द फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) ने परीक्षा पेपर लीक रोकने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की ओर से बताए गए उपायों की पर्याप्तता को लेकर उच्चतम न्यायालय में सवाल उठाए हैं। एफएआईएमए ने एनटीए के हलफनामे पर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करते हुए कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए विशेष प्रावधान होने चाहिए, जिसमें प्रश्नपत्र तैयार करने वाले, जांच करने वाले या अन्य अधिकृत लोग अपनी पहुंच का गलत इस्तेमाल करते हुए सामग्री की नकल करके, उसे साझा करके या अन्य तरीके से किसी अनधिकृत व्यक्ति को उपलब्ध करायें। एफएआईएमए कहा, ‘‘जब किसी व्यक्ति को अत्यंत गोपनीय सामग्री की जिम्मेदारी सौंपी गई हो और वह भरोसे का दुरुपयोग करता है, तो कानून में ऐसे कृत्य को गंभीर अपराध मानते हुए अधिक कड़ी सजा और दंड का प्रावधान होना चाहिए, जो वर्तमान लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 में शामिल नहीं है।’’
एफएआईएमए ने कहा कि केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधारों पर एक उच्चस्तरीय कार्यबल गठित किया है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि पहले गठित डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को अक्षरश: लागू क्यों नहीं किया गया।
एफएआईएमए ने कहा, ‘‘यह स्पष्टीकरण जरूरी है क्योंकि छात्र बार-बार पेपर लीक की घटनाओं का सामना नहीं कर सकते और हर साल एक नई समिति बनाए जाने की स्थिति स्वीकार्य नहीं है, जबकि पिछली समितियों की सिफारिशों को पूरी तरह लागू भी नहीं किया गया।’’
अधिवक्ता तन्वी दुबे के माध्यम से एफएआईएमए ने कहा कि राधाकृष्णन समिति ने 2024 में अपनी एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कुल 101 सिफारिशें की गई थीं। एफएआईएमए ने कहा कि इन सिफारिशों में परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद अपनाई जाने वाली मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) शामिल थीं। उसने कहा कि इसके बावजूद 2026 में पेपर लीक की एक घटना सामने आई और अब एक और कार्यबल गठित करने की जरूरत बताई जा रही है।
नीट-यूजी पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की संरचना एवं कार्यप्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देने के उद्देश्य से सात सदस्यीय राधाकृष्णन समिति का गठन किया था। सरकार ने प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में ढांचागत सुधारों के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल भी गठित किया है। शीर्ष अदालत एफएआईएमए की याचिका सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
इनमें से एक याचिका में नीट-यूजी जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षा कराने के लिए एनटीए की जगह एक मजबूत और स्वायत्त संस्था गठित करने या एनटीए के पुनर्गठन का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। पेपर लीक के आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है। वर्ष 2024 में नीट-यूजी के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद उच्चतम न्यायालय ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था, लेकिन पेपर लीक रोकने और सार्वजनिक परीक्षाओं को रद्द करने के लिए मानदंड तय करने समेत कई निर्देश जारी किए थे।

