पटना नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पटना में 26 हज़ार भवन मालिकों पर नोटिस जारी किया है कि वे आवासीय क्षेत्र में कैसे व्यावसायिक काम कर रहे हैं। इसपर मेयर के खिलाफ आक्रोश देखने को मिल रहा है। वार्ड 28 के पार्षद विनय कुमार पप्पू ने इस नोटिस की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। इस मामले पर उन्होंने बैठक भी की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई इलाका वास्तव में आवासीय क्षेत्र घोषित है, तो वहां स्थित भवनों से नगर निगम ने सालों तक कमर्शियल दर से प्रॉपर्टी टैक्स कैसे वसूला? यदि निगम ने किसी भवन को व्यावसायिक मानकर लगातार टैक्स असेसमेंट किया, तो अब उसी भवन मालिक को व्यावसायिक गतिविधि के नाम पर नोटिस जारी करने का आधार क्या है? नोटिस के बाद आम नागरिकों में भय की स्थिति पैदा हो गई पार्षद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का वे पूरा सम्मान करते हैं। मगर जब पटना नगर निगम ने अभी तक पूरे निगम क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक/गैर-आवासीय क्षेत्रों का स्पष्ट और विधिवत निर्धारण और अधिसूचन ही नहीं किया है, तो फिर किस आधार पर भवन मालिकों एवं व्यवसायियों को इस प्रकार की नोटिस जारी की जा रही है? पटना नगर निगम द्वारा पूरे शहर में भवन मालिकों और व्यवसायियों को जारी नोटिस के बाद आम नागरिकों में भय, चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। निगम को पहले अपने रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी असेसमेंट बताना होगा विनय पप्पू ने कहा कि एक आम नागरिक अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर मकान बनाता है और उसी परिसर में छोटी दुकान या व्यवसाय चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। ऐसे नागरिक को अचानक नोटिस देकर भयभीत करना उचित नहीं है। निगम को पहले अपने रिकॉर्ड, कर निर्धारण और क्षेत्रीय अधिसूचन की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आवासीय-व्यावसायिक क्षेत्रों का स्पष्ट निर्धारण करे निगम उन्होंने आगे कहा कि न्यायालय के आदेश के नाम पर आम नागरिक को भयभीत करना स्वीकार्य नहीं हो सकता। पहले निगम यह स्पष्ट करे कि आवासीय क्षेत्र कौन-सा है, व्यावसायिक क्षेत्र कौन-सा है और सालों तक किस आधार पर कमर्शियल टैक्स वसूला गया। जनता से कर लेने के समय भवन व्यावसायिक था और अब नोटिस देने के समय वही गतिविधि अवैध कैसे हो गई? नगर निगम को इसका जवाब देना होगा। पटना नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पटना में 26 हज़ार भवन मालिकों पर नोटिस जारी किया है कि वे आवासीय क्षेत्र में कैसे व्यावसायिक काम कर रहे हैं। इसपर मेयर के खिलाफ आक्रोश देखने को मिल रहा है। वार्ड 28 के पार्षद विनय कुमार पप्पू ने इस नोटिस की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। इस मामले पर उन्होंने बैठक भी की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई इलाका वास्तव में आवासीय क्षेत्र घोषित है, तो वहां स्थित भवनों से नगर निगम ने सालों तक कमर्शियल दर से प्रॉपर्टी टैक्स कैसे वसूला? यदि निगम ने किसी भवन को व्यावसायिक मानकर लगातार टैक्स असेसमेंट किया, तो अब उसी भवन मालिक को व्यावसायिक गतिविधि के नाम पर नोटिस जारी करने का आधार क्या है? नोटिस के बाद आम नागरिकों में भय की स्थिति पैदा हो गई पार्षद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का वे पूरा सम्मान करते हैं। मगर जब पटना नगर निगम ने अभी तक पूरे निगम क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक/गैर-आवासीय क्षेत्रों का स्पष्ट और विधिवत निर्धारण और अधिसूचन ही नहीं किया है, तो फिर किस आधार पर भवन मालिकों एवं व्यवसायियों को इस प्रकार की नोटिस जारी की जा रही है? पटना नगर निगम द्वारा पूरे शहर में भवन मालिकों और व्यवसायियों को जारी नोटिस के बाद आम नागरिकों में भय, चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। निगम को पहले अपने रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी असेसमेंट बताना होगा विनय पप्पू ने कहा कि एक आम नागरिक अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर मकान बनाता है और उसी परिसर में छोटी दुकान या व्यवसाय चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। ऐसे नागरिक को अचानक नोटिस देकर भयभीत करना उचित नहीं है। निगम को पहले अपने रिकॉर्ड, कर निर्धारण और क्षेत्रीय अधिसूचन की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आवासीय-व्यावसायिक क्षेत्रों का स्पष्ट निर्धारण करे निगम उन्होंने आगे कहा कि न्यायालय के आदेश के नाम पर आम नागरिक को भयभीत करना स्वीकार्य नहीं हो सकता। पहले निगम यह स्पष्ट करे कि आवासीय क्षेत्र कौन-सा है, व्यावसायिक क्षेत्र कौन-सा है और सालों तक किस आधार पर कमर्शियल टैक्स वसूला गया। जनता से कर लेने के समय भवन व्यावसायिक था और अब नोटिस देने के समय वही गतिविधि अवैध कैसे हो गई? नगर निगम को इसका जवाब देना होगा।


