Parliamentary Panel Report: देश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली दो प्रमुख संस्थाओं NCERT और CBSE में कर्मचारियों की भारी कमी सामने आई है। संसद की अनुमान समिति की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एनसीईआरटी में स्वीकृत पदों में से आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। वहीं सीबीएसई में भी 44 प्रतिशत पद भरे नहीं गए हैं। समिति ने इन महत्वपूर्ण शिक्षा निकायों में स्टाफ की इतनी बड़ी कमी पर अपनी चिंता व्यक्त की है।
लोकसभा में पेश हुई समिति की रिपोर्ट
यह चौंकाने वाले आंकड़े 18वीं लोकसभा की प्राक्कलन समिति (2026-27) की दसवीं रिपोर्ट का हिस्सा हैं। यह जानकारी देश में किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने से जुड़े बजटीय और नीतिगत पहलुओं पर तैयार की गई समिति की रिपोर्ट में सामने आई है, जिसे बुधवार को लोकसभा में पेश किया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कर्मचारियों की इस भारी कमी का सीधा असर इन दोनों बड़ी संस्थाओं के कामकाज पर पड़ सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने में अहम है NCERT
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक समिति ने कहा कि एनसीईआरटी देश में शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम को आकार देने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लागू करना भी शामिल है। शिक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया था कि एनसीईआरटी ने फाउंडेशनल स्टेज और स्कूली शिक्षा के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है और उसी के आधार पर नए सिलेबस और किताबें तैयार की जा रही हैं।
NCERT में 1596 पद पड़े हैं खाली
इतनी बड़ी जिम्मेदारी होने के बावजूद एनसीईआरटी में विभिन्न स्तरों पर बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक एनसीईआरटी की विभिन्न शाखाओं में कुल 2,844 स्वीकृत पदों में से केवल 1,248 पद ही भरे हुए थे। इसका मतलब है कि वहां 1,596 पद खाली पड़े हैं। इनमें 145 पद एकेडमिक, 131 स्कूल टीचिंग, 916 लिपिक और 404 अन्य सहायक पद शामिल हैं। समिति ने शिक्षा मंत्रालय से कहा है कि एनसीईआरटी जैसी शीर्ष संस्था में इतने पद खाली होना एक गंभीर मामला है और मंत्रालय को इन्हें भरने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।
सीबीएसई में भी 933 पदों पर नहीं हैं कर्मचारी
संसदीय समिति ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में स्थायी कर्मचारियों की भारी कमी पर भी अपनी चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सीबीएसई में 2117 स्वीकृत पदों में से 933 पद खाली हैं जो कि कुल पदों का करीब 44 फीसदी है। सबसे ज्यादा 595 पद ग्रुप-सी सपोर्ट स्टाफ के खाली हैं। समिति ने पाया कि सीबीएसई अपना रोजमर्रा का काम चलाने के लिए पूरी तरह से अस्थायी और संविदा कर्मचारियों पर निर्भर है।
समिति ने चेतावनी दी है कि स्थायी कर्मचारियों की इतनी बड़ी कमी प्रमुख राष्ट्रीय बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता और उनके सुचारू संचालन के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। समिति ने सिफारिश की है कि बोर्ड परीक्षा से जुड़े संवेदनशील और गोपनीय कामों के लिए अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भर रहना बंद करे और फास्ट ट्रैक तरीके से खाली पदों पर पक्की भर्तियां करे।
लगातार बढ़ रहा है सीबीएसई का दायरा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सीबीएसई पूरी तरह से सेल्फ फंडेड संस्था है और इसे मंत्रालय से कोई अनुदान नहीं मिलता है। साल 1992-93 में सीबीएसई से जुड़े स्कूलों की संख्या सिर्फ 3787 थी जो 8 अक्टूबर, 2025 तक बढ़कर 31234 हो गई है। बोर्ड अब अपने 25 क्षेत्रीय कार्यालयों और 5 उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के जरिए काम कर रहा है। साल 2025 में 12वीं कक्षा में 17 लाख से ज्यादा और 10वीं में करीब 24 लाख छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए थे। संसदीय समिति ने कहा कि काम के बढ़ते दबाव को देखते हुए खाली पदों का भरा जाना बेहद जरूरी है।


