Gold Loan 22K Vs 18K: अगर आपके पास सोने के गहने हैं और पैसों की जरूरत पड़ गई है, तो गोल्ड लोन एक आसान रास्ता लग सकता है। लेकिन यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है। गहना 18 कैरेट का है या 22 कैरेट का, इसका सीधा असर आपकी EMI पर नहीं पड़ता। फर्क पड़ता है तो लोन के लिए गहने की वैल्यू और उसके आधार पर मिलने वाली रकम पर। यानी एक ही वजन के 18 कैरेट और 22 कैरेट के गहने को गिरवी रखने पर दोनों के लिए मिलने वाला लोन बराबर होना जरूरी नहीं है। ज्यादा शुद्ध सोने वाले गहने की वैल्यू ज्यादा हो सकती है और इसी वजह से लोन की रकम भी बढ़ सकती है।
18K और 22K सोने की कीमत अलग क्यों?
गोल्ड लोन देते समय बैंक या NBFC सिर्फ गहने का कुल वजन नहीं देखते। वे यह भी जांचते हैं कि उसमें असली सोना कितना है और उसकी शुद्धता कितनी है। 18 कैरेट और 22 कैरेट सोने में शुद्ध सोने की मात्रा अलग होती है। गहनों में सोने के अलावा दूसरी धातुएं भी मिलाई जाती हैं। इसलिए 10 ग्राम का कोई गहना होने का मतलब यह नहीं है कि पूरे 10 ग्राम सोने के आधार पर लोन मिलेगा।
कर्जदाता पहले सोने की शुद्धता और नेट गोल्ड वेट यानी गहने में मौजूद वास्तविक सोने का वजन तय करता है। इसके बाद उसी आधार पर गहने की वैल्यू निकाली जाती है। Finkurve Financial Services के डायरेक्टर प्रियंक कोठारी के मुताबिक, अगर सोना 18 कैरेट है, तो उसकी वैल्यू उसी शुद्धता के हिसाब से तय होगी। वहीं, 22 कैरेट सोने को उसकी ज्यादा शुद्धता के आधार पर वैल्यू किया जाएगा। इसलिए 18K और 22K गहनों पर मिलने वाले लोन की रकम अलग हो सकती है।
EMI स्ट्रक्चर पर नहीं पड़ेगा कैरेट का सीधा असर
यहां सबसे बड़ा कन्फ्यूजन दूर करना जरूरी है। सोने की शुद्धता बदलने से EMI का कोई अलग नियम नहीं बन जाता। कोठारी के मुताबिक, 18 कैरेट या 22 कैरेट सोना होने से लोन की रकम में अंतर आ सकता है, लेकिन EMI स्ट्रक्चर अपने आप नहीं बदलता। यानी गहने की शुद्धता का असर मुख्य रूप से लोन की पात्र रकम पर होता है। कर्जदाता की स्कीम और रिपेमेंट का तरीका वही रहता है, जो उस गोल्ड लोन प्रोडक्ट के लिए तय है।
लोन की रकम तय करने में LTV का बड़ा रोल
गहने की वैल्यू तय होने के बाद अगला सवाल आता है कि उसके बदले कितना लोन मिलेगा। यहां Loan-to-Value यानी LTV की भूमिका अहम हो जाती है। कोठारी के मुताबिक, RBI के नियमों के तहत गोल्ड लोन के लिए LTV अलग-अलग स्लैब में तय है। उनके अनुसार 2.5 लाख रुपये तक के लोन पर 85% तक (सोने की कीमत 1 लाख तो 85,000 रुपये तक का लोन), 5 लाख रुपये तक के लोन पर 80% तक और 5 लाख रुपये से ज्यादा के लोन पर 75% तक LTV हो सकता है। गहने की वैल्यू ज्यादा होने के बावजूद पूरी वैल्यू के बराबर लोन नहीं मिलता। लागू LTV के हिसाब से ही अंतिम रकम तय होती है।
गहने में लगे पत्थर भी घटा सकते हैं लोन की रकम
कई लोग गहने का कुल वजन देखकर अनुमान लगा लेते हैं कि उन्हें उतने ही वजन के सोने पर लोन मिलेगा। ऐसा नहीं है। अगर गहने में कीमती पत्थर, नग या दूसरे गैर-सोने वाले हिस्से लगे हैं, तो उनकी कीमत को सोने की वैल्यू में शामिल नहीं किया जाता। पहले इन हिस्सों का वजन अलग किया जाता है और फिर वास्तविक सोने के वजन के आधार पर वैल्यू तय होती है। गहने में लगे दूसरे पत्थर और चीजें हटाने के बाद सिर्फ शुद्ध सोने के वजन को लोन के लिए देखा जाता है। अगर किसी गहने के वजन का करीब 50% हिस्सा पत्थरों का है, तो उसे स्वीकार करने में भी दिक्कत हो सकती है। इससे कम पत्थर होने पर वैल्यू तय करते समय जरूरी कटौती की जा सकती है।
गोल्ड की कीमत बढ़े तो उसी गहने पर मिल सकता है ज्यादा लोन
सोने की कीमत बढ़ने का फायदा सिर्फ सोना बेचने वालों को ही नहीं मिलता। अगर आपका सोना पहले से गिरवी रखा है, तो बढ़ी कीमत के आधार पर उसी गहने पर अतिरिक्त यानी टॉप-अप लोन की गुंजाइश बन सकती है। यह पूरी तरह पात्रता और लागू LTV पर निर्भर करेगा। यानी अगर गिरवी रखे सोने की बाजार वैल्यू बढ़ती है, तो कुछ मामलों में उसी सोने के बदले ज्यादा रकम उधार लेने की क्षमता भी बढ़ सकती है।
गोल्ड की वैल्यू कैसे तय होती है?
गोल्ड लोन देने वाली कंपनियां सोने की कीमत तय करने के लिए सिर्फ गहने के वजन को आधार नहीं बनातीं। शुद्धता और नेट गोल्ड वेट की जांच के बाद लोन के लिए योग्य वैल्यू निकाली जाती है। कर्जदाता आमतौर पर 24K, 22K और 18K जैसे शुद्धता स्तरों को देखते हैं। 18 कैरेट से कम प्योरिटी वाले सोने को आमतौर पर गोल्ड लोन के लिए पात्र नहीं माना जाता।
गोल्ड की वैल्यू तय करने के लिए Indian Bullion and Jewellers Association यानी IBJA की पिछले 30 दिनों की दर का औसत या मौजूदा सोने की कीमत को देखा जा सकता है। इनमें से कम दर को वैल्यूएशन के लिए लागू किया जा सकता है। इसके बाद LTV के हिसाब से लोन की अंतिम रकम तय होती है।
EMI के अलावा रिपेमेंट के दूसरे तरीके भी हो सकते हैं
यह जरूरी नहीं कि हर गोल्ड लोन में सिर्फ सामान्य EMI ही चुकानी हो। कर्जदाता और लोन स्कीम के हिसाब से अलग-अलग विकल्प मिल सकते हैं। इनमें नियमित EMI के जरिए मूलधन और ब्याज दोनों चुकाना, सिर्फ ब्याज चुकाना और मूलधन बाद में देना, तय अंतराल पर ब्याज जमा करना या अंत में एकमुश्त यानी बुलेट रिपेमेंट जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।
जरूरत से ज्यादा गोल्ड लोन लेने से बचें
गोल्ड लोन लेते समय एक गलती से बचना चाहिए। सिर्फ इसलिए ज्यादा पैसा न लें क्योंकि बैंक या NBFC आपको उतना लोन देने के लिए तैयार है। कई बार लोग अपनी जरूरत से ज्यादा रकम उठा लेते हैं। अगर आपको सिर्फ 10 हजार रुपये की जरूरत है, तो उतना ही लोन लेना बेहतर है। याद रखिए, इस लोन के बदले आपका सोना गिरवी रहता है। अगर आप समय पर लोन नहीं चुका पाते हैं तो लागू नियम और शर्तों के मुताबिक कर्जदाता सोने की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।



(@felixprehn)