सिरसा जिले के कालांवाली से बीजेपी नेता टिशू प्रधान के मानहानि नोटिस पर डबवाली से बीजेपी जिलाध्यक्ष रेणू शर्मा ने जवाब भेज दिया है। साथ ही जिला महामंत्री विजयंत शर्मा ने भी नोटिस का जवाब भेजा है। नोटिस के जवाब में जिलाध्यक्ष और महामंत्री ने कहा है कि ये वीडियो सबके सामने ही बना था। उस समय मना नहीं किया और न ही ऐतराज जताया। ये माफी पब्लिकली हुआ था और इसका वीडियो भी बना था। इसके बाद ये वीडियो वायरल हो गया। इसके वायरल का पता नहीं चला। दोनों ने अपने वकील के जरिए इस लीगली नोटिस का लिखित में जवाब टिशू प्रधान के वकील को भेजा है। इसके बाद टिशू कोर्ट का रूख भी कर सकते हैं। अभी इस पर उन्होंने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। अभी जिलाध्यक्ष और बीजेपी नेता टिशू प्रधान के बीच राजनीतिक मतभेद दूर नहीं हुए है। उनके बीच सियासत जारी है। अब बीजेपी नेता टिशू प्रधान जिलाध्यक्ष से अलग अपनी तिरंगा यात्रा निकालेंगे। इसके लिए अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली है। ऐसे में वे अपने समर्थकों के साथ अलग से तिरंगा यात्रा निकालेंगे। इन तीन प्वाइंट से जानिए पूरा विवाद वायरल वीडियो से हुई थी शुरूआत: टिशू प्रधान का पहले शुरू में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह डबवाली की भाजपा जिलाध्यक्ष रेणू शर्मा और उनके पति के पांव छूते दिखे थे। उस समय पूर्व सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी ने उनको समझौते के लिए बुलाया था। तभी दो वीडियो बनाए गए। इनमें से एक वीडियो में माफी मांगते हुए जिलाध्यक्ष को मां के सामान बताया था और दूसरा वीडियो पांव छूने वाला था। 30लाख का मानहानि दावा ठोका: इसी पांव छूने वाले वीडियो के बाद टिशू के समर्थकों व लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए और बेइज्जती महसूस की। इस पर टिशू ने मानहानि का 30 लाख रुपये बतौर हर्जाना देने का दावा किया और वीडियो हटाने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। अंदरूनी खींचतान बढ़ी: हालांकि, इससे पहले जिलाध्यक्ष रेणू शर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर विरोध किए जाने एवं प्रदेशाध्यक्ष अर्चना गुप्ता के डबवाली दौरे के बाद टिशू प्रधान और जोती सरा को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था, जिसके बाद आपसी खींचतान बढ़ गई। एक बार माफी मांगने से मामला सुलझ गया था, लेकिन वीडियो वायरल ने मामला बिगाड़ दिया। नोटिस में ये आरोप लगाया था वकील के जरिए भेजे गए नोटिस में मानहानि एवं मानसिक प्रताड़ना की क्षतिपूर्ति के रूप में 30 लाख रुपए देने का दावा किया है। चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के अंदर मांगों का पालन करने में विफल रहते हैं तो आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318, 336, 340 के तहत उचित अपराधिक कार्रवाई के लिए विवश होना पड़ेगा। आरोप लगाया है कि गुप्त रिकॉर्डिंग, मानहानिकारक वीडियो का प्रकाशन, निजता का उल्लंघन और मानहानि एवं मानसिक क्षति पहुंचाई है।


