जेके मंदिर में थिरके कदम,हवा में उड़ीं फूलों की पंखुड़ियां:’नृत्यांजलि पुरुषोत्तम उत्सव’ में कलाकारों की जुगलबंदी; टोकरी से फूल उड़ाकर मंत्रमुग्ध किया

जेके मंदिर में थिरके कदम,हवा में उड़ीं फूलों की पंखुड़ियां:’नृत्यांजलि पुरुषोत्तम उत्सव’ में कलाकारों की जुगलबंदी; टोकरी से फूल उड़ाकर मंत्रमुग्ध किया

शहर के सुप्रसिद्ध श्री राधा कृष्ण मंदिर (जेके मंदिर) परिसर में एक ऐसी शाम सजी, जिसने वहां मौजूद हर शख्स को भक्ति और कला के अनूठे संगम से सराबोर कर दिया। मौका था ‘नृत्यांजलि पुरुषोत्तम उत्सव’ का, जहां सुर, ताल और घुंघरू की जुगलबंदी ने भगवान श्री कृष्ण के प्रति अगाध प्रेम को जीवंत कर दिया। देर शाम 7:00 बजे जैसे ही इस उत्सव का शंखनाद हुआ, पूरा मंदिर परिसर दर्शकों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से खचाखच भर गया। कला कुंज ग्रुप के प्रतिभावान कलाकारों ने जब मंच संभाला, तो उनकी एक-एक मुद्रा पर दर्शकों ने जोरदार तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया। रंग-बिरंगे लहंगे और घूमते घाघरे: थिरकते कदमों से हुई शुरुआत उत्सव का आगाज बेहद खूबसूरत और मनमोहक था। मंच पर रंग-बिरंगे पारंपरिक लहंगे पहने कुछ लड़कियां बेहद शालीनता के साथ नृत्य की मुद्रा में बैठी नजर आईं। जैसे ही संगीत की मधुर धुन गूंजी, वे धीरे-धीरे उठीं और गोल घूमते हुए थिरकने लगीं। उनकी पोशाक के रंग और चेहरे के भावों ने समां बांध दिया। अगले ही पल, जब महिला कलाकरों ने एक बड़े गोल घेरे में घूम-घूम कर नृत्य करना शुरू किया, तो पृष्ठभूमि में लहराते भगवा झंडों ने पूरे माहौल को और भी ज्यादा दिव्य और सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। बिखरी पंखुड़ियां और शास्त्रीय नृत्य का जादू कार्यक्रम जैसे-जैसे आगे बढ़ा, कला के रंग और गहरे होते गए। खुले मंदिर परिसर में लाल रंग की खूबसूरत साड़ी पहने एक महिला कलाकार ने जब कदमताल शुरू की, तो हर कोई देखता रह गया। जमीन पर बिखरी फूलों की पंखुड़ियों के बीच उनकी प्रस्तुति ऐसी लग रही थी मानो प्रकृति खुद इस उत्सव का हिस्सा बन गई हो। इसके तुरंत बाद, हरे रंग की पारंपरिक पोशाक में सजी एक अन्य महिला कलाकार ने मंच संभाला। उन्होंने शास्त्रीय नृत्य (क्लासिकल डांस) की बेहद कठिन और खूबसूरत मुद्राएं प्रदर्शित कीं। टोकरी से उड़े फूल और जुगलबंदी के साथ हुआ समापन
उत्सव का सबसे शानदार और भावुक पल वह था, जब वीडियो के अंतिम हिस्से में दो महिला कलाकार पारंपरिक साड़ियों में एक साथ मंच पर आईं। दोनों के बीच की जुगलबंदी देखने लायक थी। दोनों ने जमीन पर रखी टोकरियों से फूलों की पंखुड़ियों को उठाया और झूमते हुए हवा में उड़ा दिया। हवा में तैरती पंखुड़ियां, कानों में रस घोलता संगीत और दोनों कलाकारों के कदम से कदम मिलाते हुए थिरकते पैर… इस अंतिम प्रस्तुति ने वहां मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस भव्य सांस्कृतिक शाम का समापन हुआ।

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