TRE-4 में PT-Mains से शिक्षक भर्ती में होगा बदलाव:अब शिक्षक बनने के लिए दो परीक्षाएं पास करनी होंगी, अभ्यर्थियों की तैयारी पर पड़ेगा असर

TRE-4 में PT-Mains से शिक्षक भर्ती में होगा बदलाव:अब शिक्षक बनने के लिए दो परीक्षाएं पास करनी होंगी, अभ्यर्थियों की तैयारी पर पड़ेगा असर

बिहार में शिक्षक बनना अब सिर्फ एक परीक्षा पास करने का मामला नहीं रहेगा। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) शिक्षक भर्ती के चौथे चरण यानी TRE-4 में PT के बाद Mains कराने जा रहा है। यानी जिस तरह बड़ी सरकारी नौकरियों में अभ्यर्थी को पहले स्क्रीनिंग और फिर मुख्य परीक्षा से गुजरना पड़ता है, अब शिक्षक बनने के लिए भी दो स्तर की परीक्षा देनी होगी। फर्क इतना होगा कि सिविल सर्विसेज में PT और Mains के बाद इंटरव्यू होता है, जबकि शिक्षक भर्ती में इंटरव्यू नहीं होगा। ऐसे में TRE-4 के बाद शिक्षक बनने वाले अभ्यर्थियों को पहले की तुलना में दो स्तर पर अपनी योग्यता साबित करनी होगी। इस बदलाव का सीधा असर अभ्यर्थियों की तैयारी पर पड़ेगा। TRE-1, TRE-2 और TRE-3 में एक ही परीक्षा के जरिए सिलेक्शन हो जाती थी, जबकि अब PT सिर्फ पहला पड़ाव होगा। आयोग का उद्देश्य ज्यादा बेहतर स्क्रीनिंग और गुणवत्तापूर्ण चयन करना है, लेकिन अभ्यर्थियों के सामने चुनौती भी बढ़ेगी। आखिर PT-Mains क्यों लाया गया? 1. PT से स्क्रीनिंग होगी और फिर Mains में विषय की समझ और तैयारी को ज्यादा गहराई से परखा जा सकेगा। यानी शिक्षक भर्ती में अब सिर्फ ‘कितने नंबर आए’ के बजाय ‘विषय पर पकड़ कितनी है’ को ज्यादा महत्व देने की कोशिश होगी। 2. इसे सिविल सर्विस जैसी दो-स्तरीय चयन व्यवस्था की ओर बदलाव कहा जा सकता है, लेकिन यह पूरी तरह वैसी परीक्षा नहीं होगी। सिविल सर्विस में PT, Mains और इंटरव्यू तीन चरण होते हैं, जबकि शिक्षक भर्ती में फिलहाल PT और Mains की बात है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो आगे चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की स्क्रीनिंग पहले से ज्यादा सख्त होगी।
TRE-1, 2, 3 और TRE-4 में असली फर्क क्या है? – पहले एक परीक्षा ही सबसे बड़ा मौका थी। TRE-1, 2 और 3 में अभ्यर्थी एक लिखित परीक्षा की तैयारी करता था और उसी के प्रदर्शन से मेरिट में जगह बनाने की कोशिश होती थी। इसलिए पढ़ाई का पूरा फोकस एक परीक्षा पर रहता था। – अब PT सिर्फ छंटनी करेगा, असली मुकाबला Mains में भी होगा। यानी PT में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी अभ्यर्थी को चैन से बैठने का मौका नहीं मिलेगा। उसे अगले चरण के लिए पहले से तैयार रहना होगा। छात्रों के लिए यह बदलाव कितना कठिन होगा? परीक्षा का स्तर कितना कठिन होगा, यह अभी Mains के सिलेबस और पैटर्न से तय होगा। लेकिन तैयारी का दबाव निश्चित रूप से बढ़ेगा। – पहले अभ्यर्थी एक परीक्षा के लिए अपनी तैयारी को अंतिम रूप देता था। अब उसे दो अलग स्तर की जरूरतों को साथ लेकर चलना होगा। PT के लिए स्पीड और सटीकता, जबकि Mains के लिए विषय की गहरी समझ। यही बदलाव मेहनत का स्तर बढ़ाएगा। – सबसे ज्यादा नुकसान उन अभ्यर्थियों को हो सकता है जो PT निकलने के बाद Mains की तैयारी शुरू करने की सोचेंगे। अगर दोनों चरणों के बीच समय कम रहा तो उनके पास Mains की गहराई से तैयारी करने का पर्याप्त वक्त नहीं होगा।
क्या इससे शिक्षक ज्यादा योग्य होंगे? आयोग की मंशा यही है कि चयन प्रक्रिया ज्यादा बेहतर स्क्रीनिंग के जरिए हो और योग्य उम्मीदवार सामने आएं। – PT से उम्मीदवारों की शुरुआती छंटनी होगी और Mains में उन अभ्यर्थियों को परखा जाएगा जो पहले चरण में सफल रहे हैं। इससे अंतिम सूची तक पहुंचने वाले उम्मीदवारों की संख्या सीमित और प्रतियोगिता ज्यादा केंद्रित होगी। – लेकिन सिर्फ दो परीक्षा करा देने से शिक्षक की गुणवत्ता तय नहीं हो सकती। इसके लिए प्रश्नों का स्तर, सिलेबस, मूल्यांकन और अंतिम मेरिट की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। इसलिए TRE-4 की पूरी प्रक्रिया सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि बदलाव कितना प्रभावी साबित होता है। छात्रों का विरोध: TRE-4 में बदलाव क्यों नहीं चाहते? छात्र नेता दिलीप कुमार ने PT और Mains की व्यवस्था का विरोध किया है। उनका कहना है कि TRE-4 के अभ्यर्थी पहले से चली आ रही परीक्षा प्रक्रिया को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे हैं। अगर बदलाव करना है तो इसे TRE-5 से लागू किया जाए, ताकि नई भर्ती के अभ्यर्थी शुरुआत से नए पैटर्न के हिसाब से तैयारी कर सकें। दिलीप कुमार ने आयोग के परीक्षा कैलेंडर पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि कैलेंडर में TRE-4 के सामने TBD यानी To Be Decided लिखा गया है, जबकि परीक्षा और विज्ञापन की स्पष्ट तारीख नहीं बताई गई है। उनका आरोप है कि इतनी देरी के बाद सिर्फ कैलेंडर जारी करने से बिहार के युवाओं को वास्तविक परीक्षा कार्यक्रम की जानकारी नहीं मिल रही है। बिहार में शिक्षक बनना अब सिर्फ एक परीक्षा पास करने का मामला नहीं रहेगा। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) शिक्षक भर्ती के चौथे चरण यानी TRE-4 में PT के बाद Mains कराने जा रहा है। यानी जिस तरह बड़ी सरकारी नौकरियों में अभ्यर्थी को पहले स्क्रीनिंग और फिर मुख्य परीक्षा से गुजरना पड़ता है, अब शिक्षक बनने के लिए भी दो स्तर की परीक्षा देनी होगी। फर्क इतना होगा कि सिविल सर्विसेज में PT और Mains के बाद इंटरव्यू होता है, जबकि शिक्षक भर्ती में इंटरव्यू नहीं होगा। ऐसे में TRE-4 के बाद शिक्षक बनने वाले अभ्यर्थियों को पहले की तुलना में दो स्तर पर अपनी योग्यता साबित करनी होगी। इस बदलाव का सीधा असर अभ्यर्थियों की तैयारी पर पड़ेगा। TRE-1, TRE-2 और TRE-3 में एक ही परीक्षा के जरिए सिलेक्शन हो जाती थी, जबकि अब PT सिर्फ पहला पड़ाव होगा। आयोग का उद्देश्य ज्यादा बेहतर स्क्रीनिंग और गुणवत्तापूर्ण चयन करना है, लेकिन अभ्यर्थियों के सामने चुनौती भी बढ़ेगी। आखिर PT-Mains क्यों लाया गया? 1. PT से स्क्रीनिंग होगी और फिर Mains में विषय की समझ और तैयारी को ज्यादा गहराई से परखा जा सकेगा। यानी शिक्षक भर्ती में अब सिर्फ ‘कितने नंबर आए’ के बजाय ‘विषय पर पकड़ कितनी है’ को ज्यादा महत्व देने की कोशिश होगी। 2. इसे सिविल सर्विस जैसी दो-स्तरीय चयन व्यवस्था की ओर बदलाव कहा जा सकता है, लेकिन यह पूरी तरह वैसी परीक्षा नहीं होगी। सिविल सर्विस में PT, Mains और इंटरव्यू तीन चरण होते हैं, जबकि शिक्षक भर्ती में फिलहाल PT और Mains की बात है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो आगे चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की स्क्रीनिंग पहले से ज्यादा सख्त होगी।
TRE-1, 2, 3 और TRE-4 में असली फर्क क्या है? – पहले एक परीक्षा ही सबसे बड़ा मौका थी। TRE-1, 2 और 3 में अभ्यर्थी एक लिखित परीक्षा की तैयारी करता था और उसी के प्रदर्शन से मेरिट में जगह बनाने की कोशिश होती थी। इसलिए पढ़ाई का पूरा फोकस एक परीक्षा पर रहता था। – अब PT सिर्फ छंटनी करेगा, असली मुकाबला Mains में भी होगा। यानी PT में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी अभ्यर्थी को चैन से बैठने का मौका नहीं मिलेगा। उसे अगले चरण के लिए पहले से तैयार रहना होगा। छात्रों के लिए यह बदलाव कितना कठिन होगा? परीक्षा का स्तर कितना कठिन होगा, यह अभी Mains के सिलेबस और पैटर्न से तय होगा। लेकिन तैयारी का दबाव निश्चित रूप से बढ़ेगा। – पहले अभ्यर्थी एक परीक्षा के लिए अपनी तैयारी को अंतिम रूप देता था। अब उसे दो अलग स्तर की जरूरतों को साथ लेकर चलना होगा। PT के लिए स्पीड और सटीकता, जबकि Mains के लिए विषय की गहरी समझ। यही बदलाव मेहनत का स्तर बढ़ाएगा। – सबसे ज्यादा नुकसान उन अभ्यर्थियों को हो सकता है जो PT निकलने के बाद Mains की तैयारी शुरू करने की सोचेंगे। अगर दोनों चरणों के बीच समय कम रहा तो उनके पास Mains की गहराई से तैयारी करने का पर्याप्त वक्त नहीं होगा।
क्या इससे शिक्षक ज्यादा योग्य होंगे? आयोग की मंशा यही है कि चयन प्रक्रिया ज्यादा बेहतर स्क्रीनिंग के जरिए हो और योग्य उम्मीदवार सामने आएं। – PT से उम्मीदवारों की शुरुआती छंटनी होगी और Mains में उन अभ्यर्थियों को परखा जाएगा जो पहले चरण में सफल रहे हैं। इससे अंतिम सूची तक पहुंचने वाले उम्मीदवारों की संख्या सीमित और प्रतियोगिता ज्यादा केंद्रित होगी। – लेकिन सिर्फ दो परीक्षा करा देने से शिक्षक की गुणवत्ता तय नहीं हो सकती। इसके लिए प्रश्नों का स्तर, सिलेबस, मूल्यांकन और अंतिम मेरिट की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। इसलिए TRE-4 की पूरी प्रक्रिया सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि बदलाव कितना प्रभावी साबित होता है। छात्रों का विरोध: TRE-4 में बदलाव क्यों नहीं चाहते? छात्र नेता दिलीप कुमार ने PT और Mains की व्यवस्था का विरोध किया है। उनका कहना है कि TRE-4 के अभ्यर्थी पहले से चली आ रही परीक्षा प्रक्रिया को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे हैं। अगर बदलाव करना है तो इसे TRE-5 से लागू किया जाए, ताकि नई भर्ती के अभ्यर्थी शुरुआत से नए पैटर्न के हिसाब से तैयारी कर सकें। दिलीप कुमार ने आयोग के परीक्षा कैलेंडर पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि कैलेंडर में TRE-4 के सामने TBD यानी To Be Decided लिखा गया है, जबकि परीक्षा और विज्ञापन की स्पष्ट तारीख नहीं बताई गई है। उनका आरोप है कि इतनी देरी के बाद सिर्फ कैलेंडर जारी करने से बिहार के युवाओं को वास्तविक परीक्षा कार्यक्रम की जानकारी नहीं मिल रही है।  

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