वाराणसी कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर अधिग्रहित जमीन की मापी का रास्ता फिलहाल साफ हो गया है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेस-वे को लेकर आज औरंगाबाद के कुटुंबा प्रखंड कार्यालय सभागार में जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने धनीवार गांव के किसानों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में किसानों से जमीन अधिग्रहण से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की गई और परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग की अपील की गई। बैठक में किसानों की सहमति मिलने के बाद प्रशासन ने आने वाले सोमवार से जमीन की मापी शुरू कराने का निर्णय लिया। हालांकि बैठक समाप्त होने के बाद किसानों के बीच मुआवजा और न्यायालय में लंबित मामले को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए। कई किसानों ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल भी उठाए। बैठक में एडीएम अनुग्रह नारायण सिंह, एसडीएम संतन कुमार सिंह, एडीएम आपदा उपेंद्र पंडित, एनएचएआई के परियोजना निदेशक, पीएनसी इन्फ्राटेक के जीएम मनीष सिंह, अजीत कुमार झा, बीडीओ प्रियांशु बसु और अंचल अधिकारी चंद्र प्रकाश सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने किसानों को परियोजना की उपयोगिता और जमीन मापी की प्रक्रिया की जानकारी दी। धनीबार गांव में कैंप लगाकर तैयार किया जाएगा दस्तावेज एडीएम अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि जिन किसानों का एलपीसी या अन्य आवश्यक दस्तावेज अभी तैयार नहीं हो पाया है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। प्रशासन धनीवार गांव में विशेष कैंप लगाकर मौके पर ही दस्तावेज तैयार कराने की व्यवस्था करेगा, ताकि किसी भी किसान को परेशानी न हो। बैठक के दौरान कुछ किसानों ने एक्सप्रेस-वे परियोजना का समर्थन करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र का विकास होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वहीं दूसरी ओर कई किसानों ने जमीन मापी का विरोध किया। विरोध कर रहे किसानों का कहना था कि भूमि अधिग्रहण का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए कोर्ट का फैसला आने से पहले मापी कराना उचित नहीं है। किसानों में नाराजगी, बोले- जबरन नापी करवाने की कोशिश कर रहे अधिकारी बैठक समाप्त होने के बाद सभागार के बाहर किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आई। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उन पर दबाव बनाकर जमीन मापी कराने की कोशिश कर रहा है। किसान वैद्यनाथ नाथ तिवारी ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही गांव में अलग-अलग किसानों को अलग-अलग मुआवजा दर दी जा रही है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब तक अदालत में चल रहे मामले का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक प्रभावित किसान जमीन मापी का समर्थन नहीं करेंगे। फिलहाल प्रशासन सोमवार से मापी शुरू कराने की तैयारी में जुटा है, जबकि गांव में किसानों के बीच समर्थन और विरोध दोनों की स्थिति बनी हुई है। वाराणसी कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर अधिग्रहित जमीन की मापी का रास्ता फिलहाल साफ हो गया है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेस-वे को लेकर आज औरंगाबाद के कुटुंबा प्रखंड कार्यालय सभागार में जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने धनीवार गांव के किसानों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में किसानों से जमीन अधिग्रहण से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की गई और परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग की अपील की गई। बैठक में किसानों की सहमति मिलने के बाद प्रशासन ने आने वाले सोमवार से जमीन की मापी शुरू कराने का निर्णय लिया। हालांकि बैठक समाप्त होने के बाद किसानों के बीच मुआवजा और न्यायालय में लंबित मामले को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए। कई किसानों ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल भी उठाए। बैठक में एडीएम अनुग्रह नारायण सिंह, एसडीएम संतन कुमार सिंह, एडीएम आपदा उपेंद्र पंडित, एनएचएआई के परियोजना निदेशक, पीएनसी इन्फ्राटेक के जीएम मनीष सिंह, अजीत कुमार झा, बीडीओ प्रियांशु बसु और अंचल अधिकारी चंद्र प्रकाश सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने किसानों को परियोजना की उपयोगिता और जमीन मापी की प्रक्रिया की जानकारी दी। धनीबार गांव में कैंप लगाकर तैयार किया जाएगा दस्तावेज एडीएम अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि जिन किसानों का एलपीसी या अन्य आवश्यक दस्तावेज अभी तैयार नहीं हो पाया है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। प्रशासन धनीवार गांव में विशेष कैंप लगाकर मौके पर ही दस्तावेज तैयार कराने की व्यवस्था करेगा, ताकि किसी भी किसान को परेशानी न हो। बैठक के दौरान कुछ किसानों ने एक्सप्रेस-वे परियोजना का समर्थन करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र का विकास होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वहीं दूसरी ओर कई किसानों ने जमीन मापी का विरोध किया। विरोध कर रहे किसानों का कहना था कि भूमि अधिग्रहण का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए कोर्ट का फैसला आने से पहले मापी कराना उचित नहीं है। किसानों में नाराजगी, बोले- जबरन नापी करवाने की कोशिश कर रहे अधिकारी बैठक समाप्त होने के बाद सभागार के बाहर किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आई। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उन पर दबाव बनाकर जमीन मापी कराने की कोशिश कर रहा है। किसान वैद्यनाथ नाथ तिवारी ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही गांव में अलग-अलग किसानों को अलग-अलग मुआवजा दर दी जा रही है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब तक अदालत में चल रहे मामले का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक प्रभावित किसान जमीन मापी का समर्थन नहीं करेंगे। फिलहाल प्रशासन सोमवार से मापी शुरू कराने की तैयारी में जुटा है, जबकि गांव में किसानों के बीच समर्थन और विरोध दोनों की स्थिति बनी हुई है।


