अतिक्रमण के नाम पर गरीबों के ठेलों पर बुलडोजर चलाने और आम जनता से जुर्माना वसूलने वाला बिहारशरीफ नगर निगम खुद परिवहन विभाग के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। हैरत की बात यह है कि पूरे शहर में बिना नंबर प्लेट के धड़ल्ले से दौड़ रही निगम की इन गाड़ियों पर ट्रैफिक पुलिस भी कोई कार्रवाई करने से कतरा रही है। 90% गाड़ियों से नदारद है नंबर प्लेट शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा उठाने वाले नगर निगम के भारी-भरकम बेड़े में करीब 51 टिपर, 20 ट्रैक्टर, 5 जेसीबी और 4 बॉबकैट मशीनें शामिल है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस बेड़े की 90 प्रतिशत से अधिक गाड़ियों पर नंबर प्लेट ही नहीं है। बिना वैध रजिस्ट्रेशन नंबर के ये गाड़ियां शहर की व्यस्त सड़कों पर बेरोकटोक संचालित हो रही हैं, जो मोटर वाहन अधिनियम और यातायात नियमों का सीधा और खुला उल्लंघन है। हादसा होने पर कौन लेगा जिम्मेदारी? बिना नंबर प्लेट की इन गाड़ियों के कारण आम जनता के लिए हर समय एक बड़ा खतरा मंडराता रहता है। यदि निगम की किसी गाड़ी (टीपर या ट्रैक्टर) से कोई सड़क हादसा हो जाता है, तो पीड़ित या आम लोग चाहकर भी थाने में एफआईआर या शिकायत दर्ज नहीं करा पाते हैं। बिना नंबर प्लेट के वाहन की पहचान करना असंभव हो जाता है, जिससे आरोपी चालक आसानी से बच निकलते हैं। नगर आयुक्त और ट्रैफिक डीएसपी ने दिया जांच का आश्वासन आम जनता पर नियम थोपने वाले निगम की इस गंभीर लापरवाही पर बिहारशरीफ के नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन से बात की गई। उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा कि देखते हैं, पता करते हैं कि कितनी गाड़ियों में नंबर प्लेट नहीं लगी है। मामले की जांच करवाएंगे। वहीं, दूसरी ओर ट्रैफिक डीएसपी के प्रभार में मौजूद हेडक्वार्टर डीएसपी तारकिशोर प्रसाद ने भी इस मामले का ‘वेरिफिकेशन’ करवाने की बात कही है। अतिक्रमण के नाम पर गरीबों के ठेलों पर बुलडोजर चलाने और आम जनता से जुर्माना वसूलने वाला बिहारशरीफ नगर निगम खुद परिवहन विभाग के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। हैरत की बात यह है कि पूरे शहर में बिना नंबर प्लेट के धड़ल्ले से दौड़ रही निगम की इन गाड़ियों पर ट्रैफिक पुलिस भी कोई कार्रवाई करने से कतरा रही है। 90% गाड़ियों से नदारद है नंबर प्लेट शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा उठाने वाले नगर निगम के भारी-भरकम बेड़े में करीब 51 टिपर, 20 ट्रैक्टर, 5 जेसीबी और 4 बॉबकैट मशीनें शामिल है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस बेड़े की 90 प्रतिशत से अधिक गाड़ियों पर नंबर प्लेट ही नहीं है। बिना वैध रजिस्ट्रेशन नंबर के ये गाड़ियां शहर की व्यस्त सड़कों पर बेरोकटोक संचालित हो रही हैं, जो मोटर वाहन अधिनियम और यातायात नियमों का सीधा और खुला उल्लंघन है। हादसा होने पर कौन लेगा जिम्मेदारी? बिना नंबर प्लेट की इन गाड़ियों के कारण आम जनता के लिए हर समय एक बड़ा खतरा मंडराता रहता है। यदि निगम की किसी गाड़ी (टीपर या ट्रैक्टर) से कोई सड़क हादसा हो जाता है, तो पीड़ित या आम लोग चाहकर भी थाने में एफआईआर या शिकायत दर्ज नहीं करा पाते हैं। बिना नंबर प्लेट के वाहन की पहचान करना असंभव हो जाता है, जिससे आरोपी चालक आसानी से बच निकलते हैं। नगर आयुक्त और ट्रैफिक डीएसपी ने दिया जांच का आश्वासन आम जनता पर नियम थोपने वाले निगम की इस गंभीर लापरवाही पर बिहारशरीफ के नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन से बात की गई। उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा कि देखते हैं, पता करते हैं कि कितनी गाड़ियों में नंबर प्लेट नहीं लगी है। मामले की जांच करवाएंगे। वहीं, दूसरी ओर ट्रैफिक डीएसपी के प्रभार में मौजूद हेडक्वार्टर डीएसपी तारकिशोर प्रसाद ने भी इस मामले का ‘वेरिफिकेशन’ करवाने की बात कही है।

