लेकिन जब पोर्टफोलियो की वैल्यू तेजी से गिरने लगे, तो इसी आसान सलाह पर टिके रहना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा गिरते बाजार में कम कीमत पर खरीदना भी मुश्किल हो जाता है। दरअसल, असली समस्या जानकारी की कमी नहीं, बल्कि डर और भावनाओं के बीच सही फैसला लेने की होती है।
कम कीमत पर खरीदने में भी क्यों लगता है डर?
दोस्त, WhatsApp ग्रुप, न्यूज हेडलाइन और बाजार पर होने वाली चर्चाएं डर को और बढ़ा सकती हैं। निवेशक सोचने लगता है अगर नौकरी चली गई तो? परिवार में किसी को पैसों की जरूरत पड़ गई तो? अगर बाजार लंबे समय तक नहीं संभला तो? ऐसे माहौल में SIP जारी रखना या गिरते बाजार में निवेश करना भी कठिन हो जाता है। यही कारण है कि कम कीमत पर खरीदारी करना आसान सलाह तो है, लेकिन उस समय उसे लागू करना मुश्किल होता है।
2008 और कोविड क्रैश ने दिखाया डर
2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान बीएसई सेंसेक्स 10 महीने से भी कम समय में करीब 60 फीसदी गिर गया था। अगर किसी निवेशक ने इंडेक्स फंड में बाजार की ऊंचाई पर 10 लाख रुपये लगाए होते, तो उसकी वैल्यू घटकर करीब 4 लाख रुपये रह सकती थी। ठीक इसी तरह कोविड के दौरान सेंसेक्स करीब दो महीने में लगभग 40 फीसदी गिर गया था। ऐसे समय सिर्फ पोर्टफोलियो नहीं गिरता, निवेशक का भरोसा भी डगमगाने लगता है।
सही फैसले पर टिके कैसे रहें?
सही फैसले पर टिके रहने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होता है। पहली ये है कि निवेश शुरू करने से पहले अपना टार्गेट पहले से तय कर लें कि कितने समय तक निवेश करना है। ऐसे में तेज गिरावट के समय अपने इन्वेस्टमेंट टार्गेट को याद रखना चाहिए। इसके साथ ही रोज पोर्टफोलियो चेक करने से बचें। क्योंकि SIP का मकसद हर महीने बाजार की चाल का अनुमान लगाना नहीं, बल्कि लंबे समय तक नियमित निवेश करना है।
दूसरी बात ये है कि निवेशक को यह मानसिक रूप से स्वीकार करना होगा कि बाजार में गिरावट, तेजी और उतार-चढ़ाव तीनों निवेश का हिस्सा हैं। मुश्किल समय में दोस्तों, WhatsApp ग्रुप, न्यूज हेडलाइन और बाजार में फैली घबराहट देखकर निवेश का फैसला नहीं बदलना चाहिए।
तीसरी बात ये है कि अगर आपको नौकरी जाने, बीमारी या अचानक पैसों की जरूरत का डर है, तो अलग से इमरजेंसी फंड रखना चाहिए। इससे बाजार गिरने के दौरान निवेश को मजबूरी में बेचने का दबाव कम हो सकता है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

