एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI – Artificial Intelligence) का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। आज के इस दौर में हर उम्रवर्ग के लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। चैटजीपीटी (ChatGPT) जैसे एआई चैटबॉट्स काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन टीनेजर्स के लिए ये खतरनाक भी हो सकते हैं। कम उम्र के बच्चों की मानसिक सेहत पर एआई चैटबॉट्स के घातक प्रभावों और कोर्ट में बढ़ते मुकदमों के बीच टेक कंपनी ओपनएआई (OpenAI) ने नया कदम उठाया है। कंपनी ने टीनेजर्स के लिए चैटजीपीटी का एक विशेष और सुरक्षा प्रतिबंधों से लैस ‘टीनेज मोड’ लॉन्च कर दिया है।
‘डिजिटल साथी’ बन रहे जानलेवा
एआई चैटबॉट्स पर भावनात्मक निर्भरता के बाद किशोरों द्वारा आत्महत्या और खुद को नुकसान पहुंचाने के कई भयावह मामले अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सामने आए हैं। सोशल मीडिया आपको कंटेंट दिखाता है, लेकिन एआई चैटबॉट्स यूज़र के ‘सहानुभूतिपूर्ण साथी’ बनने के लिए प्रोग्राम किए जाते हैं। वो हर परिस्थिति में यूज़र की भावनाओं को सही ठहराते हैं जो कि एक सामान्य बातचीत में अच्छा लग सकता है, लेकिन अवसाद या मानसिक तनाव से जूझ रहे टीनेजर्स के लिए यह बिना शर्त समर्थन बहुत खतरनाक साबित हुआ है।
टीनेजर्स के लिए क्या बदलेगा?
टीनेजर्स के लिए आए चैटजीपीटी के इस नए और सुरक्षित मोड में चैटबॉट अब 18 साल से कम उम्र के यूज़र्स के साथ रोमांटिक, भावनात्मक या वयस्क सामग्री वाली बात नहीं करेगा। चैटबॉट खुद को एक जीवित, सचेत या यूज़र से प्यार करने वाला इंसान बताकर टीनेजर्स को भ्रमित नहीं कर सकेगा। माता-पिता अपना अकाउंट बच्चे के प्रोफाइल से जोड़ सकेंगे। हाई-रिस्क विषय सर्च हुआ तो उन्हें ‘अलर्ट’ मिलेगा। गलत उम्र दर्ज करने पर भी चैटबॉट विषयों, भाषा शैली से उम्र पहचानकर ऑटोमैटिकली सेफ्टी मोड लागू कर देगा।
क्या यह फूलप्रूफ है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि चैटजीपीटी का यह नया ‘एज-डिटेक्शन’ और सुरक्षित मोड पूरी तरह से अचूक नहीं हैं। इसके अलावा कई पेरेंटल कंट्रोल्स तभी काम करते हैं जब माता-पिता खुद उन्हें ऑन करें। फिर भी एआई को सच्चा साथी मानकर टीनेजर्स के लगाव से जुड़े बड़े जोखिमों को रोकने की दिशा में इसे एक ज़रूरी और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है और आगे जाकर इस दिशा में और अहम कदम उठाए जा सकते हैं।

