बांका नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड-19 और 20 सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों को शहर आने-जाने में सुविधा देने के उद्देश्य से ओढ़नी नदी पर बनाया गया डायवर्सन पहली ही बड़ी बारिश में नदी के तेज बहाव की भेंट चढ़ गया। बांका-चुड़ैली-विदायडीह मार्ग पर पिछले साल नवंबर में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए इस डायवर्सन के बह जाने से शहर से जुड़े महत्वपूर्ण मार्ग का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इससे हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है।मरीजों को खाट पर लिखने के लिए मजबूर है। आने-जाने का सबसे आसान और छोटा रास्ता था
चुरैली, विदायडीह सहित आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए यह मार्ग बांका शहर आने-जाने का सबसे आसान और छोटा रास्ता था। डायवर्सन टूट जाने के बाद लोगों को शहर पहुंचने के लिए अब अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे समय के साथ परिवहन खर्च भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में इस मार्ग पर आवागमन पहले से ही चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में डायवर्सन टूटने से परेशानी और बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, नदी के पानी की निकासी को ध्यान में रखते हुए डायवर्सन में कई ह्यूम पाइप लगाए गए थे । पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण ओढ़नी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा ।नदी में पानी का बहाव अचानक तेज हो गया, जिसके कारण डायवर्सन का बड़ा हिस्सा पानी के साथ बह गया।ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति देखी तो पूरा डायवर्सन क्षतिग्रस्त मिला और मार्ग से आवागमन बंद हो चुका था। लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीमार महिला को खाट पर लादकर नदी पार कराया
डायवर्सन टूटने के बाद सबसे अधिक परेशानी मरीजों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। चुरैली वार्ड-19 निवासी 70 वर्षीय बीबी हलीमा खातून की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों को उन्हें इलाज के लिए बांका ले जाने में काफी परेशानी हुई। रास्ता बंद होने के कारण परिजनों ने बीमार महिला को खाट पर लादा और किसी तरह नदी पार कराकर इलाज के लिए बांका ले गए। इस घटना ने इलाके में व्याप्त समस्या की गंभीरता को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, मार्ग बंद होने से स्कूली बच्चों, मजदूरों, किसानों और स्थानीय व्यवसायियों को भी परेशानी हो रही है। कई लोगों को दूसरे रास्ते से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि बरसात के दौरान उन्हें जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी बन जाती है।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
ग्रामीण मो. अजमल हुसैन ने आरोप लगाया कि डायवर्सन के निर्माण के दौरान गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। वहीं, ग्रामीण हत्रान अंसारी ने कहा कि डायवर्सन के शिलान्यास पट्ट पर निर्माण लागत का उल्लेख नहीं किया गया है। उनका कहना है कि सरकारी निर्माण कार्यों में योजना की लागत सहित आवश्यक जानकारी सार्वजनिक रूप से अंकित होनी चाहिए। राशि का उल्लेख नहीं होने से निर्माण कार्य की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण मोईम अंसारी, बाबर अंसारी, सगीर अंसारी, शंकर दास, बट्टू राय, सुमन कुमारी, बीबी मेहनाज खातून, सालीक अंसारी, अफरोज अंसारी, अली हसन, मीनाम अंसारी और गुलाम अंसारी सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। हर साल अस्थायी समाधान, स्थायी पुल की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से ओढ़नी नदी पर मजबूत और स्थायी पुल निर्माण की मांग की जा रही है। इसके बावजूद हर साल अस्थायी डायवर्सन बनाकर काम चलाया जाता है। बारिश में डायवर्सन क्षतिग्रस्त होने के बाद लोगों को फिर परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था कराने के साथ ही स्थायी पुल निर्माण की दिशा में पहल करने की मांग की है। पानी कम होते ही दुरुस्त होगा डायवर्सन : सभापति
बांका नगर परिषद के सभापति बालमुकुंद सिंह ने बताया कि नदी में पानी का अत्यधिक बहाव होने के कारण डायवर्सन क्षतिग्रस्त हुआ है। पानी का बहाव कम होते ही डायवर्सन को पुनः दुरुस्त कराया जाएगा, ताकि आम लोगों को आवागमन में परेशानी नहीं हो। बांका नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड-19 और 20 सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों को शहर आने-जाने में सुविधा देने के उद्देश्य से ओढ़नी नदी पर बनाया गया डायवर्सन पहली ही बड़ी बारिश में नदी के तेज बहाव की भेंट चढ़ गया। बांका-चुड़ैली-विदायडीह मार्ग पर पिछले साल नवंबर में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए इस डायवर्सन के बह जाने से शहर से जुड़े महत्वपूर्ण मार्ग का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इससे हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है।मरीजों को खाट पर लिखने के लिए मजबूर है। आने-जाने का सबसे आसान और छोटा रास्ता था
चुरैली, विदायडीह सहित आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए यह मार्ग बांका शहर आने-जाने का सबसे आसान और छोटा रास्ता था। डायवर्सन टूट जाने के बाद लोगों को शहर पहुंचने के लिए अब अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे समय के साथ परिवहन खर्च भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में इस मार्ग पर आवागमन पहले से ही चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में डायवर्सन टूटने से परेशानी और बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, नदी के पानी की निकासी को ध्यान में रखते हुए डायवर्सन में कई ह्यूम पाइप लगाए गए थे । पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण ओढ़नी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा ।नदी में पानी का बहाव अचानक तेज हो गया, जिसके कारण डायवर्सन का बड़ा हिस्सा पानी के साथ बह गया।ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति देखी तो पूरा डायवर्सन क्षतिग्रस्त मिला और मार्ग से आवागमन बंद हो चुका था। लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीमार महिला को खाट पर लादकर नदी पार कराया
डायवर्सन टूटने के बाद सबसे अधिक परेशानी मरीजों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। चुरैली वार्ड-19 निवासी 70 वर्षीय बीबी हलीमा खातून की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों को उन्हें इलाज के लिए बांका ले जाने में काफी परेशानी हुई। रास्ता बंद होने के कारण परिजनों ने बीमार महिला को खाट पर लादा और किसी तरह नदी पार कराकर इलाज के लिए बांका ले गए। इस घटना ने इलाके में व्याप्त समस्या की गंभीरता को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, मार्ग बंद होने से स्कूली बच्चों, मजदूरों, किसानों और स्थानीय व्यवसायियों को भी परेशानी हो रही है। कई लोगों को दूसरे रास्ते से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि बरसात के दौरान उन्हें जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी बन जाती है।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
ग्रामीण मो. अजमल हुसैन ने आरोप लगाया कि डायवर्सन के निर्माण के दौरान गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। वहीं, ग्रामीण हत्रान अंसारी ने कहा कि डायवर्सन के शिलान्यास पट्ट पर निर्माण लागत का उल्लेख नहीं किया गया है। उनका कहना है कि सरकारी निर्माण कार्यों में योजना की लागत सहित आवश्यक जानकारी सार्वजनिक रूप से अंकित होनी चाहिए। राशि का उल्लेख नहीं होने से निर्माण कार्य की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण मोईम अंसारी, बाबर अंसारी, सगीर अंसारी, शंकर दास, बट्टू राय, सुमन कुमारी, बीबी मेहनाज खातून, सालीक अंसारी, अफरोज अंसारी, अली हसन, मीनाम अंसारी और गुलाम अंसारी सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। हर साल अस्थायी समाधान, स्थायी पुल की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से ओढ़नी नदी पर मजबूत और स्थायी पुल निर्माण की मांग की जा रही है। इसके बावजूद हर साल अस्थायी डायवर्सन बनाकर काम चलाया जाता है। बारिश में डायवर्सन क्षतिग्रस्त होने के बाद लोगों को फिर परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था कराने के साथ ही स्थायी पुल निर्माण की दिशा में पहल करने की मांग की है। पानी कम होते ही दुरुस्त होगा डायवर्सन : सभापति
बांका नगर परिषद के सभापति बालमुकुंद सिंह ने बताया कि नदी में पानी का अत्यधिक बहाव होने के कारण डायवर्सन क्षतिग्रस्त हुआ है। पानी का बहाव कम होते ही डायवर्सन को पुनः दुरुस्त कराया जाएगा, ताकि आम लोगों को आवागमन में परेशानी नहीं हो।


