नालंदा के नूरसराय प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय परासी में मिड-डे मील खाने से 34 बच्चों के बीमार पड़ने के मामले विभाग ने स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित कर दिया है और तीन रसोइयों को सेवामुक्त कर दिया है। इसके अलावा भोजन आपूर्ति करने वाले एनजीओ और संबंधित शिक्षा अधिकारियों से भी जवाब तलब किया गया है। नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचन्द्र ने बताया कि सूचना मिली थी कि 15 बच्चे (11 बच्चियां और 4 छात्र) भोजन खाने के बाद बीमार हो गए हैं और उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया है। हालांकि, बाद में गांव से अन्य बीमार बच्चे भी अस्पताल पहुंचे। कुल मिलाकर इस घटना में 34 बच्चों (17 छात्राएं और 17 छात्र) को अस्पताल में एडमिट कराया गया था। हेडमास्टर और रसोइयों पर गिरी गाज जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया इस मामले में स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आई है। स्कूल के प्रधानाध्यापक ही मध्याह्न भोजन योजना के संचालक होते हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, बच्चों को सही और सुरक्षित तरीके से खाना खिलाने की मुख्य जिम्मेदारी रसोइयों की होती है। इस कर्तव्य में भारी लापरवाही बरतने के कारण स्कूल में पदस्थापित तीनों रसोइयों को भी सेवा से मुक्त कर दिया गया है।
एनजीओ और शिक्षा अधिकारियों को शोकॉज नोटिस
डीईओ ने बताया कि स्कूल में ‘एकता शक्ति फाउंडेशन’ नामक एनजीओ की ओर से भोजन परोसा जाता है। इनका रामगढ़ (नूरसराय) में एक सेंट्रलाइज्ड किचन है, जहां से यह भोजन बनकर स्कूल आया था। इस फाउंडेशन को शोकॉज नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही, लापरवाही के आरोप में प्रखंड साधन सेवी और एमडीएम के डीपीएम को भी शोकॉज नोटिस थमाया गया है। एफआईआर का आदेश, मेडिकल रिपोर्ट से खुलेगा राज
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि नूरसराय के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे पूरे मामले की जांच कर दोषियों को चिह्नित करें और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएं। वहीं, बच्चों की ओप से नमक की जगह कपड़े धोने वाला ‘सर्फ’ परोसे जाने के आरोप पर डीईओ ने कहा कि वे फिलहाल डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। खाने या नमक में वास्तव में क्या मिलाया गया था, यह मेडिकल रिपोर्ट और जांच के बाद ही आधिकारिक तौर पर स्पष्ट हो सकेगा। नालंदा के नूरसराय प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय परासी में मिड-डे मील खाने से 34 बच्चों के बीमार पड़ने के मामले विभाग ने स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित कर दिया है और तीन रसोइयों को सेवामुक्त कर दिया है। इसके अलावा भोजन आपूर्ति करने वाले एनजीओ और संबंधित शिक्षा अधिकारियों से भी जवाब तलब किया गया है। नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचन्द्र ने बताया कि सूचना मिली थी कि 15 बच्चे (11 बच्चियां और 4 छात्र) भोजन खाने के बाद बीमार हो गए हैं और उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया है। हालांकि, बाद में गांव से अन्य बीमार बच्चे भी अस्पताल पहुंचे। कुल मिलाकर इस घटना में 34 बच्चों (17 छात्राएं और 17 छात्र) को अस्पताल में एडमिट कराया गया था। हेडमास्टर और रसोइयों पर गिरी गाज जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया इस मामले में स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आई है। स्कूल के प्रधानाध्यापक ही मध्याह्न भोजन योजना के संचालक होते हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, बच्चों को सही और सुरक्षित तरीके से खाना खिलाने की मुख्य जिम्मेदारी रसोइयों की होती है। इस कर्तव्य में भारी लापरवाही बरतने के कारण स्कूल में पदस्थापित तीनों रसोइयों को भी सेवा से मुक्त कर दिया गया है।
एनजीओ और शिक्षा अधिकारियों को शोकॉज नोटिस
डीईओ ने बताया कि स्कूल में ‘एकता शक्ति फाउंडेशन’ नामक एनजीओ की ओर से भोजन परोसा जाता है। इनका रामगढ़ (नूरसराय) में एक सेंट्रलाइज्ड किचन है, जहां से यह भोजन बनकर स्कूल आया था। इस फाउंडेशन को शोकॉज नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही, लापरवाही के आरोप में प्रखंड साधन सेवी और एमडीएम के डीपीएम को भी शोकॉज नोटिस थमाया गया है। एफआईआर का आदेश, मेडिकल रिपोर्ट से खुलेगा राज
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि नूरसराय के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे पूरे मामले की जांच कर दोषियों को चिह्नित करें और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएं। वहीं, बच्चों की ओप से नमक की जगह कपड़े धोने वाला ‘सर्फ’ परोसे जाने के आरोप पर डीईओ ने कहा कि वे फिलहाल डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। खाने या नमक में वास्तव में क्या मिलाया गया था, यह मेडिकल रिपोर्ट और जांच के बाद ही आधिकारिक तौर पर स्पष्ट हो सकेगा।

