रूस, चीन या ईरान जैसे देशों से भागकर जर्मनी में रहने वाले पत्रकार, कार्यकर्ता और सामान्य नागरिकों के बीच अब देर का माहौल है। ऐसी रिपोर्ट्स है कि चीन और रूस के खुफिया एजेंट्स भागकर आए लोगों को खोजकर मार रहे हैं।
दावा है कि रूस और चीन जैसे देशों से आए लोगों पर नजर रखा जा रहा है, एजेंट्स उन्हें जबरदस्ती पकड़ ले जा रहे हैं या मारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी बीएफवी ने गुरुवार को एक हेल्पलाइन शुरू कर दी है। अब ये लोग सीधे एजेंसी को फोन कर अपनी बात बता सकते हैं।
बढ़ता जा रहा है खतरा
पिछले कुछ सालों में जर्मनी में रहने वाले निर्वासित लोगों पर दबाव बढ़ा है। कई मामलों में उनके परिवार वालों को परेशान किया जाता है। कुछ लोगों को सड़क पर पीछा किया गया, फोन पर धमकी दी गई या सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया।
एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोग, विरोधी आवाज उठाने वाले और पत्रकार सबसे ज्यादा निशाने पर हैं। ऐसे में बीएफवी ने एक 16 पन्ने की पुस्तिका जारी की है। इसमें साफ लिखा है कि एजेंसी अपनी जांच और लोगों से मिली जानकारी से दोषियों तक पहुंच सकती है। कुछ मामलों में खतरे को रोकने में भी मदद मिल सकती है।
लोगों से सहयोग की अपील
एजेंसी सिर्फ मदद नहीं मांग रही, बल्कि लोगों से भी सहयोग चाहती है। जो लोग खतरे में हैं, वे अपनी जानकारी देकर यह समझने में मदद करें कि ये देश कैसे काम करते हैं और कैसे दबाव डालते हैं।
इससे जर्मनी की सुरक्षा एजेंसियों को बेहतर रणनीति बनाने में आसानी होगी। पुस्तिका में साफ कहा गया है कि पीड़ित व्यक्ति की बात सुनकर और अपनी जांच करके एजेंसी जिम्मेदार लोगों तक पहुंच सकती है।
नए कानून की तैयारी
यह कदम ऐसे समय आया है जब जर्मनी सरकार खुफिया एजेंसियों को और ज्यादा अधिकार देने की तैयारी कर रही है। साइबर हमले और मिश्रित हमलों का खतरा बढ़ रहा है।
बीएफवी और विदेशी खुफिया एजेंसी बीएनडी को अब संचार में सेंध लगाने और विदेशी गतिविधियों को रोकने के ज्यादा अधिकार मिल सकते हैं। महीनों से इस पर चर्चा चल रही है। सरकार का कहना है कि पुराने तरीके अब काफी नहीं हैं।
कौन उठा सकता है फायदा?
जर्मनी में शरण लिए हुए वे सभी लोग इस हेल्पलाइन का इस्तेमाल कर सकते हैं जो अपने मूल देश की एजेंसियों से खतरा महसूस करते हैं। चाहे वो रूस से आए हों, चीन से या ईरान से।
एजेंसी का मकसद सिर्फ सुरक्षा देना नहीं, बल्कि लंबे समय में इन धमकियों को कमजोर करना भी है। कई लोग अब तक चुप रहते थे क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि किससे बात करें। अब एक सीधा रास्ता खुल गया है।

