अमेरिका (United States of America) और ईरान (Iran) के बीच बातचीत का आखिरी चरण जारी है। हालांकि पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा था कि दोनों देशों के बीच जल्द ही डील हो सकती है, लेकिन अब उन्होंने अपने प्रशासन को हिदायत दी है कि इस काम में कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। डील के लिए बातचीत के दौरान दोनों देशों में तनाव की स्थिति भी बनी हुई है। इसी बीच अब ईरान की संसद की शक्तिशाली राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता और ईरानी सांसद इब्राहिम रेज़ाई (Ebrahim Rezaei) ने एक बड़ी बात कह दी है।
“धमकियों के आगे नहीं झुकता ईरान”
रेज़ाई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “सैन्य युद्ध के दौरान हमारी रणनीति ‘जैसे को तैसा’ थी। कूटनीतिक युद्ध में हमारा तरीका है ‘कार्रवाई के बदले कार्रवाई’। असफल राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) के झांसे में मत आइए, समय अमेरिकियों के खिलाफ है। अगर वो समझौता चाहते हैं, तो उन्हें बातचीत करनी चाहिए। अगर वो 6 डॉलर प्रति गैलन गैस/तेल चाहते हैं, तो उन्हें दृढ़ रहना चाहिए और तब तक धमकियाँ देते रहना चाहिए जब तक कि उनके पैरों के पास घास न उग जाए। ईरान किसी ताकत या धमकियों के आगे नहीं झुकता।”
क्या है ईरान और अमेरिका के बीच डील की मुख्य शर्तें?
ईरान के परमाणु प्रोग्राम पर संशय अभी भी बरकरार है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि अमेरिका से डील के तहत ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) सरेंडर करने के लिए तैयार हो गया है। ईरान के परमाणु प्रोग्राम के लिए संवर्धित यूरेनियम बेहद ही अहम है और इसी वजह से ट्रंप शुरू से ही चाहते थे कि ईरान के पास यूरेनियम न रहे। हालांकि ईरान शुरू से ही इसे सरेंडर करने के खिलाफ रहा है, लेकिन अब बताया जा रहा है कि ईरान ऐसा करने के लिए राजी हो गया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट ने भी इसका दावा किया है। हालांकि ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस दावे का खंडन कर दिया है।। इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि ईरान की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोल दिया जाए। वहीँ ईरान चाहता है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से अपनी नाकेबंदी हटा दें और ईरान पर लगाए प्रतिबंधों से भी राहत दे। हालांकि ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसी का कंट्रोल रहेगा।


