ias neha marvya : एमपी की आइएएस नेहा मारव्या फिर सुर्खियों में हैं। जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने उनके खिलाफ शुक्रवार को पेन डाउन हड़ताल कर काम बंद कर दिया। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रीय विकास परियोजना की संचालक आइएएस नेहा मारव्या के विरोध में नारेबाजी की। उनपर बदतमीजी और अभद्रता से बात करने, केन्द्र की योजनाओं की राशि रोकने, कर्मचारियों के इंक्रीमेंट रोकने, बार-बार नोटिस देकर निलंबित करने की धमकी देने के आरोप लगाए। आइएएस नेहा मारव्या पहले भी विवादों में रहीं हैं। फील्ड की पोस्टिंग नहीं मिलने से कुछ समय पूर्व उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप पर लिखा- “मुझे 14 साल तक कैद करके रखा गया।” कई अन्य चैट और बयान भी चर्चित रहे।
संचालनालय के आदि भवन पर एकत्रित सौ से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों ने नेहा मारव्या के खिलाफ नारेबाजी की और दिन भर कोई काम नहीं किया। कर्मचारियों के विरोध के बाद नेहा ने अपना फोन ही बंद कर लिया।
पीवीटीजी जनजातियों के आहार अनुदान रोके
अधिकारियों ने बताया कि आहार अनुदान योजना के तहत पीवीटीजी में शामिल बैगा, सहरिया और भारिया जनजाति की करीब 2.40 लाख महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए दिए जाते हैं। अगस्त की करीब 30 करोड़ रुपए की राशि अब तक उनके खातों में नहीं पहुंची है। अजजा आयोग ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए सीएस से कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, मप्र राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने भी सीएम और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मारव्या पर केन्द्रीय योजनाओं को प्रभावित करने की शिकायत कर हटाने की मांग की है। दूसरी ओर विभाग के राजपत्रित अधिकारी संघ ने भी मुख्य सचिव को पत्र भेजकर संचालक के व्यवहार पर आपत्ति जताई है।
14 साल से दीवारों में कैद
नेहा मारव्या एमपी कैडर की 2011 बैच की आईएएस हैं। वे कलेक्टर बनना चाहती थीं। आईएएस आफिसर्स एसोसिएशन के युवा व्हाट्सएप ग्रुप में उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना दर्द बयां कर दिया। नेहा मारव्या ने लिखा- मुझे 14 साल की नौकरी में एक बार भी फील्ड की पोस्टिंग नहीं मिली। मैं सिर्फ ऑफिस आती हूं और चली जाती हूं। मुझे दीवारों में कैद करके रख दिया गया है।
4 साल की कलेक्टरी पर छलका दर्द
व्हाट्सएप ग्रुप में आईएएस ज्ञानेश्वर पाटिल ने एक कांसेप्ट नोट लिखा कि आईएएस अधिकारियों को 14 साल में 4 साल कलेक्टरी मिलना चाहिए। इसके जवाब में नेहा मारव्या ने पोस्ट किया कि मुझे एक बार भी फील्ड की पोस्टिंग नहीं मिली। साढ़े 3 साल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव बनाकर बैठाया, फिर ढाई साल से राजस्व विभाग में बिना काम का उप सचिव बनाया हुआ है। 9 महीने से सिर्फ ऑफिस आती हूं और चली जाती हूं। मुझे दीवारों में कैद करके रख दिया गया है।


