Cold Sores Symptoms: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि कभी होंठ के किनारे या आसपास अचानक से छोटे-छोटे पानी भरे दाने निकल आते हैं? ये दाने दिखने में तो खराब लगते ही हैं, लेकिन इनमें दर्द और जलन भी बहुत होती है। इनको कोल्ड सोर (Cold Sores) या फीवर ब्लिस्टर कहा जाता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह एक आम वायरस की वजह से होता है। इसमें होंठों के आसपास छोटे-छोटे पानी भरे दाने (फफोले) निकल आते हैं, जो अक्सर एक साथ गुच्छे में होते हैं। 2-3 दिन बाद ये दाने फूट जाते हैं और इनमें से हल्का पानी बहने लगता है। इसके बाद घाव पर एक सूखी पपड़ी बन जाती है, जो कुछ दिनों तक रहती है। अच्छी बात यह है कि 2 से 3 हफ्ते में ये छाले खुद-ब-खुद पूरी तरह ठीक हो जाते हैं और होंठ पर इसका कोई दाग या निशान नहीं छोड़ते। आइए जानते हैं कि इसके कारण और लक्षण क्या होते हैं?
क्यों होते हैं ये छालें?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, कोल्ड सोर के कारण होने वाले छाले हर्पीज वायरस (HSV) के कारण होते हैं। इसके दो टाइप होते हैं HSV-1 और HSV-2। ज्यादातर होठों के छाले HSV-1 की वजह से ही होते हैं। यह वायरस शरीर में चुपचाप पड़ा रहता है, लेकिन कुछ चीजें इसे अचानक जगा देती हैं जिसके कारण ये सक्रिय हो जाता है;
- कोई बीमारी या बुखार होना।
- मानसिक या शारीरिक तनाव (टेंशन)।
- तेज धूप का लगना।
- होंठ पर कोई चोट या कट लग जाना।
- शरीर में हार्मोनल बदलाव होना (जैसे महिलाओं में पीरियड्स या प्रेग्नेंसी के दौरान)।
कोल्ड सोर के लक्षण क्या होते हैं?
- छाला निकलने से एक या दो दिन पहले, आपको होंठ की किसी खास जगह पर हल्की खुजली या झनझनाहट।
- छोटे-छोटे, लाल रंग के पानी भरे दाने निकलना।
- दो-तीन दिन बाद ये दानों का फूटना।
- घाव पर एक भूरे या पीले रंग की पपड़ी जमना।
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
ये छाले 10 से 14 दिनों में खुद-ब-खुद ठीक हो जाते हैं और इसके लिए किसी खास इलाज की जरूरत नहीं होती। लेकिन आपको डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए अगर;
- छालों को निकले हुए दो हफ्ते से ज्यादा हो गए हैं और वे ठीक नहीं हो रहे हैं।
- आपको बहुत तेज दर्द हो रहा है या छाले बहुत बड़े हो गए हैं।
- छाले आंखों के पास फैलने लगे हैं (यह खतरनाक हो सकता है)।
- आपको बार-बार और बहुत जल्दी-जल्दी छाले निकलते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

