जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल में 92 में से 63 पद खाली:हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा भर्ती कार्यवाही का ब्योरा

जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल में 92 में से 63 पद खाली:हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा भर्ती कार्यवाही का ब्योरा

उत्तर प्रदेश में जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल की पीठों में भारी संख्या में रिक्त पदों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी नाराजगी जताई है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की एकल पीठ ने केंद्र सरकार के हलफनामे को अपर्याप्त और अस्पष्ट करार दिया। कोर्ट में पेश की गईं दलींले मेसर्स एस.एस. फार्मा याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार त्रिपाठी और विमल चंद्र पाठक ने पैरवी की, जबकि केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह और राज्य की ओर से अधिवक्ता रवि शंकर पांडेय ने पक्ष रखा। कोर्ट के आदेश पर पहले वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश में जी एस टी अपीलीय ट्रिब्यूनल पूरी तरह कार्यशील हैं। लेकिन कोर्ट ने कहा कि हलफनामे की सामग्री ही इस दावे का खंडन करती है। दाखिल हलफनामे के मुताबिक- उत्तर प्रदेश में जी एस टी अपीलीय ट्रिब्यूनल के विभिन्न स्तरों पर कुल 92 पद स्वीकृत हैं (86 पद 10 मई 2024 को और 6 अतिरिक्त पद 5 मई 2026 को मंजूर किए गए)। इनमें से अब तक केवल 29 पद ही भरे जा सके हैं।-मात्र 6 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी होने की बात कही गई है। शेष 63 पद अब भी खाली हैं और इन्हें भरने की कोई ठोस समयबद्ध कार्ययोजना हलफनामे में नहीं दी गई। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सितंबर 2025 के एक परिपत्र के तहत राज्य की विभिन्न बेंचों से जुड़े 44 पदों में से केवल 14 पद ही भरे जा सके, और सरकार ने इसका कारण “पर्याप्त आवेदन न मिलना” बताया। इसके बाद अगस्त 2025 और जनवरी 2026 में और परिपत्र जारी किए गए, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इन परिपत्रों के बाद क्या ठोस कार्रवाई हुई, आवेदन कितने आए, जांच कैसे हुई ,इन सबका कोई ब्यौरा हलफनामे में नहीं है। ठोस और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है कोर्ट ने कहा कि केवल परिपत्र और विज्ञापन जारी कर देना कानूनी दायित्व की पूर्ति नहीं माना जा सकता। इसके लिए ठोस और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है जो वाकई पदों की भर्ती में तब्दील हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों की ओर से प्रभावी अनुवर्ती कार्रवाई की कमी सरकार की मूल मंशा को ही विफल कर रही है, जिससे अंततः वादियों को प्रभावी अपीलीय उपाय से वंचित होना पड़ रहा है। कोर्ट ने वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव को अगली सुनवाई से पहले एक विस्तृत, विशिष्ट और ठोस हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें इन बातों का खुलासा अनिवार्य होगा। सभी 92 पदों की पद-वार और पीठ-वार स्थिति, रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया का वर्तमान चरण, हर रिक्ति के लिए तिथिवार की गई कार्रवाई और जिम्मेदार प्राधिकारी, सितंबर 2025, अगस्त 2025 और जनवरी 2026 के परिपत्रों पर हुई कार्रवाई का पूरा विवरण, विज्ञापन/नोटिस कब और कैसे वेबसाइटों पर अपलोड या प्रसारित किए गए,प्रत्येक पद के लिए प्राप्त आवेदनों की संख्या और चयन प्रक्रिया की स्थिति, जी एस टी अपीलीय ट्रिब्यूनल की प्रमुख पीठ व संबंधित बेंचों के साथ हुए पत्राचार का विवरण, रिक्तियां भरने के लिए स्पष्ट और समयबद्ध कार्यक्रम कोर्ट की चेतावनी कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अगला हलफनामा भी संतोषजनक और समयबद्ध प्रगति नहीं दिखाता, तो कोर्ट जिम्मेदार अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब कर सकता है और आगे के आदेश पारित करने पर विचार करेगा। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को संबंधित मामले के साथ नियत की गई है।

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