Global Oil Crisis: होर्मुज संकट से $84 के पार पहुंचा Brent Crude, ईरान-अमेरिका में बढ़ी तकरार

Global Oil Crisis: होर्मुज संकट से  के पार पहुंचा Brent Crude, ईरान-अमेरिका में बढ़ी तकरार
तेल की कीमतों में सोमवार सुबह एक बार फिर तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता बढ़ी हुई है। सबसे ज्यादा नजर होर्मुज स्ट्रेट पर है, जहां से तेल की आवाजाही फिर शुरू होने को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हुई है। इसी अनिश्चितता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम एक प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए हैं।
सोमवार सुबह करीब साढ़े सात बजे भारतीय समय के अनुसार ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 1.32 प्रतिशत बढ़कर 84.65 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 1.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78.99 डॉलर प्रति बैरल रही। हालांकि, इससे पहले पिछले सप्ताह दोनों प्रमुख तेल मानकों में सात प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई थी। उस समय उम्मीद थी कि ईरान और ओमान के बीच समझौता हो सकता है और इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य हो जाएगी।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की करीब पांचवीं तेल आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरती थी। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है और कीमतों में तेजी आने का खतरा बढ़ जाता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच समुद्री रास्ते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि ओमान के साथ समझौता अंतिम दौर में है। इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के लिए नए समुद्री रास्ते तय किए जा सकते हैं। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि इन रास्तों का इस्तेमाल तभी शुरू होगा, जब अमेरिका उसकी कुछ प्रमुख मांगों को स्वीकार करेगा।
ईरान की मांगों में मुआवजा, प्रतिबंधों को हटाना और अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की धमकी खत्म करना शामिल है। दोनों देशों के बीच फिलहाल सीधी बातचीत नहीं हो रही है। अराघची के मुताबिक, ईरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक अपने संदेश पहुंचा रहा है। उनका कहना है कि जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते का पालन नहीं करता, तब तक सीधे बातचीत की स्थिति नहीं बन सकती है।
इस बीच क्षेत्र में तेल से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रविवार को सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की जाज़ान रिफाइनरी पर हमला करने का दावा किया। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने रिफाइनरी में आग लगने की पुष्टि की है। मंत्रालय के अनुसार, आग पर काबू पा लिया गया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। हालांकि, आग लगने की वजह के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई है।
बता दें कि हूती विद्रोही लाल सागर और अदन की खाड़ी के आसपास भी जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं। यह इलाका भी दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार और तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। पिछले महीने हूती समूह ने लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की थी। उसने इसे यमन में हूतियों पर सऊदी दबाव का जवाब बताया था। सऊदी अरब इन आरोपों से इनकार करता है और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है।
उधर, संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी एडीएनओसी ने बताया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उसके 15 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय हमलों की चपेट में आ चुके हैं। इन घटनाओं ने तेल की सुरक्षित आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि तेल बाजार में उतार-चढ़ाव लगातार बना हुआ है, लेकिन मौजूदा कीमतें युद्ध के शुरुआती दौर में देखे गए 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से काफी नीचे हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि होर्मुज स्ट्रेट कब दोबारा पूरी तरह खुलेगा और ईरान, ओमान तथा अमेरिका के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। इन घटनाक्रमों के कारण आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहने की आशंका जताई जा रही है।

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Global Oil Crisis: होर्मुज संकट से  के पार पहुंचा Brent Crude, ईरान-अमेरिका में बढ़ी तकरार
तेल की कीमतों में सोमवार सुबह एक बार फिर तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता बढ़ी हुई है। सबसे ज्यादा नजर होर्मुज स्ट्रेट पर है, जहां से तेल की आवाजाही फिर शुरू होने को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हुई है। इसी अनिश्चितता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम एक प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए हैं।
सोमवार सुबह करीब साढ़े सात बजे भारतीय समय के अनुसार ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 1.32 प्रतिशत बढ़कर 84.65 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 1.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78.99 डॉलर प्रति बैरल रही। हालांकि, इससे पहले पिछले सप्ताह दोनों प्रमुख तेल मानकों में सात प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई थी। उस समय उम्मीद थी कि ईरान और ओमान के बीच समझौता हो सकता है और इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य हो जाएगी।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की करीब पांचवीं तेल आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरती थी। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है और कीमतों में तेजी आने का खतरा बढ़ जाता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच समुद्री रास्ते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि ओमान के साथ समझौता अंतिम दौर में है। इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के लिए नए समुद्री रास्ते तय किए जा सकते हैं। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि इन रास्तों का इस्तेमाल तभी शुरू होगा, जब अमेरिका उसकी कुछ प्रमुख मांगों को स्वीकार करेगा।
ईरान की मांगों में मुआवजा, प्रतिबंधों को हटाना और अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की धमकी खत्म करना शामिल है। दोनों देशों के बीच फिलहाल सीधी बातचीत नहीं हो रही है। अराघची के मुताबिक, ईरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक अपने संदेश पहुंचा रहा है। उनका कहना है कि जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते का पालन नहीं करता, तब तक सीधे बातचीत की स्थिति नहीं बन सकती है।
इस बीच क्षेत्र में तेल से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रविवार को सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की जाज़ान रिफाइनरी पर हमला करने का दावा किया। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने रिफाइनरी में आग लगने की पुष्टि की है। मंत्रालय के अनुसार, आग पर काबू पा लिया गया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। हालांकि, आग लगने की वजह के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई है।
बता दें कि हूती विद्रोही लाल सागर और अदन की खाड़ी के आसपास भी जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं। यह इलाका भी दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार और तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। पिछले महीने हूती समूह ने लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की थी। उसने इसे यमन में हूतियों पर सऊदी दबाव का जवाब बताया था। सऊदी अरब इन आरोपों से इनकार करता है और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है।
उधर, संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी एडीएनओसी ने बताया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उसके 15 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय हमलों की चपेट में आ चुके हैं। इन घटनाओं ने तेल की सुरक्षित आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि तेल बाजार में उतार-चढ़ाव लगातार बना हुआ है, लेकिन मौजूदा कीमतें युद्ध के शुरुआती दौर में देखे गए 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से काफी नीचे हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि होर्मुज स्ट्रेट कब दोबारा पूरी तरह खुलेगा और ईरान, ओमान तथा अमेरिका के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। इन घटनाक्रमों के कारण आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहने की आशंका जताई जा रही है।

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