कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे एकनाथ शिंदे, गोपीनाथ मुंडे को लेकर भी पूर्व सांसद हुसैन दलवई ने किया दावा

कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे एकनाथ शिंदे, गोपीनाथ मुंडे को लेकर भी पूर्व सांसद हुसैन दलवई ने किया दावा

Maharashtra Politics: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई के दावे से महाराष्ट्र में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। उन्होंने शिवसेना नेता और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि शिंदे कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे, लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते थे कि वे पार्टी में शामिल हो। हालांकि पूर्व सांसद दलवई के इस बयान पर डिप्टी सीएम शिंदे की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण के इस दावे पर कि दिवंगत BJP नेता गोपीनाथ मुंडे कांग्रेस में शामिल होने के बारे में सोच रहे थे पर भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह बात सही है। यह तय हो गया था कि वह शामिल होंगे।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने आगे कहा कि लास्ट टाइम पर जब वे सोनिया गांधी से मिलने जा रहे थे, तब अहमद पटेल का फोन आया कि पहले आप इस्तीफा दो, फिर चुनाव लड़ो और उसके बाद, हम तुम्हें यहां मंत्री बना देंगे। यही हुआ और वह डर गए और शामिल नहीं हुए।

शिंदे के लिए क्या बोले हुसैन दलवई

उन्होंने कहा कि जब पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री थे, तब एकनाथ शिंदे भी कांग्रेस में शामिल होने के लिए तैयार थे। उन्होंने कहा- अगर आप मुझे शामिल करते हैं, तो मैं पूरे ठाणे जिले और पालघर को अपने साथ ले आऊंगा, जिसमें वहां के सभी कॉर्पोरेशन भी शामिल हैं। उन्होंने इन सभी बातों पर चर्चा की थी। लेकिन हमारे कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और इसीलिए आज हमारी सरकार सत्ता में नहीं है।

शिवसेना नेता ने दी प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई के बयान पर शिवसेना नेता और एमएलसी मनीषा कायंदे की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि हमने सुना था कि हुसैन दलवई खुद कांग्रेस से नाखुश थे और उन्होंने कई बार पार्टी छोड़ने की कोशिश की थी। इसलिए, यह पूरी तरह से गलत है। खबरों में बने रहने के लिए इस तरह के बेतुके बयान देना हुसैन दलवई की आदत बन गई है।

पंकजा मुंडे ने दावों को किया खारिज

वहीं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे ने कांग्रेस नेता हुसैन दलवई के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने इनको झूठा बताया और कहा कि अब इन राजनीतिक चर्चाओं का कोई महत्व भी नहीं है।

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