SIP में असली कमाई स्कीम चुनने से नहीं, बल्कि समय देने से होती है। नई SIP स्टडी बताती है कि जो निवेशक लंबे समय तक निवेश में बने रहते हैं, उनके लिए नुकसान की गुंजाइश धीरे-धीरे लगभग खत्म हो जाती है। आजकल हर दूसरा निवेशक SIP शुरू तो कर देता है, लेकिन बाजार गिरते ही घबराहट शुरू हो जाती है। पोर्टफोलियो लाल दिखा नहीं कि लोग या तो SIP रोक देते हैं या पैसा निकाल लेते हैं। जबकि आंकड़े बता रहे हैं कि जल्दबाजी सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है।
1 साल की SIP पर नुकसान की संभावना 22.7%
ईटी वेल्थ और क्रिसिल की एसआईपी स्टडी 2026 के मुताबिक, अगर किसी निवेशक ने सिर्फ 1 साल के लिए SIP की है, तो नुकसान होने की संभावना करीब 22.7 फीसदी रहती है। यानी हर पांच में से एक निवेशक घाटा देख सकता है। लेकिन जैसे-जैसे निवेश की अवधि बढ़ती है, जोखिम कम होता जाता है। 6 साल बाद नुकसान की संभावना 2 फीसदी से नीचे आ जाती है। वहीं, 10 साल तक एसआईपी जारी रखने वालों के लिए ऐतिहासिक डेटा में नुकसान का कोई मामला नहीं मिला।
स्टडी में 120 एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का डेटा शामिल किया गया। इसमें 2011 से 2026 तक अलग-अलग बाजार हालात का विश्लेषण किया गया। मकसद सिर्फ इतना था कि SIP का असली खेल समझा जाए। यानी बाजार में कब डरना नहीं चाहिए और कितने साल का धैर्य सबसे ज्यादा काम आता है।
शॉर्ट टर्म में रिटर्न और जोखिम दोनों ज्यादा
दिलचस्प बात यह है कि बहुत ज्यादा रिटर्न की उम्मीद लंबे समय में कम होती जाती है। अगर कोई निवेशक 20 फीसदी से ज्यादा सालाना रिटर्न चाहता है तो उसके मौके छोटी अवधि में ज्यादा रहते हैं। 1 साल की SIP में 20 फीसदी से ऊपर रिटर्न मिलने की संभावना करीब 38 फीसदी रही। लेकिन 10 साल की SIP में यह घटकर 9 फीसदी सालाना से भी कम रह गई। यानी लंबी अवधि का निवेश आतिशबाजी नहीं करता, लेकिन धीरे-धीरे मजबूत वेल्थ जरूर बनाता है।
कब मिलेगा 10% से ज्यादा रिटर्न
स्टडी में यह भी सामने आया कि 4 साल से ज्यादा समय तक SIP जारी रखने वालों के लिए 10 फीसदी से ऊपर रिटर्न मिलने की संभावना 80 फीसदी से ज्यादा हो जाती है। वहीं, 5 साल के बाद औसत रिटर्न करीब 15 फीसदी के आसपास स्थिर होने लगते हैं।
ह्यूमन बिहेवियर है बड़ी प्रॉब्लम
असल जिंदगी में सबसे बड़ी परेशानी बाजार नहीं, इंसानी व्यवहार है। बहुत कम लोग ऐसे हैं जो बिना रुके लगातार 10 साल तक एक ही SIP चलाते हैं। कई लोग बीच में फंड बदल देते हैं, कुछ SIP रोक देते हैं, तो कुछ बाजार गिरते ही पैसा बाहर निकाल लेते हैं।
कोविड में दिखी असल तस्वीर
कोविड क्रैश का उदाहरण इस बात को और स्पष्ट करता है। मार्च 2020 में जब शेयर बाजार बुरी तरह टूटा था, तब 1 साल पुरानी SIP वालों का औसत रिटर्न करीब -50 फीसदी तक चला गया था। यानी आधी पूंजी डूबती हुई दिख रही थी। लेकिन 8 से 9 साल पुराने निवेशकों पर असर काफी कम पड़ा और कई निवेशक तब भी मुनाफे में बने रहे। यही SIP की असली ताकत है। समय धीरे-धीरे गिरावट का असर कम करता जाता है।


