अंग क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकपर्व बिहुला विषहरी पूजा मंगलवार की शाम बांका में श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो गया। दो दिनों तक जिले के अलग-अलग प्रखंडों और गांवों में विषहरी माता की पूजा-अर्चना को लेकर भक्तिमय माहौल बना रहा। अंतिम दिन पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और विषहरी गीतों के बीच भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली। मंजूषा और देवी विषहरी की प्रतिमाओं को लेकर श्रद्धालु नाचते-गाते नदी, नहर और तालाबों तक पहुंचे और देर शाम तक विसर्जन का सिलसिला चलता रहा। दो दिनों तक गांवों में रहा उत्सवी माहौल बिहुला विषहरी पूजा को लेकर जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में दो दिनों तक उत्सव का माहौल रहा। जगह-जगह ग्रामीण मेले लगाए गए, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण पहुंचे। महिलाओं और बच्चों की मेले में खास भीड़ रही। मेले में खिलौने, चूड़ी, श्रृंगार सामग्री, मिठाई और घरेलू सामान समेत कई तरह की दुकानें सजाई गई थीं। लोगों ने परिवार के साथ मेले का आनंद लिया और जमकर खरीदारी की। पूजा और मेले को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में दिनभर चहल-पहल बनी रही। मेढ़पति और पुजारियों ने कराई विशेष पूजा पूजा के अंतिम दिन विभिन्न विषहरी मंदिरों और गांवों में मेढ़पति एवं पुजारियों की ओर से विशेष पूजा-अर्चना कराई गई। पारंपरिक विधि-विधान से देवी विषहरी की पूजा के बाद विसर्जन की तैयारी शुरू हुई। पूजा संपन्न होने के बाद भगतों और श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़े के साथ विसर्जन शोभायात्रा निकाली। विषहरी गीतों के बीच श्रद्धालु मंजूषा और देवी विषहरी की प्रतिमाएं लेकर जलाशयों की ओर रवाना हुए। अबीर-गुलाल उड़ाते नाचे श्रद्धालु विसर्जन शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। कई जगह श्रद्धालु अबीर-गुलाल उड़ाते और डीजे की धुन पर नाचते नजर आए। गांवों से निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा शामिल हुए। शोभायात्रा के दौरान गांव की सड़कें विषहरी गीतों, ढोल-नगाड़ों और जयकारों से गूंजती रहीं। श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ देवी की प्रतिमा और मंजूषा को लेकर विसर्जन स्थल तक पहुंचे। जख बाबा कटरिया नदी समेत कई जलाशयों में हुआ विसर्जन भागलपुर-हंसडीहा मुख्य मार्ग स्थित जख बाबा कटरिया नदी सहित प्रखंड के विभिन्न जलाशयों में देर शाम तक प्रतिमा और मंजूषा विसर्जन का सिलसिला जारी रहा। रजौन, रानीटीकर, पिपराहडीह, खैरा, खिड्डी, महादा, मड़नी, मोरामा, बनगांव और टेकनी समेत कई गांवों के श्रद्धालु विसर्जन शोभायात्रा में शामिल हुए। अलग-अलग गांवों से निकली शोभायात्राएं निर्धारित विसर्जन स्थलों तक पहुंचीं। मेले में महिलाओं और बच्चों की रही खास भीड़ विषहरी पूजा के साथ आयोजित ग्रामीण मेलों में बच्चों और महिलाओं की खास भीड़ देखने को मिली। खिलौनों और खाने-पीने की दुकानों के अलावा चूड़ी और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ लगी रही। ग्रामीणों ने परिवार और रिश्तेदारों के साथ मेले में पहुंचकर खरीदारी की। पूजा और मेले के कारण ग्रामीण इलाकों में पूरे दिन उत्सवी माहौल बना रहा। विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल हालांकि, प्रतिमा विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे। जलाशयों में विसर्जन के दौरान गोताखोरों की तैनाती नहीं की गई थी। केवल पुलिस बल की मौजूदगी में विसर्जन कराया गया। देर शाम तक अलग-अलग जलाशयों में विसर्जन का सिलसिला जारी रहने के बावजूद गोताखोरों की तैनाती नहीं होने से सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रही। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए स्थानीय लोगों ने पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम की जरूरत बताई। नम आंखों से दी देवी को विदाई विसर्जन कार्यक्रम के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं ने नम आंखों से देवी विषहरी को विदाई दी। प्रतिमा और मंजूषा का विसर्जन करने के बाद लोगों ने परिवार और समाज की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके साथ ही दो दिनों से चल रहा अंग क्षेत्र का प्रसिद्ध बिहुला विषहरी लोकपर्व संपन्न हो गया। पूजा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में दिखी आस्था, परंपरा और उत्साह ने एक बार फिर अंग क्षेत्र की लोक संस्कृति की झलक दिखाई। अंग क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकपर्व बिहुला विषहरी पूजा मंगलवार की शाम बांका में श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो गया। दो दिनों तक जिले के अलग-अलग प्रखंडों और गांवों में विषहरी माता की पूजा-अर्चना को लेकर भक्तिमय माहौल बना रहा। अंतिम दिन पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और विषहरी गीतों के बीच भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली। मंजूषा और देवी विषहरी की प्रतिमाओं को लेकर श्रद्धालु नाचते-गाते नदी, नहर और तालाबों तक पहुंचे और देर शाम तक विसर्जन का सिलसिला चलता रहा। दो दिनों तक गांवों में रहा उत्सवी माहौल बिहुला विषहरी पूजा को लेकर जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में दो दिनों तक उत्सव का माहौल रहा। जगह-जगह ग्रामीण मेले लगाए गए, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण पहुंचे। महिलाओं और बच्चों की मेले में खास भीड़ रही। मेले में खिलौने, चूड़ी, श्रृंगार सामग्री, मिठाई और घरेलू सामान समेत कई तरह की दुकानें सजाई गई थीं। लोगों ने परिवार के साथ मेले का आनंद लिया और जमकर खरीदारी की। पूजा और मेले को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में दिनभर चहल-पहल बनी रही। मेढ़पति और पुजारियों ने कराई विशेष पूजा पूजा के अंतिम दिन विभिन्न विषहरी मंदिरों और गांवों में मेढ़पति एवं पुजारियों की ओर से विशेष पूजा-अर्चना कराई गई। पारंपरिक विधि-विधान से देवी विषहरी की पूजा के बाद विसर्जन की तैयारी शुरू हुई। पूजा संपन्न होने के बाद भगतों और श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़े के साथ विसर्जन शोभायात्रा निकाली। विषहरी गीतों के बीच श्रद्धालु मंजूषा और देवी विषहरी की प्रतिमाएं लेकर जलाशयों की ओर रवाना हुए। अबीर-गुलाल उड़ाते नाचे श्रद्धालु विसर्जन शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। कई जगह श्रद्धालु अबीर-गुलाल उड़ाते और डीजे की धुन पर नाचते नजर आए। गांवों से निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा शामिल हुए। शोभायात्रा के दौरान गांव की सड़कें विषहरी गीतों, ढोल-नगाड़ों और जयकारों से गूंजती रहीं। श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ देवी की प्रतिमा और मंजूषा को लेकर विसर्जन स्थल तक पहुंचे। जख बाबा कटरिया नदी समेत कई जलाशयों में हुआ विसर्जन भागलपुर-हंसडीहा मुख्य मार्ग स्थित जख बाबा कटरिया नदी सहित प्रखंड के विभिन्न जलाशयों में देर शाम तक प्रतिमा और मंजूषा विसर्जन का सिलसिला जारी रहा। रजौन, रानीटीकर, पिपराहडीह, खैरा, खिड्डी, महादा, मड़नी, मोरामा, बनगांव और टेकनी समेत कई गांवों के श्रद्धालु विसर्जन शोभायात्रा में शामिल हुए। अलग-अलग गांवों से निकली शोभायात्राएं निर्धारित विसर्जन स्थलों तक पहुंचीं। मेले में महिलाओं और बच्चों की रही खास भीड़ विषहरी पूजा के साथ आयोजित ग्रामीण मेलों में बच्चों और महिलाओं की खास भीड़ देखने को मिली। खिलौनों और खाने-पीने की दुकानों के अलावा चूड़ी और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ लगी रही। ग्रामीणों ने परिवार और रिश्तेदारों के साथ मेले में पहुंचकर खरीदारी की। पूजा और मेले के कारण ग्रामीण इलाकों में पूरे दिन उत्सवी माहौल बना रहा। विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल हालांकि, प्रतिमा विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे। जलाशयों में विसर्जन के दौरान गोताखोरों की तैनाती नहीं की गई थी। केवल पुलिस बल की मौजूदगी में विसर्जन कराया गया। देर शाम तक अलग-अलग जलाशयों में विसर्जन का सिलसिला जारी रहने के बावजूद गोताखोरों की तैनाती नहीं होने से सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रही। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए स्थानीय लोगों ने पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम की जरूरत बताई। नम आंखों से दी देवी को विदाई विसर्जन कार्यक्रम के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं ने नम आंखों से देवी विषहरी को विदाई दी। प्रतिमा और मंजूषा का विसर्जन करने के बाद लोगों ने परिवार और समाज की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके साथ ही दो दिनों से चल रहा अंग क्षेत्र का प्रसिद्ध बिहुला विषहरी लोकपर्व संपन्न हो गया। पूजा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में दिखी आस्था, परंपरा और उत्साह ने एक बार फिर अंग क्षेत्र की लोक संस्कृति की झलक दिखाई।

